गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज की कहानी 'बाल्थाजार की आश्चर्यजनक दोपहर'।
गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज मार्खेज दुनिया के उम्दा रचनाकारों में से एक हैं। मनुष्यता और उम्मीद उनकी रचनाओं के केंद्रीय विषय रहे हैं। ' बाल्थाजार की आश्चर्यजनक दोपहर ' उनकी एक बेजोड़ कहानी है। कहानी का अनुवाद किया है सुशान्त सुप्रिय ने। बाल्थाज़ार जो एक सामान्य व्यक्ति है एक खूबसूरत पिंजरा बनाता है जिसका मुँहमांगा दाम देने के लिए लोग तैयार हैं। इस दाम को लेकर उसकी पत्नी उर्सुला सुंदर सपने देखने लगती है। बाल्थाज़ार इसे चेपे मौंतिएल को बेचना चाहता है जिससे कि उसका प्यारा सा बच्चा पेपे खेल सके। लेकिन मौंतिएल इसे खरीदना नहीं चाहता। कहानी का अनुवाद इतना प्रवाहमयी है कि लगता है जैसे हम मूल कहानी को ही हिन्दी में पढ़ रहे हों। सुशान्त सुप्रिय के अनुवाद की यह खूबसूरती भी है। आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज की कहानी ' बाल्थाजार की आश्चर्यजनक दोपहर ' । बाल्थाज़ार की आश्चर्यजनक दोपहर मूल : गैब्रिएल गार...