राकेश कुमार गुप्त का आलेख “सबसे बड़ा जो साहसिक कार्य हम कर सकते हैं, वह है अपने सपनों को जीना।”
राकेश कुमार गुप्त सभी प्राणियों से मनुष्य इसलिए भी अलग है कि वह सपने देखता है। इन सपनों का वह विश्लेषण करता है और फिर इन्हें यथार्थ में ढालने की कोशिश करता है। सपने हमारी कल्पनाशीलता के पंख होते हैं। ये सपने हमारी प्रतिरोधी चेतना के वाहक होते हैं। आप किसी मनुष्य को कैद कर सकते हैं लेकिन उसके सपनों पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगा सकते। मनुष्य को यह प्रकृतिप्रदत्त उपहार है जिसने उसके सर्वश्रेष्ठ होने में बड़ी भूमिका निभाई है। राकेश कुमार गुप्त अपने आलेख में उचित ही लिखते हैं "मनुष्य के पूरे इतिहास को यदि एक अलग दृष्टि से पढ़ा जाए तो वह केवल युद्धों, साम्राज्यों, राजाओं, क्रांतियों और तकनीकी आविष्कारों का इतिहास नहीं दिखाई देगा; वह उन सपनों का इतिहास भी दिखाई देगा जिन्हें मनुष्य ने अपनी वर्तमान परिस्थितियों से आगे जा कर देखा था। आज जो कुछ हमें सामान्य और स्वाभाविक दिखाई देता है, वह कभी किसी मनुष्य की कल्पना में असंभव था। मनुष्य का आकाश में उड़ना, समुद्रों के पार जाना, रोगों का उपचार करना, दासता को चुनौती देना, स्त्रियों को मताधिकार देना, उपनिवेशों का स्वतंत्र होना, जाति और नस्ल के आध...