शेखर सिंह की कविताएँ
शेखर सिंह पतंगों की अपनी एक प्यारी दुनिया हुआ करती है। अबोध बच्चों से ले कर बुजुर्गों तक में पतंगों के प्रति दीवानगी देखी जा सकती है। स्वाभाविक रूप से ये पतंगें कविताओं में भी आती हैं और कविता के आकाश को बहुरंगी बना देती हैं। पतंगों भरी आसमान यह तस्दीक करती है कि जिन्दगी हस्बेमामूल चल रही है। लेकिन पतंगों के लिए भी खतरे कम नहीं होते। पतंगें कट जाती हैं। कहीं फंस या उलझ कर चिथड़े चिथड़े हो जाती हैं लेकिन पतंग उड़ाने का उत्साह धीमा नहीं पड़ता। युवा कवि शेखर सिंह के अन्दर भी लटाई थामे पतंग उड़ाता उत्साह से भरा वह बच्चा है जो उम्मीदों से भरा हुआ है। और जब तक ये उम्मीदें हैं तब तक यह दुनिया सुरक्षित है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं शेखर सिंह की कविताएँ। शेखर सिंह की कविताएँ अन्यथा ले सकते हैं कुछ दिनों से मैं निहायत ईर्ष्यालु होता जा रहा हूँ ईर्ष्या करने लगा हूँ मोहल्ले की घरेलू महिलाओं से जिनकी चर्चा में बना रहता है इन दिनों पड़ोस का एक लड़का जो शादी नहीं करना चाहता शादी और उम्र कैद में फ़र्क़ नहीं होता जिसकी राय में जिसे कल शाम एक लड़की के साथ देखा गया एक साथ हंसते ह...