पाब्लो नेरूदा की कविता '7 नवम्बर: जीतों के दिन की शान में गीत'
पाब्लो नेरूदा अक्टूबर क्रांति को बोल्शेविक क्रांति भी कहा जाता है। इस क्रान्ति ने दुनिया भर के कवियों, लेखकों और बुद्धिजीवियों को गहरे तौर पर प्रभावित किया। ग्रिगेरियन कैलेंडर के अनुसार इस समय नवम्बर की तारीख थी। जबकि रूसी कैलेंडर के अनुसार यह अक्टूबर का महीना था। कालजयी कवि पाब्लो नेरूदा ने इस घटना पर कविता लिखी और इसे दोहरी वर्षगाँठ बताया। दोहरी वर्षगाँठ बतलाये जाने का कारण यह है कि सोवियत समाजवादी क्रान्ति दिवस होने के साथ ही, इसी दिन मैड्रिड के द्वार से तानाशाह फ्रांको की राष्ट्रवादी सेना को (अस्थाई तौर पर) पीछे लौटने को बाध्य कर दिया गया था। यह कविता नेरूदा ने 1941 में लिखी थी, जब अक्टूबर क्रान्ति की 24वीं वर्षगाँठ और स्पेनी गणराज्य की उपरोक्त विजय की पाँचवीं वर्षगाँठ थी। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं पाब्लो नेरूदा की कविता '7 नवम्बर: जीतों के दिन की शान में गीत'। '7 नवम्बर: जीतों के दिन की शान में गीत' पाब्लो नेरूदा यह दोहरी वर्षगाँठ*, यह दिन, यह रात, क्या वे पायेंगे एक खाली-खाली सी दुनिया, क्या उन्हें मिलेगी उदास दिलों की एक बेढब सी घाटी? नही...