प्रचण्ड प्रवीर की कहानी 'मुझको तुम जो मिले ये जहान मिल गया'
बौद्धिकता और प्रगतिशीलता के साथ साथ तन्त्र मन्त्र भी भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। हालांकि इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता लेकिन प्राचीन काल में जब मनुष्य प्राकृतिक प्रकोपों से परिचित नहीं था तो उसने भय से उबरने के लिए जादू टोने और तन्त्र मन्त्र का सहारा लिया। अथर्ववेद में इनका पर्याप्त वर्णन मिलता है। हालांकि आधुनिक वैज्ञानिक युग में इन अंधविश्वासों का कोई मतलब नहीं फिर भी एक पद्धति के रूप में आज भी यह चलन में है। प्रचण्ड प्रवीर ने अपनी कहानी में इनके हवाले से जो बात की है वह महत्वपूर्ण है। साधक यह जो सोचता है कि उसे किसी बात का डर ही नहीं है वही साधना के अन्त में गेहूंवन सांप को देख कर उछल कर दूर भाग जाता है। और अन्ततः भागने के इस क्रम में ही उसे उसका जहान मिल जाता है। इस जहान का मिलना ही जीवन का प्राप्य है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं 'कल की बात' के अन्तर्गत प्रचण्ड प्रवीर की कहानी 'मुझको तुम जो मिले ये जहान मिल गया'। कल की बात – 289 'मुझको तुम जो मिले ये जहान मिल गया' प्रचण्ड प्रवीर कल की बात है। जैसे ही मैँने बैठक मेँ कदम रखा, मेरी नजर ए...