मनीष चौरसिया की रपट "हम हरदम रहेंगे दुनिया में"
किसी भी व्यक्ति की लोकप्रियता का आंकलन करना हो तो देखना चाहिए कि उसके जीवन के उपरान्त वह लोगों की स्मृतियों में किस तरह जिंदा है। 16 जनवरी 2026 को राजेन्द्र कुमार का देहावसान हुआ। उनकी अनुपस्थिति से इलाहाबाद में वह सन्नाटा पैदा हो गया है जिसकी भरपाई सम्भव नहीं है। 8 फरवरी 2026 को राजेन्द्र कुमार की स्मृति में एक सभा का आयोजन इलाहाबाद के सभी संगठनों की तरफ से किया गया। किसी भी लेखक की स्मृति में एक साथ इतने दिग्गजों का जुटान मैने नहीं देखा। यह राजेन्द्र कुमार के व्यक्तित्व का चुम्बकीय आकर्षण था कि सब अपने प्रिय शिक्षक, कवि, आलोचक को श्रद्धांजलि देने के लिए स्वतः स्फूर्त ढंग से आए। रांची से रणेंद्र, रविभूषण, बनारस से सदानंद साही, कृष्ण मोहन सिंह, विंध्याचल यादव, देहरादून से धीरेन्द्र तिवारी, उत्तराखंड से ही शैलेय, दिल्ली से सन्ध्या नवोदिता और मृत्युञ्जय, लखनऊ से कौशल किशोर के साथ साथ इलाहाबाद से सुधांशु मालवीय, अजामिल, हरीश चन्द्र पाण्डे, अली अहमद फातमी, अजामिल, अनीता गोपेश, सन्तोष भदौरिया, प्रणय कृष्ण, लालसा यादव, विवेक निराला, बसंत त्रिपाठी, शिवानन्द मिश्र, संगम लाल, अवनीश य...