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रवि रंजन का आलेख

  बाँसुरी: रिक्तता का राग और अर्थ के विखंडन का सौंदर्यशास्त्र - रवि रंजन संरचनावाद (Structuralism) बीसवीं शताब्दी के मध्य में उभरा एक महत्त्वपूर्ण बौद्धिक आंदोलन है, जो आगे चलकर भाषाविज्ञान, मानवशास्त्र, मनोविज्ञान और साहित्यालोचन जैसे विविध क्षेत्रों में विस्तृत हुआ। इस सिद्धांत के अंतर्गत यह मान्यता केंद्र में है कि मानवीय संस्कृति, भाषा और साहित्य की सभी अभिव्यक्तियाँ कुछ अंतर्निहित संरचनाओं से निर्मित होती हैं, जो सार्वभौमिक मानसिक पैटर्न पर आधारित होती हैं। संरचनावादी आलोचना में साहित्य को एक संकेत-प्रणाली (sign system) के रूप में देखा जाता है, जहाँ अर्थ लेखक की निजी मंशा या ऐतिहासिक संदर्भ से नहीं, बल्कि संकेतों के आपसी संबंधों, विरोधों और नियमों से उत्पन्न होता है। संरचनावाद के प्रमुख विचारकों में फर्डिनेंड द सॉस्यूर (Ferdinand de Saussure), क्लोद लेवी-स्ट्रॉस (Claude Lévi-Strauss), रोलां बार्थ (Roland Barthes) और रोमन जैकोबसन (Roman Jakobson) के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। सॉस्यूर ने भाषा को एक संरचना के रूप में प्रतिष्ठित किया, लेवी-स्ट्रॉस ने इस संरचनात्मक पद्धति क...