शैलेंद्र चौहान की कविताएं
शैलेन्द्र चौहान कभी किसी ख्यात व्यक्ति का उद्धरण पढ़ रहा था कि किसी व्यक्ति को खत्म करना हो तो उसे अकेला यानी मित्रहीन कर दो। मित्र बनाना किसी भी व्यक्ति का सहज स्वभाव होता है। इससे न केवल विचारों का आदान प्रदान होता है बल्कि आगे के जीवन के लिए उम्मीद भी बंधती है। कवि ऋतुराज जी का 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। कवि के अलावा वे एक बेहतरीन मनुष्य भी थे। कवि सम्पादक शैलेन्द्र चौहान के साथ उनके बेहतर सम्बन्ध थे। शैलेन्द्र जी ने ऋतुराज जी को याद करते हुए कुछ मर्मस्पर्शी कविताएं लिखी हैं। बकौल शैलेन्द्र चौहान 'ये सभी कविताएं बीते कुछ समय में ऋतुराज जी से हुए संवाद से प्रसूत हैं।' ऋतुराज जी की स्मृति को हम नमन करते हैं। आइए आज प हली बार पर हम पढ़ते हैं शैलेंद्र चौहान की कविताएं। शैलेंद्र चौहान की कविताएं परकोटे के भीतर गुलाबी शहर और ऋतुराज जी का साथ जब रहता था तिलक नगर में तो एम.आई. रोड सिर्फ़ एक सड़क नहीं थी वह शहर में प्रवेश का संसार थी जहाँ धूप भी गुलाबी हो कर गिरती थी और इमारतें अपने भीतर इतिहास सँभाले खड़ी रहती थीं किशन पोल, चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया, छोटी चौपड़, ज...