दीनू भाई पंत की डोगरी कविताएँ
दीनू भाई पंत कवि परिचय: दीनू भाई पंत का जन्म 11 मई 1917 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के पैंथल नामक गाँव में हुआ। इनके लेखन की शुरुआत हिन्दी कविता से हुई, मगर कुछ देर बाद इन्हें मातृभाषा डोगरी ने चुन लिया। यह डोगरी के पहले प्रगतिशील कवि हैं। इनकी कविताओं में मेहनतकश जन की पीड़ा, संघर्ष और जिजीविषा अभिव्यक्त हुई है। दीनू भाई सामंतीय मानसिकता और अंधविश्वास के सख़्त विरोधी थे। इन्होंने 1946-47 में राजसत्ता के विरुद्ध हुए 'चनैनी आन्दोलन' में सक्रिय भूमिका निभाई। इनके यहाँ विद्रोह, प्रतिरोध, व्यंग्य और साम्यवादी चेतना है, और डुग्गर देस की सुन्दरता व संस्कृति के दिग्दर्शन होते हैं। 'गुत्तलू', 'मंगू दी छबील', 'वीर गुलाब', 'साढ़ा बापू', 'दादी ते माँ '(काव्य), और 'सरपंच', 'अयोध्या', 'नमां ग्रां' (नाटक) इनकी प्रमुख पुस्तकें हैं। इनका देहांत 23 मार्च 1992 को हुआ। कवि का दायित्व महज कविताएँ लिखना ही नहीं होता है। उसका दायित्व होता है अपने आस पास के बेहतर रचनाकारों को प्रकाश में लाना। कवि कमल जीत चौधरी यह काम बखूबी करते रहते हैं...