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फ्रेडरिक एंगेल्स का आलेख 'भारत में विद्रोह'

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फ्रेडरिक एंगेल्स 1857 का विद्रोह भारतीयों द्वारा किया जाने वाला ऐसा पहला विद्रोह था जिसने अंग्रेजी वर्चस्व के सामने कड़ी चुनौती प्रस्तुत की। अभी तक अंग्रेजों को इस तरह के कड़े और संगठित प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा था। हम भारतीय इसे अपना स्वतन्त्रता संघर्ष भी कहते हैं। हालांकि ऐतिहासिक तौर पर जब हम इस धारणा के परिप्रेक्ष्य में तहकीकात करते हैं तो कई दिक्कतें उठ खड़ी होती हैं। ऐसे में साम्राज्यवादी इतिहासकारों द्वारा गढ़े गए टर्म विद्रोह को ही अगर हम स्वीकार कर लें, तो इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि इस विद्रोह में गरिमा थी। वह गरिमा जो मनुष्य होने के नाते कोई भी प्राप्त करना चाहता है। भारत के इस विद्रोह पर लंदन में बैठे हुए समाजवादी चिन्तक कार्ल मार्क्स और  फ्रेडरिक एंगेल्स की भी नजर थी और ये दोनों विभूतियां विद्रोह की घटनाओं की रिपोर्टिंग और विश्लेषण कर रही थी।  फ्रेडरिक एंगेल्स का लिखा एक आलेख  1 अक्टूबर 1858 के न्यूयार्क डेली ट्रिब्यून, अंक 1443, में एक संपादकीय आलेख के रूप में प्रकाशित हुआ। कल 28 नवम्बर को फ्रेडरिक एंगेल्स का जन्मदिन था। उनकी स्मृति को हम नमन क...