कवयित्री सपना भट्ट के कविता संग्रह 'भाषा में नहीं' की आनन्द गुप्ता द्वारा की गई समीक्षा
पितृसत्ता एक अरसे से स्त्री को हमेशा अपने दायरे में समेटने की कोशिश करती रही है और इसी क्रम में महिलाओं पर तमाम तरह के प्रतिबन्ध भी आयद करती रहती है। लेकिन आज की स्त्रियां अपने हितों के प्रति जागरूक और अधिकारों के प्रति सचेत हैं। वे पितृ सत्ता के समक्ष गम्भीर चुनौतियां प्रस्तुत करने लगी हैं। वे अपना जीवन अपने उसूलों पर जीने की तमन्नाएं लिए खुद को अभिव्यक्त कर रही हैं और अपनी मुक्ति के सपने संजोए हुए हैं। सपना भट्ट एक चर्चित कवयित्री हैं जिनका हाल ही में दूसरा कविता संग्रह 'भाषा में नहीं' सेतु प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह की समीक्षा की है कवि आनन्द गुप्ता ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं सपना भट्ट के कविता संग्रह 'भाषा में नहीं' की आनन्द गुप्ता द्वारा की गई समीक्षा पितृ सत्ता को चुनौती देती सपना भट्ट की कविताएँ। समीक्षा पितृसत्ता को चुनौती देती सपना भट्ट की कविताएं आनन्द गुप्ता युवा कवयित्री सपना भट्ट उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पहाड़ी गांव में रहती हैं। पहाड़ी जीवन का अपना अलग संघर्ष है। वहां का हर दिन चुनौतियों से भरा होता है। पर्यटन के लिए दो-चार दिन पह...