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प्रतुल जोशी का आलेख 'पिता के बारे में पढ़ते हुये'

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  शेखर जोशी  जिन बातों को हम अपने घर परिवार में साझा नहीं कर पाते, उन्हें हम अपने दोस्त मित्रों से बेहिचक साझा कर लेते हैं। अप्रतिम कथाकार शेखर जोशी ने नवीन जोशी से अपने जीवन और लेखन की उन बातों को साझा किया जो उनके परिवार जनों को भी नहीं पता। नवीन जोशी ने अपनी किताब    "शेखर जोशी : कुछ जीवन की, कुछ लेखन की" में इन महत्त्वपूर्ण स्मृतियों को सहेज रखा है। इस किताब को पढ़ते हुए शेखर जी के पुत्र प्रतुल जोशी ने एक उम्दा आलेख लिखा है जो परिकथा के जनवरी-अप्रैल 2025 अंक में प्रकाशित हो चुका है। आज शेखर जी का जन्मदिन है। हम उनकी स्मृति को नमन करते हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  प्रतुल जोशी का आलेख 'पिता के बारे में पढ़ते हुए'। पिता के बारे में पढ़ते हुए प्रतुल जोशी कोई भी पुत्र अपने पिता को जन्म से ही जानता है। पिता यदि एक साधारण गृहस्थ हो तो उन्हें जानना भी आसान हो सकता है। लेकिन पिता ने यदि अपने जीवन में कुछ असाधारण किया हो, तो कई बार पिता के व्यक्तित्व के सभी पक्षों को जानना पुत्र के लिये भी सम्भव नहीं होता। ऐसे में किसी अन्य स्रोत से अपने पिता के बारे में जानन...

शेखर जोशी की वसीयत 'ओलियागाँव के लिए कुछ सपने'

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  इस जीवन की अपनी एक सीमा है। कहा जा सकता है कि जन्म लेना और अन्त होना यह जीवन की अनिवार्य विशिष्टता है। यही इस जीवन की खूबसूरती भी है। लेकिन मनुष्य अपने विशिष्ट कार्यों के जरिए खुद को अमर कर लेता है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि शेखर जोशी एक बेजोड़ कहानीकार थे। उनका व्यक्तित्व उन्हें असाधारण बना देता था। अपने जीवन के अन्तिम दिनों में उन्होंने अपनी एक वसीयत लिखी।  शेखर जी की यह वसीयत नवीन जोशी द्वारा लिखी गई  'शेखर जोशी: कुछ जीवन की कुछ लेखन की' किताब में संकलित है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं शेखर जोशी की वसीयत 'ओलियागाँव के लिए शेखर जी के कुछ सपने'। 'ओलियागाँव के लिए शेखर जी के कुछ सपने' नवीन जोशी  अपने नब्बेवें जन्म दिन से करीब दो-ढाई महीने पहले शेखर दाज्यू ने अपनी वसीयत लिखी थी- 'मन की बात' शीर्षक से। मई-जून में वे बेटी कृष्णा के पास पुणे में थे। कोविड का हलका झटका लगा था लेकिन उबर आए थे। तभी यह 'मन की बात' लिखी गई। आँखों की बीमारी के कारण लिखना आसान नहीं था। तीस जून (2022) से लिखना शुरू किया और थोड़ा-थोड़ा कर के छह जुलाई तक पूरा किया। ब...

शेखर जोशी से नवीन जोशी की बातचीत

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  विगत 4 अक्तूबर 2022 को प्रख्यात कथाकार शेखर जोशी का निधन हो गया। शेखर जी ऐसे कहानीकार रहे हैं जिनकी कई कहानियां पाठकों के बीच काफी ख्यात हैं। शेखर जी नई कहानी आंदोलन के एक मजबूत स्तम्भ थे। उनके निधन के साथ ही नई पीढ़ी के रचनाकारों की पीढ़ी का अन्त हो गया। शेखर जी ने अपने विशेष अंदाज से नई कहानी आंदोलन की पहचान को प्रभावित किया है। पहाड़ी इलाकों की गरीबी, कठिन जीवन संघर्ष, उत्पीड़न, यातना, प्रतिरोध, उम्मीद और नाउम्मीदी से भरे औद्योगिक मजदूरों के हालात, शहरी-कस्बाई और निम्न वर्ग के सामाजिक-नैतिक संकट, धर्म और जाति में जुड़ी रुढ़ियाँ— ये सभी उनकी कहानियों के मुख्य विषय हैं। शेखर जोशी की प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ इस प्रकार हैं। कोसी का घटवार (1958), साथ के लोग (1978), हलवाहा (1981), नौरंगी बीमार है (1990), मेरा पहाड़ (1989), डागरी वाला (1994), बच्चे का सपना (2004), आदमी का डर (2011), एक पेड़ की याद (2015), प्रतिनिधि कहानियाँ। हाल ही में आजकल ने शेखर जी पर केन्द्रित एक विशेषांक प्रकाशित किया। इस विशेषांक के लिए रचनाकार नवीन जोशी ने शेखर जी का लम्बा साक्षात्कार लिया था जिसे आजकल ने अपने...