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नित्यानंद गायेन की सात कविताएँ

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नित्यानंद गायेन युवा कवि नित्यानंद गायेन की कविता 'धूप पिघल रही है' पढ़ते हुए मुझे वरिष्ठ कवि वीरेन डंगवाल की एक कविता है 'कवि' की ये पंक्तियाँ याद आयीं - 'इच्छाएँ आती हैं तरह-तरह के बाने धरे/ उनके पास मेरी हर ज़रूरत दर्ज है/ एक फ़ेहरिस्त में मेरी हर कमज़ोरी/ उन्हें यह तक मालूम है/ कि कब मैं चुप हो कर गरदन लटका लूँगा/ मगर फिर भी मैं जाता रहूँगा ही/ हर बार भाषा को रस्से की तरह थामे/ साथियों के रास्ते पर/ एक कवि और कर ही क्या सकता है/ सही बने रहने की कोशिश के सिवा।' कवि आज जो भी कुछ घटित हो रहा है उसे देखने के लिए अभिशप्त है । लेकिन विचलन के इस समय में सही बने रहने की कोशिश भी कम अहम नहीं है । फासिस्ट शक्तियां आज अपने देश में वह सब कुछ कर रही हैं जो उनकी स्वाभाविक प्रकृति होती है । इसी क्रम में वे प्रोपेगंडा फैलाने का काम भी करती हैं लेकिन कवि नित्यानन्द इस बात को ले कर आश्वस्त हैं कि 'झूठ की उम्र लम्बी नहीं होती' । आइए आज पढ़ते हैं आक्रोश के स्वर के कवि नित्यानन्द की कुछ नयी कविताएँ ।         नित्यानंद गायेन की सात कविताएँ  झूठ...

कवि सुधीर सक्सेना पर नित्यानानद गायेन का आलेख 'कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं'

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ईश्वर को आधार बना कर जिन कुछ कवियों ने महत्वपूर्ण कवितायें लिखीं हैं उनमें सुधीर सक्सेना का नाम प्रमुख है. इन कविताओं में वे ईश्वर से जैसे बातें करते हुए उसकी वास्तविकता को हमारे सामने रख देते हैं. उनकी कविताओं में प्रेम भरा पड़ा है. प्रेम जो मानवीय रिश्तों और संबंधों की बुनियाद है कवि के यहाँ बार-बार दिखाई पड़ता है. शायद इसीलिए नित्यानन्द ने इस आलेख का शीर्षक ही दिया है 'कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं ' कवि सुधीर सक्सेना के तीन संग्रहों को आधार बना कर युवा कवि नित्यानन्द गायेन ने यह आलेख लिखा है. इसे हम आप के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं.  कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं .... साहित्य का एक तरुण विद्यार्थी हूँ मैं. मैंने अनेक रचनाकारों की रचनाएँ पढ़ी हैं. जिनमें साहित्य के दिग्गज और वरिष्ठ रचनाकारों के साथ समकालीन कवि भी शामिल हैं. समकालीन कवियों में अनेक हैं जिनकी रचनाएँ सदा मुझे आकर्षित करती हैं . जिनमें से एक हैं अग्रज कवि / लेखक/ अनुवादक सुधीर सक्सेना जी. और उन्हें पढ़ते हुए मैं उनके बहुत करीब आ गया हूँ. और वरिष्ठ कवि / सम्पादक...