संदेश

शालिग्राम लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रणविजय सिंह सत्यकेतु का आलेख 'सृजन की ऊर्जा के संपूर्ण सौंदर्य का सस्वर गायन'

चित्र
  शालिग्राम कहानीकार परिचय  शालिग्राम 1934 में बिहार में अकाल पड़ा। उसी साल 21 मई को कथाकार शालिग्राम का जन्म हुआ। नई कहानी के ठीक बाद वाली पीढ़ी के रचनाकार हैं शालिग्राम। धर्मयुग के संपादक धर्मवीर भारती ने देशभर के जिन 17 नए रचनाकारों को एक शृंखला के तहत छापा, उनमें ज्ञानरंजन, मेहरुन्निशा परवेज और शालिग्राम शामिल थे। इसके अलावा साप्ताहिक हिन्दुस्तान, सारिका, दिनमान, नई कहानियां में उनकी रचनाएं प्रकाशित होती रहीं। इजोतिया, नटुआ दयाल, पाही आदमी, बासमती, राकस, साफा, केंचुल आदि उनकी चर्चित कहानियां हैं। पहला कहानी संग्रह 1963 में पाही आदमी नाम से आया जिसकी रेणु और नागार्जुन ने भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उनकी अन्य रचनाओं में किनारे के लोग, कित आऊं कित जाऊं, मैलो नीर भरो (सभी उपन्यास) के अलावा संघाटिका, आंगन में झुका आसमान (कविता संग्रह) और घोघो रानी कित्ता पानी (रिपोर्ताज), देखा दर्पण अपना तर्पण (आत्मकथा) शालिग्राम की आंचलिक कहानियां शामिल हैं। 1971 में भारत-नेपाल पर आधारित सांस्कृतिक रिपोर्ताज 'अटपट बैन मोरंगिया रैन' राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल हुआ।...