शिवदयाल का आलेख 'मिट्टी और मनुष्य से प्रेम का मूल्य रचता मैला आंचल'
फणीश्वर नाथ रेणु भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम समवेत भारतीय जन के संघर्ष की कहानी रही है। इस संग्राम में सभी वर्गों ने अपनी भूमिका अपने अंदाज में निभाई। मजदूरों किसानों की भी इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका थी। इन सबको मिला कर ही भारत माता की वास्तविक तस्वीर साकार होती है। फणीश्वर नाथ रेणु अपने उपन्यास मैला आंचल में भारत माता के उस तस्वीर को सामने रखते हैं जिसके बारे में हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने सोचा तक नहीं था। शिवदयाल लिखते हैं कि "रेणु के कथा साहित्य के मूल में भूमि है। मैला आंचल में भी रेणु जी भूमि की अवस्थिति, भूगोल, उसकी जैविक संपन्नता और मनुज समाज का ऐसा समग्र चित्र खींचते हैं कि मानो उसका भी मानवीकरण कर देते हैं। कहीं-कहीं इस कोशिश में मनोहरी भू-दृश्य भी उपस्थित करते हैं। ऐसी धरती के प्रति अगाध प्रेम उपजता है जिसका मोह छुड़ाए नहीं छूटता।" मिट्टी से मनुष्य का प्रेम पुरातन है जिसे रेणु जी अपने इस उपन्यास में पुनर्रचित करते हैं। आज रेणु जी की पुण्य तिथि पर हम उनकी स्मृति को हम नमन करते हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं शिवदयाल का आलेख 'मिट्टी और मनुष्य ...