हितेन्द्र पटेल का आलेख 'सुमित सरकार (1939-2026) का जाना'
सुमित सरकार किसी भी समय के इतिहास को समझने में इतिहासकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पढ़ने पढ़ाने के क्रम में हम किन इतिहासकारों की किताबों से हो कर गुजर रहे हैं, यह बात बहुत मायने रखती है। आधुनिक इतिहास को जानने समझने के लिए एक दौर में सुमित सरकार, विपन चन्द्र, सब्यसाची भट्टाचार्य, रजनी पाम दत्त की किताबें आवश्यक होती थीं। बेहतर समझ के लिए आज भी इन किताबों की अपनी भूमिका है। इन सबमें सुमित सरकार की किताब और किताबों से अलग थी। पहली बार पढ़ते हुए यह बोझिल सी लगी। आज इसे महसूस कर रहा हूं क्योंकि हम एक खास किस्म का इतिहास पढ़ने के अभ्यस्त थे जबकि सुमित सरकार एक अलग तरह का इतिहास लिख रहे थे जिसमें राजनीतिक परिस्थितियों को सामाजिक इतिहास के जरिए जानने समझने और विश्लेषण पर जोर था। लीक से अलग हट कर नई बातों से हो कर गुजरते हुए ये दिक्कतें आती हैं। इस बात में कोई संशय नहीं कि सुमित सरकार की Modern India 1885–1947 आज भी एक उम्दा किताब है। उनके पिता सुशोभन सरकार थे जो बीसवीं सदी के बंगाल के असाधारण प्राध्यापक और मार्क्सवादी इतिहासकार थे। पिता का प्रभाव उनके व्यक्तित्व और लेखन पर ...