जितेन्द्र कुमार का संस्मरण 'प्रतिबद्ध कथाकार-संपादक अनन्त कुमार सिंह'
अनन्त कुमार सिंह आज के समय में साहित्यिक सांस्कृतिक पत्रिका निकालना एक अत्यन्त दुष्कर काम है। यह एक घर फूंक तमाशा है। साहित्यिक पत्रिका निकालने के लिए जुनून की जरूरत होती है। अनन्त कुमार सिंह में वह जुनून था। एक छोटे से शहर आरा से वे 'जनपथ' पत्रिका का सम्पादन करते रहे। वे एक प्रतिबद्ध कहानीकार तो थे ही, सम्पादन में भी वह प्रतिबद्धता लगातार दिखाई पड़ती है। इस क्रम में वे विचारों को कभी आड़े नहीं आने देते थे। जनवादी लेखक संघ से जुड़े होने के बावजूद 'जनपथ' के सम्पादन में उन्होंने तमाम ऐसे रचनाकारों की मदद ली जो जन संस्कृति मंच या प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े हुए थे। आज जब इंसानियत खत्म होती जा रही है, उनके बारे में कहा जा सकता है कि सही मायने में वे एक इंसान थे। जो उनके पास गया खाली हाथ नहीं लौटा। उनसे जो भी मदद हो सकती थी, वे बढ़ चढ़ कर करते थे। 'जनपथ' के अंकों में उन्होंने तमाम नए रचनाकारों को प्रकाशित किया। समय समय पर उन्होंने कई विशेषांक प्रकाशित किए जो अब हिन्दी साहित्य की धरोहर हैं। वरिष्ठ आलोचक जितेन्द्र कुमार अरसे से 'जनपथ' के सम्पादन से जुड़े रहे ह...