दूधनाथ सिंह से संजीव कुमार एवं राकेश कुमार सिंह की बातचीत
विगत 12 जनवरी को प्रख्यात रचनाकार दूधनाथ सिंह का निधन हो गया। दूधनाथ सिंह ने अपने जीवन के जब अस्सी साल पूरे किये थे तब इस अवसर पर संजीव कुमार और राकेश कुमार सिंह ने उन के साथ एक खास बातचीत की थी। संजीव कुमार के मुताबिक इस साक्षात्कार की खूबी यह थी की हमारे सवाल उतने महत्वपूर्ण नहीं थे जितने महत्वपूर्ण दूधनाथ जी के जवाब थे। दूधनाथ जी की स्मृति को नमन करते हुए आज ‘पहली बार’ ब्लॉग पर हम इस बातचीत को विशेष तौर पर प्रस्तुत कर रहे हैं। दूधनाथ सिंह से संजीव कुमार एवं राकेश कुमार सिंह की बातचीत एक दुर्लभ क्षण : उपेन्द्र नाथ अश्क, कैलाश गौतम और दूधनाथ सिंह संजीव कुमार : दूधनाथ जी , अलग-अलग मुद्दों पर आपके भाषण सुनता ही रहा हूँ , आपका लिखा भी पढ़ता ही रहा हूँ , इसलिए आपके अस्सी पूरे करने के अवसर पर आपसे थोड़ी जीवनीपरक बातचीत करना चाहता हूँ। तो हमें पहले अपने शुरूआती साहित्यानुराग के बारे में बताएं। कैसे दिलचस्पी पैदा हुई और इलाहाबाद शहर की क्या भूमिका रही ? दूध नाथ सिंह : देखो , मेरी प्रथम भाषा तो उर्दू है , बी.ए. तक। यू. पी. कॉलेज बनारस से इलाहाबाद आया था उर्दू ...