जितेन्द्र विसारिया का आलेख 'पद्मविभूषण तीजन बाई और उनकी पंडवानी स्वर साधना'
तीजन बाई कल 5 जुलाई 2026 को प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का सत्तर वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका जाना भारतीय सांस्कृतिक जगत के लिए यह ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है। एक अत्यन्त सामान्य घर परिवार में जन्म लेने वाली तीजन बाई ने अपने जिद और जुनून से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो ख्याति दिलाई वह अविश्वसनीय लगती है। यही नहीं इस राह में उनके घर परिवार के पुरुषों ने जो रोड़े बिछाए, उसका भी तीजन ने कड़ा प्रतिवाद किया। इस क्रम में तीजन ने सब कुछ छोड़ दिया जो उनकी पंडवानी के आड़े आती। पढ़ाई से उनका कभी वास्ता नहीं रहा लेकिन अपनी साधना से उन्होंने इस कमी को काफी पीछे छोड़ दिया। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भिलाई स्टील प्लांट ने उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी प्रदान कर दिया। ख्याति अर्जित करने के बावजूद वे अपने संस्थान में अपना काम करते कभी हिचकती नहीं थीं। तीजन बाई की स्मृति को हम नमन करते हुए उन पर विशेष आलेख प्रस्तुत कर रहे हैं। इस कड़ी में आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं जितेन्द्र विसारिया का आलेख 'पद्मविभूषण तीजन बाई और उनकी पंडवानी स्वर साधना...