कैलाश बनवासी की कहानी 'मथुरा प्रसाद उर्फ़ राहत का एक नाम'
कैलाश बनवासी मनुष्य सब कुछ महज अपने फायदे के लिए नहीं करता। समय और समाज के लिए जो भी जरूरी समझता है, वह उसे करने का प्रयास करता है। लेकिन आज के भौतिकवादी समय में सभी चीजों को फायदे की तुला पर तौल कर देखा जाने लगा है। हमारा समाज जो लिखने पढ़ने से वैसे भी विरक्त रहा है, साहित्य को अजीब नजरिए से देखता है। लोग सवाल पूछते हैं 'कविता कहानी लिखने से क्या मिलता है'? उन्हें नहीं पता कि यह साहित्य स्वतः स्फूर्त ढंग से उपजता है। रचनाकार एक सामाजिक जिम्मेदारी के तहत इस दायित्व को निभाता है। वह इसे नफे नुकसान की तुला पर तौलने के बारे में सोचता ही नहीं। दुनिया को बदलने में इन रचनाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। कहा जाता है कि रूसो का साहित्य हर फ्रांसीसी क्रांतिकारी अपने सिरहाने रखता था। मांटेस्क्यू के विचारों ने निरंकुशता की जकड़बंदी को तोड़े में प्रमुख भूमिका निभाई। वाल्टेयर के व्यंग्य ने लोगों को अन्दर से झकझोर दिया। हमारे यहां वन्देमातरम में जाने कितने क्रांतिकारियों को देश के लिए कुर्बान होने की प्रेरणा प्रदान की। अपनी फांसी से पहले भगत सिंह लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे। कार्ल मार्क्स क...