जय प्रकाश का आलेख 'कर्म और श्रम के प्रतिष्ठापक कृष्ण'
भारतीय मिथकीय परम्परा में कृष्ण एक ऐसे चरित्र के रूप में उभर कर सामने आते हैं जिनमें बिल्कुल सामान्य व्यक्ति को भी अपना बिम्ब दिखाई पड़ता है। वे कर्म के साथ साथ ज्ञान और भक्ति से भी जुड़े हैं। ये तीनों सूत्र ऐसे हैं जिनसे भारत का एक बड़ा समुदाय खुद को जुड़ा हुआ पाता है। कृष्ण जहां एक तरफ सूरदास और मीरा के आराध्य के रूप में दिखाई पड़ते हैं वहीं दूसरी तरफ रसखान और नजीर के भी प्रिय हैं। कृष्ण पर अपने एक आलेख में जय प्रकाश उचित ही लिखते हैं ' कृष्ण का व्यक्तित्व इतना सर्वव्यापी है। यदि सखा हो तो कृष्ण जैसा, प्रेमी हो तो कृष्ण जैसा, गुरू हो कृष्ण जैसा। वह एक साथ नीति, कूटनीति, तत्वज्ञानी, दार्शनिक, कलाकार, राजनेता, योद्धा सब हैं। कृष्ण में अस्तित्व अपनी सम्पूर्णता में प्रकट है।' परम्परा के अनुसार आज कृष्ण के जन्म का दिन जन्माष्टमी है। इस पर्व की बधाई देते हुए आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं जय प्रकाश का आलेख 'कर्म और श्रम के प्रतिष्ठापक कृष्ण'। 'कर्म और श्रम के प्रतिष्ठापक कृष्ण' ...