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रोहित ठाकुर की कविताएं

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रोहित ठाकुर एक सवाल कवि के मन में भी अक्सर उठता रहता है कि कवि के मायने क्या होते हैं? एक कवि को किस तरह परिभाषित किया जा सकता है। इसी क्रम में 'कवि' को ले कर दुनिया भर के कवियों ने कई कविताएँ लिखी हैं। युवा कवि रोहित ठाकुर भी इस सवाल से जूझते हैं और कवि शीर्षक से कविताएँ लिखते हैं। इस क्रम में उनका मानना है कि कवि तो वही जो पहले एक बेहतर इंसान हो। वे लिखते हैं ' आकाश को निहारते हुए चिड़िया हो जाना/ धरती को निहारते हुए फूल/ मनुष्य को निहारते हुए अनाज का दाना/ भाषा को नहीं दुःख को समझना/ बहस में नहीं प्रेम में शामिल होना/ '।     आज की पोस्ट में प्रयुक्त पेंटिंग्स वरिष्ठ कवि चित्रकार प्रयाग शुक्ल की हैं। प्रयाग जी की पेंटिंग्स जैसे उनकी कविताओं का ही एक प्रतिरूप हैं। कविता से पेंटिंग और पेंटिंग से कविता में ये आवाजाही उनके यहाँ निरन्तर मिलती है। सहज, सरल और संवेदना से भरी हुई ये पेंटिंग्स जैसे हमारे आस पास के जीवन, हमारे मनोभावों को सहजता से उकेरती हैं।   आज पहली बार पर प्रस्तुत है रोहित ठाकुर की कविताएँ।       र...

रोहित ठाकुर की कविताएँ

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रोहित ठाकुर रोहित ठाकुर जन्म तिथि - 06/12/ 1978 शैक्षणिक योग्यता   -   परा-स्नातक राजनीति विज्ञान विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं हंस , आजकल , वागर्थ , इन्द्रप्रस्थ भारती , बया , दोआब , परिकथा , मधुमती , तद्भव , आदि   में कविताएँ प्रकाशित। मराठी , पंजाबी   में   कविताओं का अनुवाद प्रकाशित। कविता कोश , भारत कोश   तथा लगभग 40 ब्लॉगों पर कविताएँ प्रकाशित। हिन्दुस्तान , प्रभात खबर , अमर उजाला आदि समाचार पत्रों में कविताएँ प्रकाशित। वृत्ति   -   शिक्षक   रूचि - हिन्दी-अंग्रेजी साहित्य अध्ययन   प्रकृति से कवि का संबंध चोली-दामन जैसा होता है। दुनिया का शायद ही कोई रचनाकार हो जिसकी रचनाओं से प्रकृति नदारद हो। हमारी प्रकृति वह वास्तविक यथार्थ होती है जिसमें हम सभी अपना जीवन गुजारते हैं। प्रकृति की गोद में ही हम सब जनमते और अन्ततः एकाकार हो जाते हैं। दुनिया की सभी प्राचीनतम सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही पुष्पित पल्लवित हुईं। वस्तुतः नदी प्रकृति की ऐसी ही उम्द...