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सर्वेश सिंह की कविताएँ

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सर्वेश सिंह समय का मापन करने वाले भले ही उसे भूत, भविष्य और वर्तमान के खांचे में बांटे, कवि तो उसे अपनी संवेदनाओं में ही मापता है. इस संवेदना में संभावनाओं के लिए भरपूर जगहें हैं जिसे कवि बचाए-बनाए रखना चाहता है. सर्वेश सिंह ऐसे ही युवा कवि हैं जो विद्रूपताओं भरे इस समय में संभावनाओं को बचाए रखना चाहते हैं. इस क्रम में वे 'पीछे जाना' जैसी कविता लिखने का साहस भी दिखाते हैं. आज लगातार आगे बढ़ने की जो अंधी दौड़ चल रही है उसमें यह साहस दिखाना काबिले तारीफ़ है. यह 'पीछे जाना' उस मनुष्यता को बचाए रखने के लिए पीछे जाना है जो आगे जाने की होड़ में कहीं गायब सा हो गया है. ऐसी ही भावनाओं वाले कवि सर्वेश सिंह की कविताएँ हम पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं.         जन्म - 25 जून, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश शिक्षा : एम.ए.,एम.फिल.,पी-एच. डी., जे.एन.यू., दिल्ली से                                   ...