शैलेन्द्र चौहान का श्रद्धांजलि आलेख 'ऋतुराज : कविता, विचार और आत्मीयता के कुछ प्रसंग'
ऋतुराज 26 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ कवि ऋतुराज का निधन हो गया। वे हमारे समय के अग्रणी कवियों में से एक थे। कविता उनके लिए एक कला भर नहीं बल्कि वह माध्यम थी जिससे वे समाज की असमानताओं पर कटाक्ष करते थे। वरिष्ठ कवि शैलेन्द्र चौहान उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखते हैं "ऋतुराज का जाना हिंदी कविता की एक विशिष्ट आवाज़ का मौन हो जाना है। उन्होंने अपनी कविता में मनुष्य के जीवन-संघर्ष, सामाजिक विषमताओं और स्त्री की अस्मिता के प्रश्नों को गहरी संवेदना और आलोचनात्मक विवेक के साथ अभिव्यक्त किया। उनकी कविता की शक्ति उसकी जनपक्षधर दृष्टि, भाषा के संयम और जीवन के अंतर्विरोधों को पहचानने की क्षमता में निहित थी।" ऋतुराज की कविताएं अपने समय से संवादरत हैं इसीलिए वे पाठकों से जुड़ती हैं। पहली बार की तरफ से हम उन्हें नमन करते हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं शैलेन्द्र चौहान का श्रद्धांजलि आलेख 'ऋतुराज : कविता, विचार और आत्मीयता के कुछ प्रसंग'। श्रद्धांजलि आलेख 'ऋतुराज : कविता, विचार और आत्मीयता के कुछ प्रसंग' शैलेन्द्र चौहान ऋतुराज को याद करते हुए मेरे सामने केवल एक कवि का व्यक...