अवन्तिका राय की लघु कथाएं
अवन्तिका राय रोजी रोटी के लिए विस्थापन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड के लोगों की जैसे उनकी नियति ही है। इन लोगों को समवेत रूप में बिहारी कहा जाता है। जैसे बिहारी होना अपराध हो। आमतौर पर उनके बारे में उनके इलाके के लोगों की राय होती है कि वह खुशकिस्मत है। दूसरी जगह जा कर अच्छे से कमा खा रहा है। लेकिन उसकी दिक्कतें क्या हैं, कैसी हैं, इससे भला किसी को क्या लेना देना? तमाम संसाधन होने के बावजूद उत्तर भारत के ये राज्य पिछड़े होने के लिए अभिशप्त हैं। यहां के जनप्रतिनिधि तमाम तरह से जनता को भरमा कर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब में अक्सर इन लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है लेकिन ये लोग जैसे जहर पी कर अपना जीवन बिताने के अभ्यस्त हो जाते हैं। अवन्तिका राय अपनी लघु कथा पन्द्रह अगस्त में इस पीड़ा की एक बानगी करीने से व्यक्त करते हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं अवन्तिका राय की लघु कथाएं। अवन्तिका राय की लघु कथाएं कहानी सांढ़ और बंदरों की एक सांढ़ मन्थर गति से चलते हुए जंगल में विचरण कर रहा था। जैसा कि दिखता ही है, उसका अंडक...