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अवन्तिका प्रसाद राय की कहानी 'युद्ध के बीच'

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अवन्तिका प्रसाद राय युद्ध कुछ खब्ती लोगों की खुराफातों का परिणाम होता है। आम आदमी का इन युद्धों से कोई लेना देना नहीं होता। वह शान्ति और सुकून चाहता है। वह अपने घर परिवार के बीच प्यार से रहना चाहता है। बच्चे किसी भी घर को गुलजार कर देते हैं। इन निश्छल बच्चों का भला जंग से क्या वास्ता। लेकिन जंग का वास्ता तो केवल और केवल नष्ट करने से होता है। क्या बड़े, क्या बच्चे सभी उसके लिए शिकार भर होते हैं। अमरीका ईरान जंग में एक मिसाइल बच्चों के स्कूल पर गिरी जिसमें तकरीबन 180 बच्चे मारे गए। इस घटना की वैश्विक स्तर पर व्यापक निन्दा की गई। एक तकनीकी कॉलेज पर इजरायल की मिसाइल गिरी जिसमें तमाम निर्दोष बच्चे मारे गए। ये बच्चे किसी मां पिता के सपने होते हैं। ये बच्चे किसी भी राष्ट्र के भविष्य होते हैं। लेकिन जंग तो हमेशा मर्यादाओं के खिलाफ ही होता है। महाभारत युद्ध में किशोर अभिमन्यु को महारथियों द्वारा मिल कर मारे जाने का सन्दर्भ मिलता है। अवन्तिका प्रसाद राय की कहानी को जंग के इस परिप्रेक्ष्य में पढ़ा जाना चाहिए। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं अवन्तिका प्रसाद राय की कहानी 'युद्ध के बीच'। ...

अवन्तिका राय की लघु कथाएं

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अवन्तिका राय रोजी रोटी के लिए विस्थापन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड के लोगों की जैसे उनकी नियति ही है। इन लोगों को समवेत रूप में बिहारी कहा जाता है। जैसे बिहारी होना अपराध हो। आमतौर पर उनके बारे में उनके इलाके के लोगों की राय होती है कि वह खुशकिस्मत है। दूसरी जगह जा कर अच्छे से कमा खा रहा है। लेकिन उसकी दिक्कतें क्या हैं, कैसी हैं, इससे भला किसी को क्या लेना देना? तमाम संसाधन होने के बावजूद उत्तर भारत के ये राज्य पिछड़े होने के लिए अभिशप्त हैं। यहां के जनप्रतिनिधि तमाम तरह से जनता को भरमा कर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं।  महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब में अक्सर इन लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है लेकिन ये लोग जैसे जहर पी कर अपना जीवन बिताने के अभ्यस्त हो जाते हैं।  अवन्तिका राय अपनी लघु कथा पन्द्रह अगस्त में इस पीड़ा की एक बानगी करीने से व्यक्त करते हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  अवन्तिका राय की लघु कथाएं। अवन्तिका राय की लघु कथाएं  कहानी सांढ़ और बंदरों की  एक सांढ़ मन्थर गति से चलते हुए जंगल में विचरण कर रहा था।  जैसा कि दिखता ही है, उसका अंडक...

अवन्तिका राय की लघु कथाएं

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  अवन्तिका राय  हमारे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों ने देश की आजादी का जो सपना देखा था वह अन्ततः 15 अगस्त 1947 को साकार हुआ।इस सपने में यह शामिल था कि सबको अन्न नसीब होगा। सब शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। सबके पास काम होगा। किसान बदहाली से मुक्त हो कर न केवल खेती को उन्नत करेंगे अपितु अपना जीवन भी बेहतर बनाएंगे। इस तरह सब देश को बेहतर राह पर ले जाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे। आज हम 79वां स्वाधीनता दिवस मना रहे हैं। सपने कितने पूरे हुए, इस सच्चाई को हम बेहतर जानते हैं। भ्रष्टाचार आज हमारा चरित्र बन चुका है। हमारे नेताओं, नौकरशाहों, दलालों, ठेकेदारों ने देश को जितनी निर्ममता से लूटा है, उतनी निर्ममता तो अंग्रेजों ने भी नहीं दिखाई। समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी अपमानित जीवन जीने के लिए विवश है। आम आदमी आज भी त्रस्त है। फिर भी उम्मीद पर दुनिया टिकी है। आजादी है तो सपने हैं और सपने हैं तो बेहतरी की संभावनाएं भी हैं।  अवन्तिका राय अपनी लघु कथा पन्द्रह अगस्त में लिखते हैं " एक दिन, जब गुमटी पर उसके पिता थे, मैंने उन्हें खाते हुए देखा। कटोरे में मोटा भात और कुछ तरल पदार्थ।...

अवन्तिका राय की कविताएं

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  अवन्तिका राय  हाल ही में  नीति आयोग के सीईओ बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने एक बयान जारी कर भारत को जापान से आगे निकलते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा किया।  अप्रैल 2025 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भी अनुमान लगाया था कि 2025 तक भारत 4.187 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इन आंकड़ों से भारतीय  अर्थव्यवस्था के विकास की झलक मिलती है। लेकिन आंकड़े हमेशा सच नहीं बोलते। वे अपने आप में कुछ न कुछ छुपा ही लेते हैं। विकास के बावजूद आबादी का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो जीवन की आधारभूत सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष करता दिखाई पड़ता है। इस विकास ने प्रायः समृद्ध वर्ग को ही और समृद्ध बनाया है। लेकिन किसी भी देश की तस्वीर वहां के आम लोगों से बनाती है न कि मुट्ठी भर के समृद्ध वर्ग से। जीवन की बढ़ती प्रत्याशा, खुशहाली, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता, शिक्षा, चिकित्सा जैसे कई क्षेत्र हैं जहां हमारा प्रदर्शन वैश्विक रूप से दयनीय है। कवि  अवन्तिका राय की नजर विकास के इस तिलिस्म की तरफ ...

अवन्तिका राय की 'गाजीपुर डायरी'

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  अवन्तिका राय  अपना घर गांव, जिला जवार किसे अच्छा नहीं लगता। इन दूरदराज और छोटे छोटे जिलों से निकले लोग देश के महत्त्वपूर्ण शहरों में रहते हुए महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। अंग्रजों के समय में भारत के हर जिले का गजेटियर लिखा गया था जिसमें उस जनपद के बारे में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और धार्मिक महत्त्व के बारे में बताया गया है। गाजीपुर जनपद उत्तर प्रदेश का पुराना जिला है जो पूर्वांचल में अवस्थित है। गंगा नदी के किनारे बसे गाजीपुर को 'लहुरी काशी' भी कहा जाता है। गाजीपुर में ही एशिया का सबसे बड़ा गांव गहमर अवस्थित है। गाजीपुर का सम्बन्ध रामायण से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि महर्षि परशुराम के पिता जमदग्नि यहाँ रहते थे। प्रसिद्ध गौतम महर्षि तथा च्यवन ने यहीं शिक्षा प्राप्त की। ग़ाज़ीपुर प्रख्यात गुप्त शासक स्कंदगुप्त का विजय स्तम्भ गाजीपुर के भितरी में ही खड़े हो कर अपनी कहानी आज भी कह रहा है। सल्तनत काल से मुग़ल काल तक एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र था। कवि अवन्तिका राय मूलतः गाजीपुर के ही रहने वाले हैं। हालांकि अब वे लखनऊ में बस गए हैं लेकिन उनकी धमनियों में  गाजी...