रोहित ठाकुर की कविताएं
रोहित ठाकुर एक सवाल कवि के मन में भी अक्सर उठता रहता है कि कवि के मायने क्या होते हैं? एक कवि को किस तरह परिभाषित किया जा सकता है। इसी क्रम में 'कवि' को ले कर दुनिया भर के कवियों ने कई कविताएँ लिखी हैं। युवा कवि रोहित ठाकुर भी इस सवाल से जूझते हैं और कवि शीर्षक से कविताएँ लिखते हैं। इस क्रम में उनका मानना है कि कवि तो वही जो पहले एक बेहतर इंसान हो। वे लिखते हैं ' आकाश को निहारते हुए चिड़िया हो जाना/ धरती को निहारते हुए फूल/ मनुष्य को निहारते हुए अनाज का दाना/ भाषा को नहीं दुःख को समझना/ बहस में नहीं प्रेम में शामिल होना/ '। आज की पोस्ट में प्रयुक्त पेंटिंग्स वरिष्ठ कवि चित्रकार प्रयाग शुक्ल की हैं। प्रयाग जी की पेंटिंग्स जैसे उनकी कविताओं का ही एक प्रतिरूप हैं। कविता से पेंटिंग और पेंटिंग से कविता में ये आवाजाही उनके यहाँ निरन्तर मिलती है। सहज, सरल और संवेदना से भरी हुई ये पेंटिंग्स जैसे हमारे आस पास के जीवन, हमारे मनोभावों को सहजता से उकेरती हैं। आज पहली बार पर प्रस्तुत है रोहित ठाकुर की कविताएँ। र...