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ज्योति रीता की कविताएँ

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  ज्योति रीता     सामान्यतया कुछ भी लिखना आसान नहीं होता। लिखना त्रासदी से मुक्त होना होता   है। वह त्रासदी जो हमारे आत्म ही नहीं बल्कि वाह्य में भी घटित होती रहती है। लिखना तमाम दिक्कतों को बुलावा देना होता है। इतिहास गवाह है कि लेखन की वजह से तमाम लोगों को तमाम तरह की प्रताड़नाएं झेलनी पड़ीं। देश निकाला को वरण करना पड़ा। लेकिन लेखन ऐसा रोग होता है जो एक बार लगने के बाद पीछा छोड़ने का नाम नहीं लेता। पाब्लो नेरुदा हों , या फिर नाज़िम हिकमत पीड़ा की एक अकथनीय परम्परा इनके यहाँ मौजूद है। आमतौर पर स्त्रियों की घरेलू व्यस्तताएँ इतनी होती हैं कि लेखन उनके लिए मुश्किल काम हो जाता है लेकिन महिलाओं ने इसे सम्भव कर दिखाया है। और बेहतर लेखन से अपने को साबित भी किया है। ज्योति रीता हमारे समय की महत्त्वपूर्ण कवयित्री हैं। हालांकि वे कम प्रकाशित हुई हैं। उनकी सशक्त कविताएँ इस बात की तस्दीक करती हैं कि उनकी रचनात्मकता किसी से कम न...