संदेश

ममता जयंत लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ममता जयंत का आलेख 'साहस सीमा और संवेदना का समेकन मित्रो'

चित्र
कृष्णा सोबती  आम तौर पर स्त्रियों से हमारा समाज यह अपेक्षा करता है कि वे अपनी जुबान न खोलें, और दुःख दर्द को अपनी नियति मान कर उसे सह जाएं। अगर वह अपनी बात या व्यथा कहती है तो उस स्त्री को मुँहफट और निर्लज्ज जैसे विशेषणों से नवाजा जाता है। कृष्णा सोबती एक दूरदर्शी रचनाकार रही हैं। हिंदी साहित्य में जब नारी विमर्श का कोई नामलेवा तक नहीं था कृष्णा जी उन विमर्शों को सामने लाती हैं जो स्त्रियों के दुःख दर्द को उजागर करते हैं। वे ऐसी लेखिका हैं जो साहस के साथ स्त्री मन की व्यथा को सामने लाती हैं। ममता जयंत मित्रो मरजानी का पुनर्पाठ करते हुए लिखती हैं 'भारतीय समाज में मातृत्व को इतना अधिक महिमामण्डित किया गया है कि बाँझ स्त्री, चाहे उसके बाँझपन का असली कारण पुरुष ही क्यों न हो, संतान न होने पर दोषी स्त्री को ही ठहराया जाता है, किंतु कृष्णा सोबती की मित्रो एक निर्भीक तथा स्पष्ट बोलने वाली स्त्री है, डर-शर्म उसके यहाँ नहीं हैं। सच कितना भी कड़वा क्यों न हो वह बोले बिन नहीं चूकती। जब परिवार द्वारा उसके मातृत्व पर प्रश्न उठाया जाता है, तो वह खुले शब्दों में अपने पति की कमजोरी तथा नपुसंकता की...

ममता जयंत का आलेख 'मौत बदन को आती है रुह का जलवा रहता है'

चित्र
  नासिर अहमद सिकन्दर  अभी साल 2025 विदा ही होने वाला था, अभी हम नासिर भाई के साथ आगे की योजनाएं ही बना रहे थे कि अचानक 31 दिसम्बर 2025 को उनके न होने की खबर ने हमें स्तब्ध कर दिया। खबर पर यकीन नहीं हुआ तो हमने कवि बसन्त त्रिपाठी को फोन मिलाया। मन में कहीं यह बात थी कि बसन्त भाई कह दें कि 'भाई अफवाहों पर ध्यान मत दीजिए'। लेकिन उन्होंने भी बुझे मन से बताया कि यह खबर सही है। हमने पहली बार के लिए एक योजना बनाई थी जिसके लिए नासिर भाई ने प्रतिबद्धता के साथ काम किया। 'वाचन पुनर्वाचन' कॉलम के लिए नासिर भाई ने 15 बिल्कुल युवा कवियों की कविताओं को अपनी मानीखेज टिप्पणी के साथ प्रस्तुत किया था। इस शृंखला के अन्तर्गत उन्होंने  प्रज्वल चतुर्वेदी, पूजा कुमारी, सबिता एकांशी, केतन यादव, प्रियंका यादव, पूर्णिमा साहू, आशुतोष प्रसिद्ध, हर्षिता त्रिपाठी, सात्विक श्रीवास्तव, शिवम चौबे, विकास गोंड, कीर्ति बंसल, आदित्य पाण्डेय विनोद मिश्र और प्रदीप्त प्रीत की कविताएं प्रस्तुत की थीं। इस शृंखला की पंद्रहवीं और अन्तिम कड़ी अप्रैल 2025 में प्रकाशित हुई थी। इस तरह का काम वे पहले भी कर चुके थे।...

ममता जयंत की कविताएं

चित्र
  ममता जयंत  परिचय:  नाम - ममता जयंत  शिक्षा - परास्नातक इतिहास, बी.एड. लेखन व प्रकाशन  प्रकाशित पुस्तक- 'मनुष्य न कहना' शीर्षक से एक काव्य संग्रह प्रकाशित। [वर्ष - 2024. हिन्दी अकादमी दिल्ली के प्रोत्साहन से] विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं व ब्लॉग में नियमित रूप से आलोचनात्मक लेख व कविताएँ प्रकाशित। अनुवाद: कविताएँ अंग्रेजी, उर्दू, मराठी और नेपाली में अनूदित शिक्षा जगत में भूमिका :  उत्तर प्रदेश शैक्षिक दूरदर्शन पर प्रसारण हेतु ई-एजूकेशन के तहत शैक्षिक विडियो निर्माण।  सम्प्रति - शिक्षक  बेटियां जितने बेहतर तरीके से अपने पिता और घर परिवार का ध्यान रखती हैं उतना आमतौर पर बेटे नहीं रख पाते। बेटी की समय पर शादी कर उसकी विदाई करना हर पिता की एक चाहत और जिम्मेदारी भी होती है। वह समाज की बुरी नजरों से अपनी बेटी को बचाना चाहता है। इसके लिए वह बेटी को अपनी तरह से नियंत्रित संचालित करना चाहता है जबकि बेटी अपनी राह चलना चाहती है। यही पर पिता पुत्री के विचारों के बीच   एक टकराहट होती है। अलग बात है कि अधिकांश मामलों में बेटी के सामने समर्पण करन...