बलराज पाण्डेय
अमरकान्त की कालजयी कहानियाँ बलराज पाण्डेय हिन्दी में नई कहानी (सन् 1950-1960) के अधिकतर कथाकार मध्य वर्ग से आये थे। उन्होंने अपने और अपने आस-पास के मध्यवर्गीय जीवन को जिस रूप में देखा था, उसी को अपनी कहानियों में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया था। इनमें बहुत-से ऐसे कथाकार थे जो गाँवों से आये थे। फणीश्वर नाथ रेणु, मार्कण्डेय, शिवप्रसाद सिंह, शेखर जोशी, शैलेश मटियानी की कहानियों में गाँव के जीवन्त चित्र देखे जा सकते हैं। कुछ ऐसे भी कथाकार थे जो छोटे शहरों की जिन्दगी को अपनी कहानियों में जगह दे रहे थे। इन्होंने भी गाँव में समय बिताया था। गाँव का परिवेश इनकी यादों में ताजा था। इनकी कहानियों में प्रयुक्त ग्राम जीवन के शब्दों से इनकी पहचान की जा सकती है। अमरकांत ऐसे ही कथाकार हैं, जिन्होंने रहने के लिए तो इलाहाबाद शहर चुना था, लेकिन उनकी कहानियों में किसी-न-किसी रूप में गाँव झलक मारता है। मुख्य रूप से वे शहरी मध्य वर्ग के कथाकार हैं- उस शहरी मध्य वर्ग के, जो अभाव में जिन्दगी जी रहा है। आजादी मिलने के बाद भी उसे भविष्य के लिए कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। अमरकान्त की बहुचर्चित कहानी...