अशोक तिवारी का आलेख 'सुभाष चन्द्र बोस की यूरोप से वापसी और सक्रिय भूमिका'
आजादी की लड़ाई में सुभाष चन्द्र बोस ही ऐसे व्यक्तित्व हैं जो कुछ समय के लिए महात्मा गांधी के समानान्तर खड़े दिखाई पड़ते हैं। पट्टाभि सीतारमैया की कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में हार की पूरी जिम्मेदारी गांधी जी ने अपने ऊपर ले थी। यह मामूली बात नहीं थी। जिस समय कांग्रेस में गांधी जी की तूती बोल रही थी, उनको टक्कर देने का साहस या दुसाहस सुभाष ही कर सकते थे। हालांकि अन्ततः सुभाष को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा इसके बावजूद गांधी जी के लिए उनके मन में कहीं भी मलीनता नहीं थी। आजाद हिंद फौज की सफलता के लिए सुभाष ने राष्ट्रपिता से आशीर्वाद मांगा। यह पहली बार था जब किसी ने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता उपाधि से नवाजा। आज 23 जनवरी को सुभाष चन्द्र बोस का जन्मदिन है। उनकी स्मृति को नमन करते हुए आज हम पहली बार पर प्रस्तुत कर रहे हैं अशोक तिवारी का आलेख ' सुभाष चन्द्र बोस की यूरोप से वापसी और सक्रिय भूमिका'। प्रस्तुत आलेख अशोक तिवारी की हालिया प्रकाशित पुस्तक सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिन्द फौज से साभार लिया गया है। सुभाष चन्द्र बोस की यूरोप से वापसी और सक्रिय भूमिका अशोक तिवारी ...