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सुनील कुमार पाठक का आलेख 'भक्ति, राष्ट्रीयता और सामाजिक सद्भावना का संगम : मास्टर अजीज का काव्य'

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  धार्मिक सद्भाव की हमारे यहां एक सशक्त परम्परा रही है। कवियों ने इस सद्भाव को अपनी रचनाओं में भी व्यंजित करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास किया है। इस क्रम में भोजपुरी के कवि मास्टर अजीज का नाम महत्त्वपूर्ण है। मुस्लिम कवियों ने कृष्ण भक्ति को ले कर अनेक कृतियां रची हैं। रसखान इसके महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं। लेकिन राम को ले कर काव्य रचने वाले मुस्लिम कवि दुर्लभ हैं। मास्टर अजीज इस अर्थ में बिरले कवि हैं। कीर्तन परम्परा में लिखी गईं मास्टर अजीज की कविताएं भोजपुरी क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं और एक अलग वितान रचती हैं। एक और बात, मास्टर अजीज की आज कोई भी तस्वीर उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि उनके परिवार वालों के पास भी उनकी कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  सुनील कुमार पाठक का आलेख 'भक्ति, राष्ट्रीयता और सामाजिक सद्भावना का संगम : मास्टर अजीज का काव्य'।      'भक्ति, राष्ट्रीयता और सामाजिक सद्भावना का संगम : मास्टर अजीज का काव्य'                             डाॅ. सुनील कुमार पाठक ...