मधु कांकरिया का उपन्यास अंश ‘रास्ते बंद हैं सब, कूचे कातिल के सिवा'
मधु कांकरिया नियम कानून इसलिए बनाए गए जिससे समाज में कोई अराजकता न रहे और उस का संचालन सुचारु रूप से हो सके। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इन नियम कानूनों क़ा दुरुपयोग अपने संकीर्ण स्वार्थों के लिए करते रहे हैं। उन्हें इस बात की परवाह नहीं होती कि वे जो कर रहे हैं वह गलत तो है ही, इससे किसी और की जिंदगी पर बुरा असर पड़ सकता है। एक झटके में ही निर्दोष व्यक्ति अपराधियों की पंक्ति में खड़ा दिखता है। यह उस व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है कि वह खुद को निरपराध साबित करे। व्यवस्था से जुड़े लोग भी इसका फायदा उठाते हैं। पुलिस, थाना, कचहरी और अदालत से जुड़े लोग भी इसका फायदा उठाते हैं। मधु कांकरिया लीक से अलग हट कर लेखन करती हैं। आजकल वे जो उपन्यास लिख रही हैं उसमें इस मुद्दे को उन्होंने बखूबी अपना विषय बनाया है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं मधु कांकरिया का उपन्यास अंश ‘रास्ते बंद हैं सब, कूचे कातिल के सिवा'। उपन्यास अंश ‘रास्ते बंद हैं सब, कूचे कातिल के सिवा' मधु कांकरिया बकौल शेक्सपीअर यदि ‘जिंदगी एक मूर्ख द्वारा कही गयी कथा है' तो इस कथा का मूर्ख मैं ही हूँ। सच यह भी कि जीव...