संदेश

प्रकाश लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रकाश का आलेख ‘प्रेम में देह, देह में प्रेम’

चित्र
प्रकाश विगत 21 अगस्त 2015 को जब हमने प्रकाश का एक आलेख 'प्रेम और मृत्यु (कविता) में क्या होता है?' पहली बार पर प्रकाशित किया था  तब हमें यह पता नहीं था कि वे किन अवसादों से गुजर रहे हैं और हाल में इसकी क्या परिणति होने वाली है । हाल ही में जब उन्होंने अपना दूसरा आलेख 'प्रेम में देह, देह में प्रेम' भेजा तब हम इसका शीर्षक देख कर कुछ आश्वस्त हुए । लेकिन यह आश्वस्ति क्षणिक ही साबित हुई । विगत 24 जनवरी को प्रकाश का असामयिक निधन हो गया। प्रकाश का जाना पहली बार की अपनी व्यक्तिगत क्षति है। प्रकाश को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हम उनका यह आलेख प्रस्तुत कर रहे हैं। तो आइए पढ़ते हैं प्रकाश का यह आलेख ' प्रेम में देह , देह में प्रेम' ।   प्रेम में देह , देह में प्रेम प्रकाश सदियों से प्रेम का प्रबल चेहरा प्लेटोनिक किस्म का रहा है। दुनिया-भर की अमर प्रेम कहानियां , जो लोक की स्मृति में दर्ज हैं , अपने प्लेटोनिक स्वभाव के कारण जानी जाती हैं। ये प्रेम कहानियां केवल लोक की स्मृति में नहीं , उसके मौखिक और लिखित साहित्य में भी , आदर के साथ स्थान ...

प्रकाश का आलेख ‘प्रेम और मृत्यु (-कविता) में क्या होता है?

चित्र
किसी युवा कवि का गद्य पढना उस प्रकृति से मिलना होता है जो सहज ही हमें अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है । युवा कवियों में इस समय प्रकाश बेहतर काम कर रहे हैं । इधर उन्होंने एक आलेख लिखा है 'प्रेम और मृत्यु (-कविता) में क्या होता है ।' इसमें भी आपको काव्य का एक निरन्तर प्रवाह दिखाई पड़ेगा । तो आइए पढ़ते हैं प्रकाश का यह आलेख ।       प्रेम और मृत्यु (-कविता) में क्या होता है! □ प्रकाश प्रेम में क्या होता है और प्रेम-कविता में क्या होता है ? इसी तरह यह कि मृत्यु में क्या होता है और मृत्यु-कविता में क्या होता है ? प्रेम का संबंध जीवन के उद्भव से , उसके बीज-तत्व से है। दैहिक तल पर ही सही , दो आत्माओं का प्रेम-मिलन जीवन के उद्भव का कारण बनता है। प्रेम की बुनियाद में ही गहरी आसक्ति और एक-दूसरे के प्रति गहन अनुराग सक्रिय है। फलस्वरूप इसकी परिणति में जो जीवन उपलब्ध होता है उसकी सूक्ष्मतम कोशिकाओं में भी जीवन के प्रति अदम्य कामना के रूप में प्रेम विन्यस्त पाया जाता है। ललक , उत्साह , उल्लास , ऊर्जा और उछाह इस प्रेम के रूपक हैं। ये प्रेम के भी रूपक हैं और प्रेम-कवित...