नीरज सिंह की कहानी 'जरूरत'
नीरज सिंह जीवन की बहुत सारी जरूरतें होती हैं। रोजी रोटी की जरूरत इनमें सबसे प्रमुख है। इसके लिए लोग अपना घर बार छोड़ कर देश विदेश चले जाते हैं। इसके लिए व्यक्ति हर समय प्रयत्नशील रहता है। तो क्या मनुष्य जीवन का यही अन्तिम प्राप्य है। नीरज सिंह की कहानी 'जरूरत' पढ़ते हुए यह स्पष्ट होता है कि जीवन के लिए यही सब कुछ नहीं है। बल्कि कुछ ऐसी जरूरतें भी हैं जिसे मनुष्य निभाने की कोशिश करता है। अमूर्त होते हुए भी यह जरूरत सबसे महत्त्वपूर्ण है। यह जरूरत है मनुष्यता। जिसके लिए मनुष्य स्वतः स्फूर्त तरीके से उठ खड़ा होता है। मनुष्यता की इस भावना ने ही तो मनुष्य को इस पृथिवी का सबसे बुद्धिमान और संवेदनशील प्राणी बनाया है। वासुदेव केवट अपनी नाव को अच्छे खासे रुपयों में रिजर्व कर ले जा रहा होता है कि तभी एक कारुणिक आवाज सुन कर अपनी आत्मा की आवाज पर पीछे लौटने का निर्णय लेता है। उसे महसूस होता है कि रमेसरा बहू, जिसकी तबियत बहुत खराब है को यथाशीघ्र अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। और यही इस समय की सबसे बड़ी जरूरत थी। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं नीरज सिंह की कहानी 'जरूरत'। 'जरूरत' ...