रवि रंजन का आलेख 'चित्र से परे: सविता सिंह की ‘स्त्री की आत्मा और पिकासो’ कविता में प्रतिनिधित्व और आत्मसत्ता'
'चित्र से परे: सविता सिंह की ‘स्त्री की आत्मा और पिकासो’ कविता में प्रतिनिधित्व और आत्मसत्ता' रवि रंजन हिंदी की समकालीन कविता को अपनी मौलिक दार्शनिक दृष्टि से समृद्ध करने वाली कवयित्री सविता सिंह का काव्य संसार अपनी अलग पहचान रखता है। उनकी कविताएँ स्त्री को पारंपरिक परिभाषाओं के सीमित दायरे से बाहर निकालती हैं और उसके सामने सोचने, समझने तथा अपने अस्तित्व को पहचानने के लिए एक नयी खिड़की खोलती हैं। उनके कविता संग्रहों में स्त्री चेतना के कई रूप देखने को मिलते हैं। ‘अपने जैसा जीवन’, ‘स्वप्न समय’ और ‘नींद थी और रात थी’ जैसे संग्रहों में वे केवल विरोध दर्ज नहीं करतीं, बल्कि स्त्री के अस्त...