श्री नरेश मेहता के खण्डकाव्य 'महाप्रस्थान' की भूमिका
श्री नरेश मेहता दूसरे सप्तक के कवि श्री नरेश मेहता की ख्याति ऐसे रचनाकारों में है जो भारतीय संस्कृति, परम्परा और मिथकों के हवाले से भारतीयता की बात करते हैं। संस्कृतनिष्ठ हिन्दी में लिखने वाले कवि नरेश जी का गद्य अनुभवजनित होने के नाते बेजोड़ है। युवा कवि आशुतोष प्रसिद्ध गंभीर अध्येता हैं। हाल ही में अपनी फेसबुक वॉल पर उन्होंने यह टिप्पणी की थी " श्री नरेश मेहता के खण्डकाव्य 'महाप्रस्थान' की भूमिका कई कई बार पढ़ी जानी चाहिए। विवेचना, विचार, शब्द-शिल्प, इतिहास, ऐतिहासिक, संस्कृति, परम्परा, शैथिल्य में चलने की गरिमा और यह जानने के लिए की कला का और गद्य का उत्कर्ष कैसा हो सकता है।" आशुतोष से जब पहली बार के लिए यह उपलब्ध कराने का जिक्र किया तो उन्होंने भूमिका उपलब्ध कराने का श्रमसाध्य कार्य त्वरित गति से किया। इसके लिए हम आशुतोष के आभारी हैं। भारतीय मिथकीय परम्परा और जीवन दृष्टि को जानने के लिए नरेश जी का यह आलेख इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए कि आज सन्दर्भों को विकृत कर प्रस्तुत करने का सिलसिला चल पड़ा है। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं श्री नरेश मेहता के खण्डकाव्य 'म...