शैलजा की लम्बी कविता 'ऐसे कौन नाराज होता है'
शैलजा दुनिया का शायद ही कोई कवि होगा जिसने माँ पर कविताएँ न लिखी हों। दुनिया का सबसे अप्रतिम रिश्ता होता है माँ और उसकी सन्तान का। यह अकथनीय होता है। भारतीय परम्परा में यह मान्यता है कि स्त्री सन्तान को जन्म देने के बाद ही स्त्रीत्व को पूर्ण करती है। माँ स्वाभाविक रूप से अपनी सन्तान के लिए आजीवन चिन्तित और परेशान रहती है और उसके बेहतर जीवन के लिए प्रयास करती रहती है। लेकिन एक दिन आता है जब माँ इस दुनिया से रुखसत कर जाती है। माँ की छत्र छाया के हटने से सन्तानों की दुनिया जैसे अधूरी हो जाती है। यह इसलिए भी कि माँ की जगह इस दुनिया में कोई ले ही नहीं सकता। शैलजा हमारे समय की समर्थ कवयित्री हैं। अपनी लम्बी कविता में उन्होंने माँ को शिद्दत से याद किया है। इस कविता को पढ़ते हुए वे तमाम स्मृतियां एकबारगी जैसे जीवन्त हो उठती हैं जो माँ के रहते हुए जी गई थीं। माँ की डांट फटकार, माँ का स्नेह और प्यार दुलार, पिता के साथ उनकी नोक झोंक सब एक एक कर याद आते हैं। इस रिश्ते में कोई औपचारिकता नहीं बल्कि अनौपचारिकता होती है। यह कविता इस अनौपचारिकता की ही दास्ताँ है। भावनात्मक अहसासों को शब्दबद्ध करना आसान...