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परिचय दास का श्रद्धांजलि आलेख 'फिल्म गायिका : सुमन कल्याणपुर'

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सुमन कल्याणपुर  संगीत अपने आप में एक साधना है। रियाज इसका मुख्य हिस्सा होता है। जो इसे साध लेता है वह संगीत की ऊँचाइयों तक पहुँच जाता है। यह ऊँचाई बिरले ही प्राप्त कर पाते हैं। सुमन कल्याणपुर ऐसे ही गायिकाओं में शुमार की जाती हैं जिनका स्वर अनायास ही श्रोताओं को अपनी तरफ आकृष्ट कर लेता था। उनके समय में तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी जो आवाज को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सके। परिचय दास लिखते हैं 'तब गायकी संवेदना का अपना अनुशासन हुआ करता था। उन्होंने इस अनुशासन को पूरी ईमानदारी से निभाया। शायद इसीलिए उनके गीतों में एक आंतरिक संतुलन दिखाई देता है—जो आज के असंतुलित, जल्दबाज़ संगीत में कम ही मिलता है।' 31 मई 2026 को सुमन कल्याणपुर का मुम्बई में निधन हो गया। उन्हें सादर नमन। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं परिचय दास का महत्त्वपूर्ण आलेख 'फिल्म गायिका : सुमन कल्याणपुर'। श्रद्धांजलि   'फिल्म गायिका : सुमन कल्याणपुर' परिचय दास  1 विरलता की उजली गूँज : सुमन कल्याणपुर सुमन कल्याणपुर का स्मरण किसी गीत को याद करने जैसा नहीं है; वह किसी बहुत पुरानी, बहुत आत्मीय अनुभूति के लौट आने ...

मेहजबीं की कविताएँ

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मेहजबीं किसी को देख कर यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि उसके मन मस्तिष्क में क्या चल रहा है। आज का समय और भी जटिल है तो स्वाभाविक रूप से मनुष्य का शातिरपना और भी बढ़ा है। उसका चरित्र दोहरा हो गया है। कहा जा सकता है कि वह सोचता कुछ और है करता कुछ और ही है। उसमें बड़बोलापन ज्यादा है। सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक कोई भी क्षेत्र इस दोहरेपन से बचा नहीं है। मेहजबीं इसे शिद्दत से महसूस करती हैं और अपनी कविता में इसे कुछ यूं दर्ज करती हैं : 'एक सदी से तुम क़त्लोग़ारत का ख़ाब देखते हो/ तहरीर तुम्हारी युद्ध विरोधी है/ अंदर ही अंदर कितनी शिद्दत से नफ़रत करते हो/ मेरे मुनाफिक दोस्त/ मंच पर चढ़ कर तुम भाईचारे की बात करते हो/ कितनी अच्छी तरह से झूठ बोलते हो/ जब-जब अभिनय करते हो धर्मनिरपेक्ष होने का/ बात करते हो लोकतंत्र संविधान की/ सचमुच कितनी तक़लीफ़ देते हो अपने आप को/ तुम्हारा कारोबार चलता रहे/ दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की होती रहे/ कितनी सफाई से शब्दों का भाषा का व्याकरण का इस्तेमाल करते हो/ मेरे मुनाफिक दोस्त/ कितनी अच्छी तरह से तुम सब मैनेज कर लेते हो'। युवा कवयित्री ...