विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक' की कहानी 'पाकिस्तान'
विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक' भारत को आखिरकार 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली। लेकिन यह आजादी वह नहीं थी जिसका सपना हमारे पुरखों ने देखा था। हम आजाद हुए लेकिन विभाजित हो कर। धर्म के आधार पर भारत का विभाजन हुआ और एक नया राष्ट्र पाकिस्तान बना। विभाजन के मूल में धर्म जरूर था लेकिन इसके पक्षधर वे लोग थे जो धर्म के ठेकेदार या दलाल थे। तमाम मुसलमान ऐसे थे जिन्होंने पाकिस्तान जाने की बजाय हिन्दुस्तान को अपना देश मानते हुए यहीं पर रहने का निश्चय किया। हालांकि उस समय तमाम प्रोपेगेंडा भी खड़े किए गए मसलन अब तो हिन्दुओं की हुकूमत कायम हो जाएगी और हिन्दुस्तान में मुसलमानों का रहना मुश्किल होगा। लेकिन जो हिन्दुस्तान की मिट्टी से भलीभांति वाकिफ थे वे हिलाए न हिले और यहीं पर रह गए। भारत विभाजन का दर्द तमाम रचनाकारों ने अपनी रचनाओं में अपनी तरह से शिद्दत के साथ बयाँ किया है। ऐसी ही एक कहानी है विश्वम्भरनाथ शर्मा 'कौशिक' की कहानी जिसका शीर्षक ही है 'पाकिस्तान'। आज भारतीय स्वाधीनता दिवस की 80वीं वर्षगाँठ है। इस मौके पर सभी को बधाई एवम शुभकामनाएं। आइए इस अवसर पर आज पहली बार पर हम पढ़ते है...