स्वप्निल श्रीवास्तव का संस्मरण 'गोरखपुर; मेरा बंदरगाह'
स्वप्निल श्रीवास्तव हरेक शहर अपने आप में विशिष्ट होता है। और अगर उस शहर से बचपन या फिर छात्र जीवन की स्मृतियाँ जुड़ी हों तब वह जीवन से कुछ इस तरह जुड़ जाता है कि उसे अलग कर खुद को देख पाना दुष्कर हो जाता है। कवि स्वप्निल श्रीवास्तव ने गोरखपुर में अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। बाद में वे इस शहर में नौकरी के दौरान भी कार्यरत रहे। पूर्वांचल में गोरखपुर का अपना खास स्थान रहा है। स्वप्निल श्रीवास्तव का आज जन्मदिन है। जन्मदिन पर उन्हें बधाई एवम शुभकामनाएं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं स्वप्निल श्रीवास्तव का संस्मरण 'गोरखपुर; मेरा बंदरगाह'। ' गोरखपुर; मेरा बंदरगाह' स्वप्निल श्रीवास्तव इस आलेख का शीर्षक पढ़ कर कोई कह सकता है कि गोरखपुर बंदरगाह कैसे हो सकता है। इस शहर के आसपास कोई समुन्दर नहीं है। लोगों की शिकायत सही है, हम बहुत सी बाते रूपको और प्रतीकों के माध्यम से कहते हैं और उसके भिन्न अर्थ निकलते हैं। जरा सोचिये कि बंदरगाह की क्या उपयोगिता है। जब पानी की जहाजे लंबी यात्रा में थक जाती थी उन्हें विश्राम आराम की जरूरत पड़ती है – वहाँ वे अपना ईधन भरत...