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के. विक्रम राव का आलेख 'क्या थे वे दिन? गीतमाला वाले!'

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  अमीन सयानी युवा होते हम लोगों के लिए अस्सी का दशक कई वजहों से आज भी जेहन में है। रेडियो तब हम सब का विश्वसनीय साथी हुआ करता था। इस दौर में भी सुर, लय, ताल वाले गीत बना करते थे। लता मंगेशकर के साथ साथ यह दौर किशोर कुमार का भी था। तब कुमार सानू, उदित नारायण, अनुराधा पौडवाल, अलका याग्निक, कविता कृष्णमूर्ति आदि ने गायन की दुनिया में प्रवेश किया था और चारो तरफ इनके नाम की गूंज थी। अब रेडियो सिलोन के अलावा विविध भारती से भी 'सिबाका गीतमाला'  आने लगा था। लोगों को यह अच्छी तरह याद होगा कि पहले इसका नाम 'बिनाका गीतामाला' हुआ करता था। बुधवार को आठ से नौ बजे सायं का समय जैसे इसके लिए आरक्षित था। इसके प्रस्तुतकर्ता अमीन सयानी थे, जिनके मोहक अंदाज और प्रस्तुतिकरण का कोई जवाब नहीं था। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी उपस्थिति भर से उस क्षेत्र को कुछ इस तरह गुंजायमान कर देते हैं कि लंबे समय के लिए स्मृतियों में बस जाते हैं। अमीन सयानी ने रेडियो प्रस्तुतकर्ता के जो प्रतिमान निर्धारित किए, बाद में उसके आस पास तक भी कोई नजर नहीं आया। के. विक्रम राव मशहूर पत्रकार हैं। उन्होंने अमीन सयानी, ग...