संदेश

बेर्टोल्ट ब्रेष्ट लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

युद्ध के विरुद्ध कविता : 4, बर्तोल्‍त ब्रेख्‍त की कविताएं

चित्र
बर्तोल्‍त ब्रेख्‍त  व्यक्तिगत रूप से कहूं तो बर्तोल्‍त ब्रेख्‍त मेरे प्रिय कवि हैं। जर्मनी में वे उस दौर में लिख रहे थे जब वहां का वातावरण पूरी तरह विषाक्त हो चुका था। उनका प्रमुख लेखन दो विश्व युद्धों के बीच के दौर का है। इस समय जर्मन साम्राज्यवादी गतिविधियां अपने उत्कर्ष पर थीं। हिटलर के नायकत्व का जादू लोगों के दिल दिमाग पर छाया हुआ था। ऐसे कठिन समय में  ब्रेख्‍त साम्राज्यवाद के खिलाफ कविताएं लिख रहे थे जब उसके खिलाफ सोचना भी गुनाह माना जाता था। वे तानाशाही के खिलाफ कविताएं लिख रहे थे।  उन्होंने नाटकों द्वारा मार्क्सवादी विचारधारा का प्रचार प्रसार करने के लिये ‘एपिक थियेटर’ नाम से नाट्य मंडली का गठन किया। हिंदी में एपिक थियेटर को लोक नाटक के रूप में जाना जाता है। ब्रेख्त ने पारंपरिक अरस्तू के नाट्य सिद्धांतों से सर्वथा भिन्न तथा मौलिक नाट्य सिद्धांत रचे। उनका तर्क था कि जो कुछ मंच पर घटित है उससे दर्शक एकात्म न हों। वे समझे कि जो कुछ दिखाया जा रहा है वह विगत की ही गाथा है। गौरतलब है कि ऐसा ही प्रभाव लोक गीतों को गाये जाने की कला करती है। युद्ध के विरुद्ध कविता की चौथी ...

बेर्टोल्ट ब्रेष्ट की प्रेम कविताएँ (मूल जर्मन से अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय)

चित्र
बेर्टोल्ट ब्रेष्ट बेर्टोल्ट ब्रेष्ट मेरे प्रिय कवियों में से एक हैं। ब्रेष्ट का समय दुनिया के लिए एक त्रासद समय था। अपनी रचनाओं के द्वारा वे उस त्रासदी से संघर्ष करते हुए लोगों को उत्प्रेरित करते रहे। एक बेहतरीन नाटककार होने के साथ-साथ वे एक बेजोड़ कवि भी थे। खुद उनकी कविताएँ बता देती हैं कि ब्रेष्ट की सोच का वितान कितना व्यापक था। मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रतिभा उपाध्याय से ब्रेष्ट की प्रेम कविताएँ भेजने का आग्रह किया। आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं ब्रेष्ट की कुछ प्रेम कविताएँ, जिनका अनुवाद किया है प्रतिभा उपाध्याय ने। बेर्टोल्ट ब्रेष्ट की प्रेम कविताएँ   मूल जर्मन से अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय                                           बेर्टोल्ट ब्रेष्ट की ख्याति एक नाटककार के रूप में है , किन्तु मूलत: वह एक बहुप्रज्ञ सृजनशील कवि थे। उनके नाटक भी उनकी काव्य ...