हितेन्द्र पटेल का आलेख 'इतिहास पर पुनर्विचार'
हितेन्द्र पटेल बंगाल ने आधुनिक भारत में नवजागरण की प्रक्रिया का नेतृत्व किया। राजा राम मोहन रॉय, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, राम कृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द जैसे नाम इस बात की तस्दीक करते हैं। आगे चल कर सुरेन्द्र नाथ बनर्जी, चितरंजन दास, सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्रता आंदोलन से न केवल जुड़ते हैं बल्कि भारतीय आंदोलन की अपरिहार्यता बन जाते हैं। बंगाल ही अकेला ऐसा प्रान्त है जिसे अंग्रेजों ने 1905 में विभाजित कर दिया। इस विभाजन ने राष्ट्रीय आंदोलन को राष्ट्र व्यापी बना दिया। आजादी के समय बँटवारे का दंश भी बंगाल को भुगतना पड़ा। इस तरह स्वतंत्रता के पूर्व या स्वतंत्रता के पश्चात भारतीय राजनीति में बंगाल की एक अहम भूमिका रही है। 1940 के बाद मुस्लिम लीग ने जहां एक तरफ मुस्लिम राजनीतिक मत को संगठित करना आरंभ किया वहीं दूसरी तरफ हिन्दू महासभा ने यह सोच विकसित किया कि संख्यात्मक बहुमत पर आधारित प्रातिनिधिक लोकतंत्र हिंदुओं के राजनीतिक हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं कर सकता। आज़ादी मिलने के बाद भी धार्मिक आग्रहों का यह अलगाव बंगाल के लिए एक बड़ा मुद्दा बना रहा। इतिहास लेखन की प्रक्रिया उतनी इकहर...