विजय राही से प्रचण्ड प्रवीर की बातचीत
विजय राही किसी भी व्यक्ति का जीवन स्वयं में एक महाकाव्य या उपन्यास की तरह ही होता है। अगर वह व्यक्ति रचनाकार हो तो वह अपने समय को अपनी रचनाओं या फिर बातचीत में खुल कर अभिव्यक्त करता है। विजय राही हमारे समय के सुपरिचित कवि हैं। उनके पास वह जीवनानुभव है जो प्रायः हरेक संघर्षशील व्यक्ति की गाथा होती है। प्रचण्ड प्रवीर ने इधर कुछ युवा कवियों से बातचीत का एक सिलसिला आरम्भ किया है। पहली कड़ी में उन्होंने कवि कमलजीत चौधरी से बातचीत किया था। इस बार उन्होंने विजय राही से कई मुद्दों पर तफ्सील से बातचीत की है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं विजय राही से प्रचण्ड प्रवीर की बातचीत 'बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी।' बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी विजय राही से प्रचण्ड प्रवीर की बातचीत पूर्वज स्मरण प्रश्न :- हिन्दी साहित्य की उन पाँच कृतियों या रचनाओं का उल्लेख करें जो आपके लिए महत्त्वपूर्ण रही हों। उत्तर- प्रवीर जी, हिन्दी साहित्य से पाँच पसंदीदा कृतियों को चुनना मेरे लिए बहुत मुश्किल होगा लेकिन फिर भी कोशिश करता हूँ, थोड़ा कम ज़्यादा हो सकता है। कबीर मेरे लिए पहले कवि ...