हरीश चन्द्र पाण्डे की कविता 'युद्ध'
हरीश चन्द्र पाण्डे युद्ध हमेशा विनाशकारी साबित होता है। इससे वे लोग भी प्रभावित होते हैं जिनका युद्ध से प्रत्यक्ष रूप से कुछ भी लेना देना नहीं होता। यह दरअसल उन लोगों की महत्वाकांक्षाओं का दुष्परिणाम होता है जो खुद को सबसे श्रेष्ठ या सबसे ऊपर समझते हैं। वर्तमान में चल रहा ईरान अमरीका युद्ध ऐसा ही उदाहरण है। यह विडंबना ही है कि जिन यहूदियों ने इतिहास के सबसे निर्मम हत्याकांड के दंश को झेला, वही आज युद्ध के पक्ष में मनमाना व्यवहार कर रहे हैं। दुनिया के सभी बुद्धिजीवियों के द्वारा इस युद्ध का विरोध किया जा रहा है। पहली बार भी इस मुहिम में शामिल है। इसी क्रम में आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं हरीश चन्द्र पाण्डे की कविता 'युद्ध'। 'युद्ध' हरीश चन्द्र पाण्डे एक बार फिर शांति-वार्ता विफल हुई विराम, युद्ध के चरम पर नहीं शांति की पहल पर लगा युद्ध जारी हैं युद्ध होते रहें इसलिए युद्धाभ्यास भी जारी हैं पनडुब्बियां जल की प्रशांतता में अभ्यासरत हैं टैंक रेगिस्तानों को रौंद रहे हैं युद्ध का दमामा सबसे पहले दिमाग में बजता है युद्ध इसीलिए हमेशा ख़ब्तियों की प्रतीक्षा ...