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परिचय दास का आलेख 'एक स्त्री, एक तंबूरा और महाभारत'

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तीजन बाई वेद भारत के प्राचीनतम ग्रन्थ माने जाते हैं। ये श्रुति परंपरा में आते हैं। लेखन कला के विकास के साथ श्रुति परंपरा में साहित्य सृजन की प्रक्रिया धीमी पड़ गई। अरसे बाद भक्ति काल के सन्त भी इस श्रुति परंपरा को अपनाते दिखाई पड़ते हैं। तीजन बाई ने अपने पंडवानी गायन के जरिए महाभारत के श्रुति परंपरा को पुनराविष्कृत किया। उत्तर भारत में यह कहते हुए लोग महाभारत को घर में नहीं रखते कि इससे घर में महाभारत मच जाता है। लेकिन तीजन बाई लीक पर चलने की आदी ही नहीं थी। उन्होंने उस महाभारत को अपनी स्मृतियों में रखा, अपनी जुबान पर रखा और लोगों को महाभारत की कथाएँ सुनाईं। वे इन कथाओं को आज के परिप्रेक्ष्य से जोड़ने का हुनर जानती थीं इसीलिए उनकी प्रस्तुति श्रोताओं के दिल दिमाग पर सीधा असर करती थी। तीजन बाई ने और कई लीक तोड़ी। वे कापालिक शैली में पंडवानी गाने लगीं, जिसमें कलाकार खड़े हो कर अपनी कल्पना से महाभारत के प्रसंगों को जीवंत करता है। हालांकि बरसों पंडवानी गाने के बाद भोपाल के भारत भवन में जब उनका कार्यक्रम रखा गया, तब उन्हें जा कर पता चला कि वो पंडवानी की कापालिक शैली की गायिका हैं। एक बार अ...

परिचय दास का श्रद्धांजलि आलेख 'फिल्म गायिका : सुमन कल्याणपुर'

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सुमन कल्याणपुर  संगीत अपने आप में एक साधना है। रियाज इसका मुख्य हिस्सा होता है। जो इसे साध लेता है वह संगीत की ऊँचाइयों तक पहुँच जाता है। यह ऊँचाई बिरले ही प्राप्त कर पाते हैं। सुमन कल्याणपुर ऐसे ही गायिकाओं में शुमार की जाती हैं जिनका स्वर अनायास ही श्रोताओं को अपनी तरफ आकृष्ट कर लेता था। उनके समय में तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी जो आवाज को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सके। परिचय दास लिखते हैं 'तब गायकी संवेदना का अपना अनुशासन हुआ करता था। उन्होंने इस अनुशासन को पूरी ईमानदारी से निभाया। शायद इसीलिए उनके गीतों में एक आंतरिक संतुलन दिखाई देता है—जो आज के असंतुलित, जल्दबाज़ संगीत में कम ही मिलता है।' 31 मई 2026 को सुमन कल्याणपुर का मुम्बई में निधन हो गया। उन्हें सादर नमन। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं परिचय दास का महत्त्वपूर्ण आलेख 'फिल्म गायिका : सुमन कल्याणपुर'। श्रद्धांजलि   'फिल्म गायिका : सुमन कल्याणपुर' परिचय दास  1 विरलता की उजली गूँज : सुमन कल्याणपुर सुमन कल्याणपुर का स्मरण किसी गीत को याद करने जैसा नहीं है; वह किसी बहुत पुरानी, बहुत आत्मीय अनुभूति के लौट आने ...

परिचय दास का भोजपुरी स्मृति-लेख 'शारदा सिन्हा के गायिकी के अर्थ'

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  परिचय दास  भोजपुरी स्मृति-लेख         'शारदा सिन्हा के गायिकी के अर्थ' परिचय दास  ।।एक।। शारदा सिन्हा भोजपुरी संगीत जगत के एगो अनमोल रत्न हई, जिनकर गायिकी में भोजपुरिया संस्कृति, परंपरा आ लोकजीवन के सौंदर्य समाहित बा। ओकर विस्तार मैथिली, बज्जिका, अंगिका, हिन्दी गायिकियो में पुरहर बा। उनकर आवाज के मिठास आ सहजता, जेकरा में गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति बा, भोजपुरी लोकसंगीत के एगो नया ऊँचाई पर पहुँचावे में मदद कइलस। उनकर गायिकी से भोजपुरिया समाज के न खाली गर्व महसूस होला बल्किन इ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भोजपुरी भाषा के पहचान दियवहू में अहम भूमिका निभावेले। शारदा सिन्हा के संगीत के विशेषता इ बा कि उहां भोजपुरी गीतन के न खाली प्रस्तुत कइली बल्किन ओह में अपन पूरा आत्मा उढ़ील देहली। ऊ गीत के सुर आ लय में अइसन डूब जालीं कि सुनने वाला ओह गीत के हिस्सा बन जाला। शारदा सिन्हा के संगीत के शुरुवात उनके खुद के संघर्ष से भइल। बिहार के सुपौल जिला के एगो साधारण परिवार में जनमल शारदा जी के संगीत के प्रति प्रेम बचपन से रहे। हालांकि उनकर परिवार में संगीत के औपचारिक परंपरा...