सुजीत कुमार सिंह का आलेख 'लाहौर का जात-पात तोड़क मण्डल जाति-जनगणना के विरुद्ध था'
सन्तराम बी. ए. भारत में आजकल जनगणना चल रही है। जनगणना में जातीय प्रश्न को ले कर वाद विवाद की स्थिति रही है। जातीय जनगणना के पक्षधर आबादी में जातियों की सही स्थिति के आधार पर उस जाति के विकास के लिए प्रयास किए जाने के पक्षधर हैं जबकि दूसरी तरफ जातीय जनगणना के विरोधी इसे समाज को खण्डित करने वाला बता कर इसका पुरजोर विरोध करते हैं। वैसे भारत में प्रथम जातीय जनगणना 1931 में हुई। लाहौर के जात-पात तोड़क मण्डल ने जाति-जनगणना की घनघोर आलोचना करते हुए तत्कालीन जनगणना कमिश्नर डा. जे. एच. हटन को एक मेमोरियल भी भेजा था। सुजीत कुमार सिंह ने उस समय लखनऊ से प्रकाशित मासिक पत्रिका 'सुधा' के हवाले से सन्तराम बी. ए. लिखित एक टिप्पणी 'अगली मनुष्य गणना और हमारा कर्त्तव्य' खोज निकली है। भाई परमानन्द और सन्तराम बी. ए. के हस्ताक्षर से जो मेमोरियल जनगणना कमिश्नर को भेजा गया था, उसे भी अगस्त 1930 के अंक में 'समाज-सुधार' स्तम्भ में प्रकाशित किया था। इस टिप्पणी और मेमोरियल से हमें उस समय की राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं का भी ज़िक्र मिलता है। उस समय भी जात-पात तोड़क मण्डल हिन्दू ...