प्रचण्ड प्रवीर की कहानी 'एआई समिट'
आजकल चारों तरफ ए आई का बोलबाला है। कुछ भी जानना हो तो झट फोन उठा कर ए आई से पूछ लो। कुछ सेकेंडों या मिनटों में तमाम जानकारियां आपके सामने रख देगा। क्रिकेट खेलना हो या बच्चों को पालना हो तब भी ए आई ही बताएगा या सिखाएगा। सवाल वही है कि हम किस कदर तकनीक के गुलाम होना चाहते हैं? मोबाइल ने पहले ही बहुत कुछ वारा न्यारा कर रखा है। अब हमें अपने प्रिय जनों के मोबाइल नंबर भी याद नहीं होते। गिनती, पहाड़ा, जोड़, घटाना सबके लिए मोबाइल। यानी अब बच्चों को पहाड़ा रटने की कोई जरूरत नहीं। कहीं जाना हो तो गूगल मैप लगा लो। राहगीर बन कर पूछने का काम कौन करेगा? यानी सब कुछ खत्म सा होता जा रहा है। तो क्या ए आई मानवीय संवेदना या भावनाओं की जगह ले सकेगा? कत्तई नहीं। फिर हम ए आई को इतना महत्त्व क्यों दे रहे हैं। तकनीक की हमारे जीवन में कहीं इतनी अधिक दखलंदाजी न बढ़ जाए कि वापस लौट पाने की राह भी न बचे। आजकल नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन हो रहा है जिसमें दुनिया के सौ से अधिक देश हिस्सेदारी कर रहे हैं। प्रचण्ड प्रवीर भी इस समिट में गए थे। इस विषय पर कल क...