शम्भु यादव की कविताएं
शंभु यादव जीवन विचारों से भरा होता है इसलिए वह परिवर्तनशील होता है। इन विचारों ने ही तो इंसान को वास्तविक तौर पर इंसान बनाया। स्वाभाविक रूप से ये विचार दुनिया को भी बदलते रहते हैं। यानी जहां कोई विचार नहीं वहां कोई बदलाव हो ही नहीं सकता। इस बिना पर कहा जा सकता है कि दुनिया रोज बनती है। लेकिन और सच की तरह यह भी अधूरे सच का तिलिस्म मात्र है। जिनका जीवन अभाव से भरा हुआ है, जो आधारभूत सुविधाओं के लिए रोज ही संघर्ष करते रहते हैं, उनके लिए यह जीवन एक रस सा लगने लगता है। जैसे कोई उत्कंठा ही नहीं बचती। जीवन रसहीन सा लगने लगता है। शम्भु यादव जीवन की कड़वी सच्चाईयों के कवि हैं। कविता में वे कल्पना की उड़ान जरूर भरते हैं लेकिन यह कल्पना यथार्थ से आबद्ध होती है। वे जानते हैं कि 'कई चेहरे खिलते हुए से' आते हैं और 'अपने रूप को रख देते हैं'। लेकिन यह 'चेहरा दुख से भरा और/ कोई वो एक अपनी कही जानी को किसी कोशिश में कहे कितने समय तक!' आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं शम्भु यादव की कविताएं। शम्भु यादव की कविताएं कई उम्र बीती शब्दों शब्दों बहुत सारी वजहों की बानगी -किसी एक वजह क...