ललन चतुर्वेदी का व्यंग्य आलेख 'प्रेम सत्याग्रह की विषयवस्तु है'
ललन चतुर्वेदी किसी भी पुरुष के लिए जीवन का सुखद क्षण होता है उसका प्रेम में पड़ जाना। लेकिन जो परंपरावादी हैं उनके लिए तो यह प्रेम सारी व्यवस्था को तहस नहस करने वाला होता है। इसलिए प्रेम पर पहरे बिठा दिए जाते हैं। लेकिन प्रेमी भी कम जिद्दी नहीं होते। वे हर रास्ते की काट निकाल लेते हैं और प्रेम की पींगे मारते रहते हैं। कवि ललन चतुर्वेदी अपने व्यंग्य आलेख में लिखते हैं : 'प्रेम कोई हँसी-मजाक या दिल्लगी का विषय नहीं है- यह दिल लगाने का पुनीत काम है। प्रेम और प्यार में थोड़ा-बहुत या यूँ कहें कि मार्जिनल अंतर हो सकता है लेकिन मेरी दृष्टि से दोनों एक ही हैं। कुछ लोग कहते हैं कि प्यार किया नहीं जाता हो जाता है। बहुधा ऐसा होता नहीं है। सब कुछ चरणबद्ध तरीके से होता है। मान लीजिए कोई बहुमंजिली इमारत हो और लिफ्ट की व्यवस्था नहीं हो तो सीढ़ियों से ही आप ऊपरी मंजिल तक पहुँच सकते हैं। प्रेम में स्टेप-बाय-स्टेप बढ़ना होता है।' आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं ललन चतुर्वेदी का व्यंग्य आलेख 'प्रेम सत्याग्रह की विषयवस्तु है'। व्यंग्य 'प्रेम स...