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रवि रंजन का आलेख "कोरोना-कालीन यथार्थ और मानवीय संवेदना : संतोष दीक्षित की ‘काल कथा’ "

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संतोष दीक्षित  कोरोना महामारी मनुष्यता के लिए एक बड़ी आपदा ले कर आई। सामान्य तौर पर देखा जाए तो इस महामारी ने पूरे समाज को व्यापक तौर पर प्रभावित किया। लेकिन निम्न मध्यम वर्ग, रोजमर्रा का काम करने वाले, किसान और मजदूरों पर इस महामारी का व्यापक असर पड़ा। इसने इन वर्गों की रीढ़ तोड़ कर रख दी। वरिष्ठ आलोचक रवि रंजन लिखते हैं 'महामारी भले ही सार्वभौमिक थी, किन्तु उसके अनुभव वर्ग, पेशा, संसाधन, निवास-स्थान और सामाजिक स्थिति के अनुसार भिन्न थे। एक ओर समाज का वह वर्ग था जो घरों में सुरक्षित रह कर डिजिटल माध्यमों की सहायता से अपने जीवन को अपेक्षाकृत व्यवस्थित बनाए रखने में सक्षम था; दूसरी ओर विशाल श्रमजीवी समुदाय जीविका, भोजन, आवास और अस्तित्व के संकट से जूझ रहा था। इस प्रकार कोरोना-काल ने भारतीय समाज के भीतर विद्यमान वर्गीय, आर्थिक और सांस्कृतिक अंतर्विरोधों को और अधिक स्पष्ट रूप में सामने ला दिया।' इस महामारी के दौरान मजदूरों का व्यापक पैमाने पर माइग्रेशन हुआ। भारत के विभाजन के बाद इतने व्यापक पैमाने का माइग्रेशन इस महामारी के दौरान ही दिखाई पड़ा। प्रख्यात कथाकार संतोष दीक्षित ने इस ...