हितेन्द्र पटेल का आलेख 'भारत को फिर से सोचने का समय'
हितेन्द्र पटेल रोजी रोजगार जीवन से जुड़े ऐसे मुद्दे हैं जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। लोकतांत्रिक सरकार की यह जिम्मेदारी होती है कि वह अपने देश के युवाओं को रोजगार प्रदान करे जिससे कि वह अपना जीवन यापन करने के साथ समाज और राष्ट्र की सेवा कर सके। लेकिन युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकारें अपनी इस जिम्मेदारी से बचने के प्रयास में लग जाती हैं। एक और दिक्कत है जो थोड़ी बहुत नौकरियां बची हैं उनकी भर्ती प्रक्रिया में ऐसा भ्रष्टाचार व्याप्त है जिससे दिन रात हाड़तोड़ परिश्रम करने वाले योग्य अभ्यर्थी रोजगार पाने की प्रक्रिया से ही बाहर हो जाते हैं जबकि अयोग्य लोग भ्रष्ट अधिकारियों को साध कर या रिश्वतखोरी के जरिए रोजगार प्राप्त कर लेते हैं। हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक होने का मामला बार बार सामने आया है। ऐसे में युवाओं का आक्रोश स्वाभाविक है जो जंतर मंतर से ले कर रांची तक प्रखर रूप में दिखाई पड़ रहा है। युवाओं (जिन्हें जेन जी कहा जा रहा है) के प्रदर्शन में उनकी भाषा और तरीके को ले कर बुद्धिजीवियों के द्वारा प्रश्नचिह्न उठाए जा रहे हैं। लेकिन इस पीढ़ी को सवालों ...