चंद्रेश्वर से पंजाबी- हिन्दी लेखक जतिंदर औ की बातचीत
चन्द्रेश्वर वरिष्ठ हिन्दी-भोजपुरी कवि-गद्यकार चंद्रेश्वर से पंजाबी- हिन्दी लेखक जतिंदर औलख की बातचीत “मानवीय संवेदना के बिना साहित्यकार होना असंभव है” औलख : चंद्रेश्वर साहब, आप अपने जन्म और परिवार के बारे में कुछ बताइए? चन्द्रेश्वर : मेरा जन्म बिहार के भोजपुर ज़िले (अब बक्सर) के एक गांव आशा पड़री में एक कट्टरपंथी ब्राह्मण परिवार में हुआ। मेरे बाबा पंडित भृगुनाथ पाण्डेय संस्कृत के विद्वान थे। वे वैयाकरणविद, साहित्याचार्य एवं ज्योतिषाचार्य थे और काशी की विद्वत्परंपरा में सन् 1950 से 1993 तक उनका महत्व बना रहा। काशी में उन्होंने प्रेमचंद, प्रसाद, रामचंद्र शुक्ल आदि हिन्दी के महान लेखकों को देखा था। यद्यपि वे संस्कृत के आगे हिन्दी को विशेष महत्व नहीं देते थे। वे हज़ारी प्रसाद द्विवेदी से एक-दो बार मिले थे। वे उनके समकालीन थे। हालांकि दोनों के विचारों में बहुत अंतर था। मेरे बाबा का जन्म 1905 में हुआ था जबकि हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 1907 में। मेरे बाबा एक साथ शिव, विष्णु और दुर्गा के उपासक थे। उनका अधिकांश समय पूजा-पाठ में व्यतीत होता था। मेरे पिता भी धार्मिक व्...