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लकी राजीव की कहानी 'पारोमिता'

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लकी राजीव प्रेम मनुष्य के अंतरतम की गहन अनुभूति है। यह किसी भी तरह के बन्धन को स्वीकार करने से इनकार कर देता है। जाति, धर्म हो या उम्र प्रेम के लिए ये कभी सीमाएँ नहीं बना पाते। लकी राजीव की कहानी 'पारोमिता' में यह प्रेम नायक को सहज ही कुछ इस तरह अपने आगोश में ले लेता है कि वह पारोमिता को अपने नजदीक महसूस करने लगता है। लेकिन उसकी उम्र उसे इस राह में आगे बढ़ने से रोकती है। इस कहानी में वह सहज प्रवाह है जो पाठकों को लगातार बाँधे रखता है। यह कहानी 'अन्विति' के कहानी विशेषांक से साभार ली गई है और लेखिका को 'सविता कथा सम्मान 2027' के लिए चुना गया है। लेखिका को पहली बार की तरफ से बधाई एवम शुभकामनाएं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं लकी राजीव की कहानी 'पारोमिता'। 'पारोमिता' लकी राजीव आज तीसरे दिन भी काम वाली बाई ने सुबह सुबह फ़ोन करके बता दिया था,  "अभी भी फीवर है मेरे को, एडजश करो न आज भी साहब"। एक ये क्रिया 'एडजस्ट' मुझे बहुत अच्छी तरह आती है, इसीलिए अक्सर मुझसे करवा भी‌ ली जाती है। मैंने घड़ी देखी, आठ बज कर पांच मिनट..। डेढ़ घंटे में...

शैलेंद्र चौहान की कविताएं

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शैलेन्द्र चौहान  जल ने ही जीवन को एक रूप दिया। हवा और धूप ने बाद में उसकी परिभाषा गढ़ी। कहा जाता है कि नदी में एक बार प्रवाहित पानी दुबारा प्रवाहित नहीं होता। ठीक उसी तरह बकौल शैलेन्द्र चौहान 'मनुष्य एक ही देह में बार-बार जन्म लेता है'। हर रोज वह एक नई शुरुआत करता है और रात की नींद में अगले दिन के सपने बुनता है। यह जल अद्भुत है। जितना सहज दिखता है उतना होता नहीं। जटिल हो कर भी पृथिवी पर सहजता से सर्वत्र उपलब्ध है। लेकिन पृथिवी से इतर आज तक हमें पानी की एक भी बूँद नहीं मिली है। अलग बात है कि हम पानी खोजने के लिए लगातार प्रयत्नशील हैं। पानी  की महत्ता तब समझ आती है जब जल मिलता ही नहीं। रहीम दास लिखते हैं 'बिन पानी सब सून'। जल के बिना प्यास नहीं बुझती। आंखों का पानी सही मायनों में हमें मनुष्य बनाता है इसीलिए उसे बचाए रखने की कोशिश मनुष्य लगातार करता है। शैलेन्द्र चौहान ने जल पर कुछ कमाल की कविताएं लिखी हैं। जल को जानने समझने के लिए जरूर इसे पढ़ा जाना चाहिए। अपनी एक कविता में वे लिखते हैं 'जल ने ही सिखाया/ ऊपर दिखाई देना बचा रहना नहीं होता/ और नीचे चले जाना हमेशा हार जा...

कैलाश बनवासी की कहानी 'मथुरा प्रसाद उर्फ़ राहत का एक नाम'

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कैलाश बनवासी मनुष्य सब कुछ महज अपने फायदे के लिए नहीं करता। समय और समाज के लिए जो भी जरूरी समझता है, वह उसे करने का प्रयास करता है। लेकिन आज के भौतिकवादी समय में सभी चीजों को फायदे की तुला पर तौल कर देखा जाने लगा है। हमारा समाज जो लिखने पढ़ने से वैसे भी विरक्त रहा है, साहित्य को अजीब नजरिए से देखता है। लोग सवाल पूछते हैं 'कविता कहानी लिखने से क्या मिलता है'? उन्हें नहीं पता कि यह साहित्य स्वतः स्फूर्त ढंग से उपजता है। रचनाकार एक सामाजिक जिम्मेदारी के तहत इस दायित्व को निभाता है। वह इसे नफे नुकसान की तुला पर तौलने के बारे में सोचता ही नहीं। दुनिया को बदलने में इन रचनाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। कहा जाता है कि रूसो का साहित्य हर फ्रांसीसी क्रांतिकारी अपने सिरहाने रखता था। मांटेस्क्यू के विचारों ने निरंकुशता की जकड़बंदी को तोड़े में प्रमुख भूमिका निभाई। वाल्टेयर के व्यंग्य ने लोगों को अन्दर से झकझोर दिया। हमारे यहां वन्देमातरम में जाने कितने क्रांतिकारियों को देश के लिए कुर्बान होने की प्रेरणा प्रदान की। अपनी फांसी से पहले भगत सिंह लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे। कार्ल मार्क्स क...