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चंद्रशेखर की जेल डायरी पर हरिवंश का आलेख

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  चंद्रशेखर 10 नवंबर 1990 और 21 जून 1991 के बीच भारत का प्रधान मंत्री एक ऐसा व्यक्ति बना जो एक सामान्य कृषक परिवार का था। यह व्यक्ति थे चंद्रशेखर जी। वे अखिल भारतीय कांग्रेस के सम्मानित सदस्य थे। हरिवंश के अनुसार कांग्रेस में चंद्रशेखर अकेले ऐसे व्यक्ति थे, जो पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण व निर्णायक समिति (कांग्रेस वर्किंग कमिटी) के चुने गए सदस्य थे। आपात काल का विरोध करने के कारण उन्हें जेल में डाल दिया गया। जेल में रहते हुए ही उन्होंने जो जेल डायरी लिखी वह आपात काल को जानने के लिए एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है। चंद्रशेखर की यह डायरी उनकी वैचारिक दृढ़ता का आईना है। चंद्रशेखर ऐसे दुर्लभ प्रधानमंत्रियों में से एक थे जो साहित्यिक सरोकारों से भी गहरे तौर पर जुड़े हुए थे। उनकी डायरी से ही पता चलता है कि उन्होंने कामू की अनेक किताबें पढ़ी। ‘प्लेग’, ‘अ सर्टेन डेथ’। पर, एक किताब का जिक्र बार-बार आया है, वह है, ‘रिबेल’ (विद्रोही)। 'रिबेल' में उनकी दिलचस्पी इस हद तक थी कि निर्मल वर्मा के एक लेख में उसका एक उद्धरण देख कर उन्होंने उनका पूरा लेख पढ़ डाला और फिर उस पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया भी ...