आनन्द बहादुर की कहानी 'गुस्ताख'
आनन्द बहादुर जीवन में हर व्यक्ति की अपनी विशिष्ट भूमिका होती है और वह अपने तरीके से उसका निर्वहन भी करता है। उस विशिष्ट व्यक्ति की अपनी एक जगह होती है जिसे सिर्फ और सिर्फ वही भरता है। कोई और उस जगह को भर नहीं पाता। गुस्ताख़ कहानी में आनन्द बहादुर एक ऐसे पात्र को सामने ले कर आते हैं जो आवाजों की नकल हू ब हू उतारा करता है। दो मित्रों के बीच की दूरी को अपनी नकली आवाज से न केवल पाटता है बल्कि दोनों के जीवन के उन रहस्यों को भी जान लेता है जो दोनों के दिलों दिमाग में हैं। यह उन दिनों की बात है जब घरों में लैंड लाइन फोन हुआ करते थे और जिसे एक अलग अंदाज में डायल किया जाता था। अब तो स्मार्टफोन का जमाना है जिसमें ट्रू कालर कॉल करने वाले व्यक्ति के बारे में सब कुछ बता देता है। यह कहानी दो मित्रों की उस मनोस्थिति की बात करते हुए भी उस व्यक्ति की उपस्थिति को करीने से दर्ज करती है जो सिर्फ आवाजों की नकल किया करता था। आज आनन्द बहादुर का जन्म दिन है। उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं। आइए इस अवसर पर आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं आनन्द बहादुर की कहानी 'गुस्ताख'। कहानी 'गुस्ताख...