अंजू शर्मा की कहानी 'पहला लुकमा'
अंजू शर्मा हर माता पिता को अपनी संतान प्रिय होती है। पारम्परिक तौर पर पुत्र के प्रति मां पिता का यह लगाव कुछ अधिक ही होता है। क्योंकि मान्यता है कि लड़कियां शादी के बाद घर छोड़ कर अपने पति के घर चली जाएंगी। ऐसे में मां पिता को वृद्धावस्था में देखने सँभालने की जिम्मेदारी पुत्र ही निभाएगा। बदलते समय ने सारे प्रतिमानों को बदल दिया है। और लड़कियों ने वह सारी जिम्मेदारियां बखूबी निभाई हैं जो अभी तक सिर्फ पुत्र उठाया करते थे। अपनी कहानी पहला लुकमा में अंजू शर्मा एक परिवार की उस दर्द भरी कहानी को बयां करती है जिसमें एक मां अपने बेटे जुल्फिकार की मौत को स्वीकार नहीं कर पा और एक सियापा पूरे घर में पसरा रहता है। इसकी कीमत जुल्फिकार की बहन जेबा को चुकानी पड़ती है। मां की इस स्थिति से वह खुद भी मानसिक तौर पर परेशान है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं अंजू शर्मा की कहानी 'पहला लुकमा'। 'पहला लुकमा' अंजू शर्मा मैंने दस्तरख़ान लगाया तो हमेशा की तरह अम्मी को ज़ुल्फी भाई की प्लेट की तरफ़ ताकते पाया. पता नहीं वे प्लेट को देख रही थीं या ज़ुल्फी भाई को या फिर दोनों को। हमेशा की तरह अम्मी ने बेख्...