अवन्तिका प्रसाद राय की कहानी 'युद्ध के बीच'
अवन्तिका प्रसाद राय युद्ध कुछ खब्ती लोगों की खुराफातों का परिणाम होता है। आम आदमी का इन युद्धों से कोई लेना देना नहीं होता। वह शान्ति और सुकून चाहता है। वह अपने घर परिवार के बीच प्यार से रहना चाहता है। बच्चे किसी भी घर को गुलजार कर देते हैं। इन निश्छल बच्चों का भला जंग से क्या वास्ता। लेकिन जंग का वास्ता तो केवल और केवल नष्ट करने से होता है। क्या बड़े, क्या बच्चे सभी उसके लिए शिकार भर होते हैं। अमरीका ईरान जंग में एक मिसाइल बच्चों के स्कूल पर गिरी जिसमें तकरीबन 180 बच्चे मारे गए। इस घटना की वैश्विक स्तर पर व्यापक निन्दा की गई। एक तकनीकी कॉलेज पर इजरायल की मिसाइल गिरी जिसमें तमाम निर्दोष बच्चे मारे गए। ये बच्चे किसी मां पिता के सपने होते हैं। ये बच्चे किसी भी राष्ट्र के भविष्य होते हैं। लेकिन जंग तो हमेशा मर्यादाओं के खिलाफ ही होता है। महाभारत युद्ध में किशोर अभिमन्यु को महारथियों द्वारा मिल कर मारे जाने का सन्दर्भ मिलता है। अवन्तिका प्रसाद राय की कहानी को जंग के इस परिप्रेक्ष्य में पढ़ा जाना चाहिए। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं अवन्तिका प्रसाद राय की कहानी 'युद्ध के बीच'। ...