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शैलेंद्र चौहान की कविताएं

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शैलेन्द्र चौहान  कभी किसी ख्यात व्यक्ति का उद्धरण पढ़ रहा था कि किसी व्यक्ति को खत्म करना हो तो उसे अकेला यानी मित्रहीन कर दो। मित्र बनाना किसी भी व्यक्ति का सहज स्वभाव होता है। इससे न केवल विचारों का आदान प्रदान होता है बल्कि आगे के जीवन के लिए उम्मीद भी बंधती है। कवि ऋतुराज जी का 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। कवि के अलावा वे एक बेहतरीन मनुष्य भी थे। कवि सम्पादक शैलेन्द्र चौहान के साथ उनके बेहतर सम्बन्ध थे। शैलेन्द्र जी ने ऋतुराज जी को याद करते हुए कुछ मर्मस्पर्शी कविताएं लिखी हैं। बकौल शैलेन्द्र चौहान 'ये सभी कविताएं बीते कुछ समय में ऋतुराज जी से हुए संवाद से प्रसूत हैं।' ऋतुराज जी की स्मृति को हम नमन करते हैं। आइए आज प हली बार पर हम पढ़ते हैं  शैलेंद्र चौहान की कविताएं। शैलेंद्र चौहान की कविताएं  परकोटे के भीतर गुलाबी शहर और ऋतुराज जी का साथ जब रहता था तिलक नगर में तो एम.आई. रोड सिर्फ़ एक सड़क नहीं थी वह शहर में प्रवेश का संसार थी जहाँ धूप भी गुलाबी हो कर गिरती थी और इमारतें अपने भीतर इतिहास सँभाले खड़ी रहती थीं किशन पोल, चौड़ा रास्ता, त्रिपोलिया, छोटी चौपड़, ज...

शीतेन्द्र नाथ चौधुरी कहानी 'पट्टा'

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शीतेन्द्र नाथ चौधुरी संक्षिप्त परिचय : शीतेन्द्र नाथ चौधुरी जन्म : 10 जून 1943 रचनाएं : दो कहानी संग्रह - हाते से बाहर (1986), छत्ता (2008) संस्मरण - अतीत के झरोखे से (बांग्लादेश और भारत) -2025 अनुवाद (अंग्रेजी से) : दो पहल पुस्तिकाएं- 1- उन्नत सभ्यताओं में कला और साहित्य का विद्रोह, लेखक- लूसिये गोल्डमान  2- विवेकानंद के सामाजिक और राजनीतिक विचार, लेखक- बिनय कुमार राय 3- आवनर जिस की किताब का अध्याय-: रूप और वस्तु की द्वंद्वात्मकता 4- एलेन सकाल और ज्याँ ब्रिकमंट की पुस्तक "फैशनेबल नॉनसेंस"/ इम्पोस्टर्स इनटेलेक्चुअल्स" का "ठग बुद्धिजीवी" शीर्षक से अनुवाद,  महान वैज्ञानिक स्टीफेन हॉकिंग की आखिरी किताब "Brief Answers To The Big Questions" का अनुवाद (पांडुलिपि तैयार है) साथ ही दो फिलीस्तीनी कहानियों का अंग्रेजी से अनुवाद जो अफ्रो-एशियाई लेखक संघ के लिए पहल द्वारा प्रकाशित, दो लम्बी बांग्ला कहानियों का हिन्दी में अनुवाद. इसके अलावा "हिग्स बोसन का ईश्वरीकरण", "वैज्ञानिक नज़रिया", "बंगाल की बाऊल संस्कृति", "बंगाल के लोकगीत...

विहाग वैभव के कविता संग्रह पर शैलेन्द्र कुमार शुक्ल की समीक्षा 'हिंसा की शिनाख़्त करती बेबाक कविता का विकल कवि: विहाग वैभव'

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यह देश किन लोगों का है? क्या कुर्सी पर बैठे हुए उन नेताओं का है जिनके लिए झूठ ही सच और सच ही झूठ बन जाता है। क्या यह देश उन नौकरशाहों का है जो अपने छल छद्म से नौकर की बजाय मालिक जैसा आचरण करने लगते हैं। क्या यह देश उन दलालों और ठेकेदारों का है जो अपनी पुश्त दर पुश्त के लिए सारा धन अपने पास कर लेना चाहते हैं। यह देश उन निश्छल किसानों और कामगारों का है जिनके पास यकीन है कि यह देश उनका है और तीन पाँच करने वालों से डरने की कोई जरूरत नहीं। अ रसा पहले कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने एक कविता लिखी थी 'देश काग़ज़ पर बना नक्शा नहीं होता'। इस कविता में वे लिखते हैं : "इस दुनिया में आदमी की जान से बड़ा/ कुछ भी नहीं है/ न ईश्वर/ न ज्ञान/ न चुनाव/ कागज पर लिखी कोई भी इबारत/ फाड़ी जा सकती है/ और जमीन की सात परतों के भीतर/ गाड़ी जा सकती है।" और अन्त में वे लिखते हैं : "किसी हत्यारे को  कभी मत करो माफ/ चाहे हो वह तुम्हारा यार/ धर्म का ठेकेदार,/ चाहे लोकतंत्र का/ स्वनामधन्य पहरेदार।" विहाग वैभव की कविता उस कड़ी को आगे बढ़ाती है। उनकी कविता में न तो कोई प्रशस्ति गान मिलेगा न ही क...