परिचय दास का आलेख 'एक स्त्री, एक तंबूरा और महाभारत'
तीजन बाई वेद भारत के प्राचीनतम ग्रन्थ माने जाते हैं। ये श्रुति परंपरा में आते हैं। लेखन कला के विकास के साथ श्रुति परंपरा में साहित्य सृजन की प्रक्रिया धीमी पड़ गई। अरसे बाद भक्ति काल के सन्त भी इस श्रुति परंपरा को अपनाते दिखाई पड़ते हैं। तीजन बाई ने अपने पंडवानी गायन के जरिए महाभारत के श्रुति परंपरा को पुनराविष्कृत किया। उत्तर भारत में यह कहते हुए लोग महाभारत को घर में नहीं रखते कि इससे घर में महाभारत मच जाता है। लेकिन तीजन बाई लीक पर चलने की आदी ही नहीं थी। उन्होंने उस महाभारत को अपनी स्मृतियों में रखा, अपनी जुबान पर रखा और लोगों को महाभारत की कथाएँ सुनाईं। वे इन कथाओं को आज के परिप्रेक्ष्य से जोड़ने का हुनर जानती थीं इसीलिए उनकी प्रस्तुति श्रोताओं के दिल दिमाग पर सीधा असर करती थी। तीजन बाई ने और कई लीक तोड़ी। वे कापालिक शैली में पंडवानी गाने लगीं, जिसमें कलाकार खड़े हो कर अपनी कल्पना से महाभारत के प्रसंगों को जीवंत करता है। हालांकि बरसों पंडवानी गाने के बाद भोपाल के भारत भवन में जब उनका कार्यक्रम रखा गया, तब उन्हें जा कर पता चला कि वो पंडवानी की कापालिक शैली की गायिका हैं। एक बार अ...