हर्ष पाठक की रपट 'पाठकों को गहरे मानवीय बोध से जोड़ती हैं संजीव कौशल की कविताएँ'
संजीव कौशल इलाहाबाद साहित्यिक रूप से एक जागरूक शहर रहा है। एक समय में तो इसे साहित्य की राजधानी तक कहा जाता था। हर दिन कोई न कोई गोष्ठी, विचार विमर्श, राष्ट्रीय संगोष्ठी, नाट्य आयोजन, कवि सम्मेलन यहां की परम्परा रही है। हिंदुस्तानी अकादमी, राष्ट्रीय संग्रहालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसी जगहों पर यह आयोजन लगातार होते रहते थे। इन सरकारी संस्थाओं में खुली गोष्ठियों की परंपरा अब लगभग समाप्त हो चुकी है। ऐसे में व्यक्तिगत प्रयासों के द्वारा बाल भारती स्कूल, एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज, गांधी संस्थान, रूहे अंजुमन जैसी जगहों पर अब ये आयोजन किए जाते हैं। घर गोष्ठी ऐसे आयोजनों की रीढ़ रही है जहां पर रचनाओं पर स्वस्थ बहस की एक संस्कृति विकसित हुई। जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संगठन के द्वारा यह रचनात्मक सक्रियता लगातार जारी है। जनवादी लेखक संघ के वर्तमान सचिव बसंत त्रिपाठी ने जनवादी लेखक संघ की सक्रियता को फिर एक नया आयाम दिया है। हाल ही में जनवादी लेखक संघ ने युवा कवि संजीव कौशल के कविता पाठ और उन पर बातचीत का आयोजन 4 मई 2026 को बाल भारती स्कूल में किया। संजीव...