नीतेश व्यास की डायरी के अंश
नीतेश व्यास आम तौर पर लिखना जितना आसान लगता है उतना होता नहीं। एक बार अगर लेखन में जी रम गया तो फिर किसी चीज की परवाह नहीं रह जाती। यह लेखन भी एक तरह की साधना या तपस्या ही है। कई बार ऐसा होता है कि लेखक के जीवन में भी अन्तराल आता है। कई बार ऐसा होता है कि लेखक चाह कर भी नहीं लिख पाता। ऐसा इसलिए होता है कि लेखन जबरन नहीं हो सकता। मस्तिष्क के खास प्रवाह का क्षण होता है लेखन। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि संवेदनशीलता के उत्कर्ष पर पहुंच कर ही लेखन किया जा सकता है। लेखकों में डायरी लिखने की एक समृद्ध परम्परा रही है। व्यक्तिगत दिखने वाली इन डायरियों में ऐसे सूत्र होते हैं जिससे पढ़ने वाला सहज ही अपना जुड़ाव महसूस करने लगता है। कई बार इन डायरियों के लेखन से ही रचनाकार अपनी कविता या कहानी के सूत्र ढूंढ लेते हैं। कवि नीतेश व्यास ने अपनी डायरी में से कुछ अंश पहली बार के लिए भेजा है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं नीतेश व्यास की डायरी के अंश। नीतेश व्यास की डायरी के अंश 19 जनवरी 2022 आज सवेरे सवा पांच बजे ही पड़ोसी के नल की तीखी धार और गली में भौंकने वाले शहरी-सियारों की आवाज़ों...