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अर्पण कुमार की कविताएँ

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अर्पण कुमार भाषा मनुष्य की वह क्रांतिकारी खोज है जिससे वह एक दूसरे से सटीक अभिव्यक्ति कर सके। हिन्दी के महत्त्वपूर्ण कवि धूमिल का मानना है कि 'कविता, भाषा में आदमी होने की तमीज है'। संवेदनाओं को दर्ज करने वाली कविता हमें सचमुच में इंसान बनाती है। कवि का अनुभव और उसकी सूक्ष्म दृष्टि कविता को वह धार प्रदान करती है जो अन्य किसी विधा में नहीं मिलती। इसीलिए कोई कविता या उसकी कोई पंक्ति तुरन्त मन मस्तिष्क में अपनी जगह बना लेती है। दुनिया का हर कवि कविता को ले कर सोचता है और उसे अपनी कविता में दर्ज करने का प्रयास करता है। 'वे कविता के पास जाएँ' कवि अर्पण कुमार की कविता है जिसमें वे कविता की उस क्षमता की बात करते हैं जो कहीं और नहीं दिखती। रेल यात्रा में जब सारे यात्री सो रहे होते हैं कवि कविता में अपने अनुभव दर्ज कर रहा होता है। कबीर लिखते हैं 'सुखिया सब संसार है, खाए अरु सोवै।/ दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै॥' एक कवि के कविता की यह ताकत होती है कि उसे पढ़ते हुए किसी पुरखे कवि की कविता याद आए। अर्पण कुमार के पास उनके निजी अनुभव हैं। कहन का अपना तरीका है जो उन्हें अल...