वसुंधरा पाण्डेय की कविताएँ
वसुन्धरा पाण्डेय यह अजीब विडम्बना है कि हरेक व्यक्ति जीवन भर अपने लिए संपूर्णता की कामना करता है। लेकिन यह संपूर्णता अन्ततः एक मृगमरीचिका ही साबित होती है। तमाम प्रयास जो इस संपूर्णता के लिए किए जाते हैं, वही दरअसल वास्तविकता होते हैं। ये छोटे छोटे प्रयास ही अन्ततः उस संपूर्णता को सिरजते हैं जो उस आसमान जैसा होता है जिसका कहीं अस्तित्व ही नहीं। हकीकत यही है कि हर अधूरापन अपने आप में तमाम संभावनाएं लिए होता है जबकि संपूर्णता सारी संभावनाओं का समापन कर देती है। मनुष्य जीवन के इस अधूरेपन की कवयित्री हैं वसुन्धरा पाण्डेय। इसी दृष्टि के चलते वसुन्धरा उस गरीबी को देख पाती हैं जो उस बहुमूल्य रत्न निकालने में पूरी जिन्दगी लगे रहते हैं, लेकिन वह बहुमूल्यता उनके किसी काम की नहीं होती। दरअसल यही दृष्टि किसी भी कवि का प्राप्य होती है। आइए पहली बार पर आज हम पढ़ते हैं वसुन्धरा पाण्डेय की कविताएँ। वसुंधरा पाण्डेय की कविताएँ नन्हे हीरों का अंधकार उन नन्हें हीरे बच्चों का भविष्य कोयलों से भी काला है जिनकी सुबह स्कूल की घंटियों से नहीं फैक्ट्रियों की कर्कश आवाज़ों से खुलती है और जिनकी रात कहा...