रवि रंजन का आलेख 'सत्ता, स्मृति और संवेदना: दीप्ति कुशवाह के रंग विमर्श का समाजशास्त्रीय एवं सौन्दर्यशास्त्रीय मानचित्र'
दीप्ति कुशवाह रंग जीवन को एक अलग अर्थ प्रदान करते हैं। अलग अलग रंगों की अलग अलग अर्थ छटा होती है। इंद्रधनुषी आभा से भरा सूर्य जीवन को अर्थवान बना देता है। रंगों के बिना दुनिया की कल्पना ही नहीं की जा सकती। और जब ये रंग किसी कवि की कविता में आते हैं तो इनके अर्थ कुछ और ही हो जाते हैं। दीप्ति कुशवाह की कविताओं में ये रंग अपने अर्थों में मुखर हो उठते हैं। इस तरह दीप्ति की कविताओं में रंग महज सौंदर्यपरक अवयव न रह कर सामाजिक संरचनाओं, वर्गीय चेतना और स्त्री-अस्तित्व के द्वंद्वों के व्याख्याकार बन जाते हैं। वरिष्ठ आलोचक रवि रंजन दीप्ति की इन कविताओं के रंगों की तहकीकात करते हुए लिखते हैं "दीप्ति की इन कविताओं का चित्रकला से संबंध मात्र विषयगत नहीं, बल्कि संरचनात्मक और संवेदनात्मक भी है, जहाँ शब्द कैनवास पर रंगों की परतों की तरह बिछते चले गए हैं। पूरी काव्य-श्रृंखला एक 'कलर पैलेट' की तरह काम करती है, जहाँ हर कविता एक स्वतंत्र चित्र है, फिर भी वे एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। कवयित्री ने जिस प्रकार पीले रंग को 'स्वर्ण के स्वप्न', 'हल्दी की थाली' और 'अमलतास के भरेप...