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क्रांतिकारी लोकधर्मी कवि तो हू

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               (चित्र : तो हू) विगत जनवरी महीने से हमने एक श्रृंखला 'लोकधर्मी कवियों की परम्परा' शुरू की थी। इसे हमारे आग्रह पर लिखा है वरिष्ठ कवि विजेन्द्र जी ने। श्रृंखला की ग्यारहवीं कड़ी में प्रस्तुत है एक आलेख प्रख्यात वियतनामी कवि तो हू पर। वियतनामी लोकधर्मी कवि तो हू      विजेंद्र तो हू को वियतनाम का क्रांतिकारी कवि माना गया है। वह अपने देश की क्रांतिकारी जनता को समर्पित कवि थे। उन्होंने अपनी एक कविता में कहा है - हृदय है विभाजित मेरा तीन तरह से उसका प्रमुख भाग अर्पित है मेरे दल को एक भाग में रमती है कविता तीजा भाग दिया है प्रेम को हृदय का यह विभाजन हमें थोड़ा असमंजस में डालेगा। कदाचित हृदय का विभाजन होता नहीं है। हम विभाजित करके भी उसे विभाजित नही कर पाते। मनुष्य हृदय की यही खूबी उसे बड़ा बनाती है। यहाँ विभाजन एक सांकेतिक रूपक है। यानि जीवन की प्राथमिकतायें हम तय करें या न करें? करें तो कैसे करें? बहुत से कवि हैं जिनकी कोई प्राथमिकता होती ही नहीं! कुछ की प्राथमिकतायें समयानुसार बाजा...