मुत्सुमी मियामोतो की कविताएँ, हिन्दी अनुवाद : पंकज मोहन
पंकज मोहन आज के समय में जब छल छद्म का आधिक्य है, विद्वता का निर्लज्ज प्रदर्शन है, झूठ ही जीवन पद्धति बनती जा रही है, अविश्वास इतना कि विश्वास कर पाना कठिन है, कहीं तो कोई है जिस पर यकीन किया जा सकता है। कहीं तो कोई है जो चुपचाप बिना किसी अभिलाषा के अपना काम निरन्तर किए जा रहा है। कभी बेहतर लोगों की भरमार रही होगी, लेकिन आज के समय में तो ऐसे लोग अँगुलियों पर गिने जा सकते हैं। पंकज मोहन ऐसे ही व्यक्ति हैं जिन पर भरोसा किया जा सकता है। जिनसे कुछ सीखा गुना जा सकता है। उनकी सादगी के क्या कहने। कल पंकज जी ने अपने जीवन के सत्तर वर्ष पूरे कर लिए। पहली बार की तरफ से उन्हें जन्मदिन की विलम्बित बधाई। कुछ दिन पहले उन्होंने जापानी कवयित्री मुत्सुमी मियामोतो की कविताओं का उम्दा अनुवाद किया था। आज हम पंकज जी द्वारा अनुदित कविताओं को उन्हीं की एक टिप्पणी के साथ पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। जापानी कवयित्री मुत्सुमी मियामोतो 1980 के दशक में, जब मैं सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी का छात्र था, मैंने कोरिया की कुछ प्रमुख साहित्यिक रचनाओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया। इसी कारण कोर...