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अरविन्द गौतम की कविताएँ

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कुछ अरसा पहले 'पहली बार' ब्लॉग पर हमने 'वाचन-पुनर्वाचन' कालम आरम्भ किया था जिसमें एक कवि दूसरे कवि पर टिप्पणी करते हुए उसकी कुछ चयनित कविताएँ प्रस्तुत करता है । इसी क्रम में आज युवा कवि शिवानन्द मिश्र की टिप्पणी के साथ नवोदित कवि अरविन्द गौतम की कविताएँ प्रस्तुत हैं । पहले शिवानन्द मिश्र की टिप्पणी ।       'गौतम अभी उस कच्चे घड़े के समान हैं जिसमें अपनी मिट्टी का सौंधापन और ठेठ देसीपन रचा-बसा है और जो समय की आँच में पकने के बाद अपने शीतल काव्य सुधा से हमारे अंतर्तम को तृप्त कर जाएगा। ये कहते भी हैं ......मैं जौनपुरी बन जाता हूँ जब मिट्टी में सन जाता हूँ .....। गौतम अपनी जड़ों और परम्पराओं से तो जुड़े हैं लेकिन उन रूढ़ियों से नहीं जो समाज को पीछे ले जाती हैं। गौतम आज के समाज में व्याप्त ऊँच-नीच का भेद-भाव , छोटे-बड़े की थोपी हुई मान्यताओं पर सवाल खड़े करते हैं। कहना न होगा कि कवि में अपार सम्भावनाएँ हैं।' -          शिवानन्द मिश्र    अरविन्द गौतम की कविताएँ जौनपुरी मैं बन जाता हूँ ...