यादवेन्द्र का आलेख 'अथाह पानी में डूब गई माटी'
विद्यासागर नौटियाल विकास अपने आप में एक विवादास्पद शब्द है। आजकल का विकास ऐसा है जो तात्कालिक रूप से तो बेहतर दिखाई पड़ता है लेकिन दूरगामी दृष्टि से इसका प्रभाव नकारात्मक होता है। तकनीक के मामले में निश्चित रूप से हम बहुत विकास कर गए हैं लेकिन इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि इसने हमारे पर्यावरण को तहस नहस कर दिया है। नेपाल की त्रासदी इसका जीवन्त उदाहरण है। तिब्बत के ऊँचाई वाली जगहों पर बड़े बड़े बांध बना कर जो असंतुलन पैदा किया गया है उसके दूरगामी परिणाम कुछ इसी तरह भयावह होंगे। टिहरी बाँध से हम सब परिचित हैं। लेकिन यह बात कम लोगों को मालूम होगी कि इसके अंदर भागीरथी और भिलंगना नदियों के तट पर बसा टिहरी का पुराना शहर दफ़न है। उस समय इसे बचाने के लिए शहर के लोगों ने धरना, प्रदर्शन, हड़ताल कर अपना प्रतिरोध व्यक्त किया था। लेकिन सरकारों की ज़िद के आगे प्रायः लोगों की ज़िद कहां चल पाती है। विद्यासागर नौटियाल ने टिहरी की इसी पृष्ठभूमि को अपनी कहानी 'माटी वाली' में शिद्दत से दर्ज़ किया है। यादवेन्द्र जी ने इस कहानी के बहाने अपनी उस संस्कृति और परम्परा को याद किया है जिसकी नींव पर आज ह...