राजेन्द्र दानी की कहानी 'प्रेमातीत'
राजेन्द्र दानी प्रेम भी अजीब बला है। इसके बारे में यह उक्ति ख्यात है कि जो करे वह पछताए जो न करे वह भी पछताए। बहरहाल एक बार किसी से प्रेम हो जाए तो वह कम से कम स्मृतियों में ही सही आजीवन बना रहता है। पहले के जमाने में एक नैतिकता और आदर्श सब पर हावी रहा करता था और इक्का दुक्का मामलों को छोड़ कर प्रेम प्रायः असफल ही हो जाता करता था। प्रेम के बावजूद प्रेमी प्रेमिका एक मर्यादा में बंधे रहते थे और बदनाम हो जाने का एक भय हमेशा बना रहता था। अंततः ये प्रेमी प्रेमिका घर वालों की राय पसन्द से शादियाँ कर अपने अपने घर परिवार को चलाने में व्यस्त हो जाया करते और अपनी अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाते। इन सबके बावजूद कुछ प्रेम ऐसे भी होते जो दिलों में जीवनपर्यन्त बने और बचे रहते। ऐसे ही प्रेम की कहानी को बयां किया है अपनी कहानी 'प्रेमातीत' में राजेन्द्र दानी ने। अपनी इस कहानी में वे लिखते हैं 'देवयानी की देह बेहद आकर्षक थी। वह उसे भरपूर मुलायम स्पर्श से वकील को वंचित नहीं रखती थी पर अंतिम मर्यादा उसने कभी नहीं खोई और वकील भी कभी इससे आगे न बढ़े। एकांत और गोपनीयता उन्हें उस दौर में भरपूर मिली...