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के. एन. पणिक्कर का आलेख 'एक इतिहासकार के रूप में ई. एम. एस.'

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ई. एम. एस. ई. एम. एस.  नंबूदरीपाद एक राजनेता होने के साथ साथ लेखक और इतिहासकार भी थे। उनका लेखन विपुल है। ई. एम. एस.  की ग्रंथावली कुल 100 खंडों में है। इतना विशाल लेखन किसी भी भारतीय राजनेता का नहीं है। यह  ग्रंथावली  मलयालम भाषा में है।  ई. एम. एस. ने राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन का इतिहास लिखा जिसे इतिहास की बेहतरीन किताब माना जाता है। इसके अतिरिक्त ई. एम. एस. ने केरल के इतिहास पर भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उम्दा इतिहासकार  के. एन. पणिक्कर ने  इतिहासकार के रूप में ई. एम. एस. का का सारगर्भित मूल्यांकन किया है। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  के. एन. पणिक्कर का आलेख 'एक इतिहासकार के रूप में ई. एम. एस.'। 'एक इतिहासकार के रूप में ई. एम. एस.' के. एन. पणिक्कर ईएमएस नंबूदरीपाद की बौद्धिक और विद्वत्तापूर्ण रुचियों में इतिहास का केंद्रीय स्थान था। उनकी विशाल रचनाओं—अंग्रेज़ी और मलयालम दोनों में पुस्तकें, पुस्तिकाएँ और लेख—का एक बड़ा हिस्सा इतिहास से संबंधित है। ये मुख्यतः दो क्षेत्रों को कवर करते हैं: केरल का इतिहास और राष्ट्रीय मुक्ति आं...