रणविजय सिंह सत्यकेतु की कविताएँ
रणविजय सिंह सत्यकेतु सभ्यताएं एक दिन में नहीं बनती। उन्हें बनने संवरने में शताब्दियां लग जाती हैं। ऐसा भी होता है कि एक ही समय में विभिन्न सभ्यताएं आपस में श्रेष्ठता के लिए संघर्ष करती रहती हैं। परमाणु हथियारों की खोज के बाद दुनिया में शक्ति के समीकरण बदल गए हैं। संयुक्त राज्य अमरीका वर्चस्व की होड़ में खुद को श्रेष्ठ तो मानता ही है साथ ही यह भी दर्शाना चाहता है कि वह दुनिया की एकमात्र महाशक्ति है। इसी क्रम में ईरान उसके निशाने पर आया। लेकिन अमेरिका यह भूल गया कि ईरान वेनेजुएला जैसा देश नहीं है। फारस की सभ्यता दुनिया की पुरानी सभ्यताओं में से एक है। प्रतिरोध की परंपरा वहां की जड़ों में है। ईरान के प्रतिरोध की परंपरा ने संयुक्त राज्य अमेरिका के अहंकार को दरका दिया है। अपनी एक कविता में रणविजय सिंह सत्यकेतु लिखते हैं : 'एक सतत सभ्यता/ किसी असभ्य अभियान से मात नहीं खाती/ श्रमशील, प्रतिबद्ध और कर्मठ आबादी को मिटाने वाले/ मतिछिन्न मंसूबों को कामयाब नहीं होने देती/ ईमान को ऊंचा रखने वाली जनता ने सिखाया/ दमदार संस्कृति हमेशा इतिहास रचती है/ विखंडित भूगोल के मायने बदल देती है/ ठोस इ...