मार्कण्डेय जी के बारे में ममता कालिया से शालिनी बाजपेयी की बातचीत
कथाकार मार्कण्डेय का अपना एक अलग सादगी भरा व्यक्तित्व था। सही मायनों में वे एक रचनाकार थे। उनमें संवेदनशीलता के साथ साथ सहृदयता भी थी। उनका अपना एक पाठक वर्ग था। रचनाकारों खासकर नयी पीढी के साथ वे सहज ही अपना तादात्म्य स्थापित कर लेते थे। 'कथा' पत्रिका का सम्पादन करते हुए अनेक रचनाकारों को सामने लाने का महत्त्वपूर्ण कार्य मार्कण्डेय जी ने किया। जब भी कथा के किसी नए अंक को लाने की योजना बनती, वे कुछ रचनाकारों का नाम चयनित कर लेते। उनमें ममता कालिया का नाम आवश्यक रूप से शामिल होता। ममता जी भी मार्कण्डेय जी के लेखन की मुरीद हुआ करतीं। मार्कण्डेय जी का कथा के लिए लिखने का आग्रह इतना अपनत्व और साधिकार भरा होता कि कोई भी इंकार नहीं कर पाता। पिछले वर्ष 'कथा' के मार्कण्डेय अंक का अतिथि सम्पादन कवि बसंत त्रिपाठी ने किया था। इस अंक में मार्कण्डेय जी के बारे में शालिनी बाजपेई ने ममता कालिया से एक विशेष बातचीत की थी। मार्कण्डेय जी की पुण्यतिथि पर विशेष आयोजन के क्रम में आज हम इस बातचीत को प्रस्तुत कर रहे हैं। इसे हमने कथा के मार्कण्डेय अंक से साभार लिया है। तो आइए आज पहली बार पर हम...