कुमार अंबुज की कविताएँ
कुमार अंबुज कविता की दुनिया में कुछ कवि ऐसे हैं जिनका लिखा काफी कुछ अपना लगता है। पढ़ने गुनने का मन होता है। जो सत्ता की चाटुकारिता करता है वह भांड होता है। जो सत्ता की आलोचना करता है वह कवि होता है। कवि तो बेखौफ होता है। वह बेखौफ लिखते हुए ही अच्छा लगता है। आज के दौर में जब मीडिया के साथ साथ साहित्य भी सत्ता का पिछलग्गू बन चुका है, कुमार अंबुज बेखौफ कविताएँ लिख रहे हैं। लगातार लिख रहे हैं। आज उनका जन्मदिन है। प्रिय कवि को जन्मदिन की बधाइयाँ व ढेर सारी शुभकामनाएँ! आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं कुमार अंबुज की कविताएँ। कुमार अंबुज की कविताएँ एक ही प्रेम एक प्रेम काफ़ी है ज़िन्दा रहने के लिए एक ही प्रेम नष्ट होने के लिए पर्याप्त है एक प्रेम का दंड एक का ही वरदान कर देता है धन्य एक प्रेम की निराशा फैल जाती है दूर तक और वही थाम लेता है आशा का चिथड़ा एक प्रेम से ऊब पैदा होती है, उसी से तृप्ति एक प्रेम सूर्योदय और सूर्यास्त के लिए वही काफ़ी है रात में चाँद सितारों के वास्ते एक प्रेम की व्यग्रता हो सकती है बर्दाश्त सँभाली जा सकती है बस ...