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वसंत सकरगाए की कविताएँ

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  वसंत सकरगाए   दो पैरों पर चलने के अभ्यास ने मनुष्य के हाथों को न केवल मुक्त किया बल्कि उसे कुछ अभिनव प्रयोग करने के लिए भी सहूलियत प्रदान की। पहिए की खोज ने तकनीकी नजरिए से मानव के जीवन को क्रांतिकारी मोड़ प्रदान कर दिया। पहिए की खोज से मानव श्रम में काफी बचत हुई। पहिए की खोज के बावजूद मनुष्य अनवरत धरती को पैदल नापता रहा। इस क्रम में कई महाद्वीपों , द्वीपों , देशों , पहाड़ों , पठारों , नदियों की खोज होती गयी। समय के साथ पहिए की भूमिका बढ़ती गयी इसके बावजूद यह मनुष्य के पाँव थे , जो एक बार चल दिए तो फिर थके थमें नहीं। वैज्ञानिक उपलब्धियों ने मनुष्य की पहिए पर निर्भरता बढ़ा दी। आज आलम यह है कि मनुष्य थोड़ा बहुत टहलता है तो डॉक्टर की सलाह पर। हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर के समय जब पहिए थम गए तब मजदूरों ने अपने पाँवों पर यकीन किया। वसंत सकरगाए हमारे समय के महत्त्वपूर्ण कवि हैं। अपनी कविता ' पैदल चलता हुआ आदमी ' में इसको शिद्