आशीष सिंह की किताब की भूमिका 'अक्षरों से बाहर खड़े आदमी की कहानियाँ'
हो सकता है कि आप रामनारायण शुक्ल का नाम पहली बार सुन रहे हों। साहित्य की दुनिया समुद्र की तरह अथाह है। यहाँ कई एक ऐसे अमूल्य मोती हैं जो चुपचाप बिखरे पड़े हैं। कोई पारखी आता है और उसके बारे में दुनिया को बताता है कि इस व्यक्ति का भी एक जमाना था जिसने चुपके से महत्त्वपूर्ण काम किया और इस फ़ानी दुनिया से विदा ले लिया। रामनारायण शुक्ल छठवें दशक के एक महत्वपूर्ण कथाकार थे जिन्होंने सन् 1958 से सन् 1968 के बीच कई उम्दा कहानियां लिखी। आशीष सिंह खोजी प्रवृत्ति के लेखक हैं। हाल ही में उन्होंने कथाकार रामनारायण शुक्ल की कहानियों की किताब 'अक्षरों के बीच' को सम्पादित करने का महत्त्वपूर्ण काम किया है। आशीष लिखते हैं 'पढ़ते हुए आपको यह अहसास जरूर होगा कि ये कहानियां हिन्दी कहानी यात्रा में एक जरूरी कड़ी की तरह हैं। सन् साठ के बाद की कहानियों की एक ख़ास रंग-ढंग लिए ये कहानियां एक बार फिर अपने सुधी पाठकों से मुखातिब है।' इस किताब की भूमिका पहली बार के पाठकों के लिए प्रकाशित की जा रही है। आज रामनारायण शुक्ल का जन्मदिन है। हम उनकी स्मृति को नमन करते हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते ...