पॉल वेरलेन की कविताएं
पॉल वेरलेन कहा जाता है कि दुनिया का हरेक व्यक्ति जन्मना कवि ही होता है। यह कहने के पीछे मनुष्य की वह संवेदनशीलता ही रही होगी जो उसमें अन्य के प्रति प्रेम का भाव जगाती है। लेकिन वही कविता पाठकों के दिल में जगह बना पाती है जिसमें सार्वजनीनता के दर्शन होते हैं। जिसमें आम जन का दुःख दर्द और उस की विडम्बनाएं होती हैं। कविता जबरन नहीं लिखी जा सकती बल्कि आज भी हृदय की आवाज पर ही लिखी जाती है। इसीलिए वास्तविक कविता लिख पाना हमेशा कठिन होता है। यही वजह है कि आसान दिखने के बावजूद हर समय किसी भी कवि के साथ कविता लिखना संभव नहीं हो पाता। आज जिस तरह की कविताएं अधिकांशतः लिखी जा रही हैं उसे देख पढ़ कर तो यही लगता है कि कविता के साथ धोखा या अत्याचार किया जा रहा है। फ्रांसीसी कवि पॉल वेरलेन अपनी कविता 'काव्य कला' में लिखते हैं : 'घूँघट के नीचे सुन्दर नज़र हो/ प्रचण्ड गर्मी की तपिश हो उसमें/ झलके शरद ऋतु का आकाश/ तेज़ नृत्य की कशिश हो उसमें'। फ्रेंच कवि पॉल वेरलेन की कविताओं का मूल रूसी से अनुवाद किया है वरिष्ठ कवि अनिल जनविजय ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं पॉल वेरलेन की...