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महाश्वेता देवी की कहानी (मूल बांग्ला से चयन एवं अनुवाद - मीता दास)

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महाश्वेता देवी विगत 28 जुलाई 2016 ई. को बांग्ला की महान कथाकार महाश्वेता देवी का 90 वर्ष की उम्र में कोलकाता में निधन हो गया । 'पहली बार' परिवार की तरफ से हम उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए प्रस्तुत कर रहे हैं उनकी ही एक कहा नी 'भात' । इस कहानी का रचना काल 1983 ​है । महाश्वेता देवी की इस बांग्ला कहानी का पहली बार के लिए विशेष चयन और हिन्दी रूपान्तरण किया है कवि मीता दास ने । तो आइए पढ़ते हैं यह कहानी ।  भात महाश्वेता देवी   (मूल बांग्ला से हिन्दी अनुवाद - मीता दास)  उस आदमी की निहारने की   आदत बड़े घर की बड़ी बहु को   जरा भी नही सुहाया। पता नही कैसी   उग्र आँखें थीं। और उसकी कमर पर लपेटा   हुआ   लुंगी भी अत्यंत छोटा और गन्दा था। चेहरा भी कैसा जंगली-जंगली सा। पर ब्राहमण महाराज ने बताया की वह यहाँ   भात खायेगा और उसके बदले में यहाँ काम भी करेगा।   ---- कहाँ से पकड़ लाये ? इस घर में सब कुछ यानि नियम-कानून बड़ी बुआ के ही इशारों पर चलता है। बड़ी बुआ असल में इस घर की बड़ी बहु की बुआ सास हैं...