चन्द्रेश्वर का संस्मरण 'स्मृतियों में कथाकार अनंत बाबू'
अनन्त कुमार सिंह हाल ही में पटना में अनन्त कुमार सिंह पर जनवादी लेखक संघ की एक गोष्ठी हो रही थी। गोष्ठी के कई वक्ता ऐसे भी थे जो अनन्त कुमार सिंह के व्यक्तित्व और लेखन से परिचित ही नहीं थे। तब वरिष्ठ साहित्यकार जितेन्द्र कुमार ने इस बात पर अपनी चिन्ता जाहिर करते हुए कहा कि जनवादी लेखक संघ बिहार के सदस्य तक अगर अनन्त बाबू को नहीं जानते हैं तो यह दुखद है। अगर हम अपने ही लोगों को नहीं पढ़ेंगे तब साहित्य और रचना कर्म कैसे आगे बढ़ पाएगा। जब जनवादी लेखक संघ बिहार के लोग अनन्त बाबू को नहीं जानते तो बाहर के लोगों से यह अपेक्षा कैसे की जा सकती है। अनन्त जी ने 100 के आस पास कहानियां लिखी, एक उपन्यास लिखा और इसके साथ साथ सीमित संसाधनों के बावजूद आरा से 'जनपथ' जैसी महत्वपूर्ण पत्रिका का निरन्तर संपादन करते रहे। कवि चन्द्रेश्वर से भी अनन्त जी के कुछ खट्टे कुछ मीठे सम्बन्ध रहे। अपने संस्मरण में चन्द्रेश्वर ने अनन्त बाबू को बेबाकी से याद किया है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं चन्द्रेश्वर का संस्मरण 'स्मृतियों में कथाकार अनंत बाबू'। अनंत कुमार सिंह पर संस्मरण 'स्मृतियों में कथा...