प्रेम कुमार मणि का संस्मरणात्मक आलेख 'तलस्तोय, चेख़फ़ और गोरिकी'।'तलस्तोय, चेख़फ़ और गोरिकी
'तलस्तोय, गोरिकी और चेख़फ़ रूस ने दुनिया को बोल्शेविक क्रान्ति के साथ साथ एक से बढ़ कर एक अप्रतिम साहित्यकार दिए हैं। यह विश्वास कर पाना ही रोमांच से भर देता है कि एक समय वहाँ पर तलस्तोय , चेखफ़ , और गोरिकी (गोर्की) जैसे रचनाकार थे जिनका आपस में संवाद भी था। इन सभी ने अपनी रचनाओं में रूस की तत्कालीन परिस्थिति और जार के तानाशाही शासन की आलोचना की। ऐसा माना जाता है कि बोल्शेविक क्रान्ति घटित होने में गोरिकी की क्लासिकल कृति ' मदर ' का भी बड़ा हाथ था। तलस्तोय और चेखफ़ की कृतियाँ पढ़ कर लोग आज भी चकित रह जाते हैं। उनके सूक्ष्म ब्यौरे पढ़ कर हम यह महसूस करते हैं कि इस विषय या चीज को ले कर इस तरह भी सोचा जा सकता है। दुनिया के तमाम रचनाकार दृष्टि की इस बारीकी से आज भी सबक लेते हैं। प्रेम कुमार मणि हमारे समय के गम्भीर विचारक और अध्येता हैं। साहित्य , संस्कृति और समकालीन मुद्दों पर उनका हस्तक्षेप हम फेसबुक पर पढ़ते रहते हैं। उन्होंने इन तीनों रचनाकारों को ले कर एक आलेख लिखा है। आज पहली बार पर प्रस्तुत है प्रेम कुमार मणि का संस्मरणात्मक आलेख ' तलस्तोय , चेख़फ़ और ग...