भरत प्रसाद की लम्बी कविता 'मणिपुर! मेरे देश के मणि'
भरत प्रसाद युद्ध हमेशा मानवता के विरुद्ध होता है। आंतरिक युद्ध तो और भी भयावह होता है। जब एक साथ रहने और सुख दुःख में शिरकत करने वाले लोग एक दूसरे के खून के प्यासे बन जाएं तो स्थितियां बेकाबू हो जाती हैं। आजादी के समय भारत में सांप्रदायिक वातावरण के चलते जो भयावह मार काट हुई वह इतिहास का एक काला अध्याय है। तब शताब्दियों से एक साथ रह रहे हिंदू और मुसलमान एक दूसरे के खून के प्यास बन गए थे। आखिरकार देश का बंटवारा हुआ और धार्मिक सांप्रदायिक तांडव कुछ समय के लिए थम गया। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में 3 मई 2023 को इम्फाल घाटी में रहने वाले बहुसंख्यक मैती जनजाति और कुकी जनजाति के आदिवासी समुदाय के बीच एक झगड़ा शुरू हो गया। इस झगड़े में मानवता एक बार फिर शर्मसार हुई। हत्या, आगजनी, बलात्कार जैसी घटनाएं एक के बाद एक घटती रहीं। हजारों लोग मारे गए। आज तक इस घटना का पटाक्षेप नहीं हो पाया है और रह रह कर इसकी चिंगारियां भड़कती रहती हैं। कवि भरत प्रसाद ने एक कवि के नजरिए से मणिपुर घटना की तहकीकात करते हुए एक लम्बी कविता लिखी है। भरत प्रसाद अपनी कविता में लिखते हैं : 'मेरी...