मधु कांकरिया की मेरी ढाका डायरी की शर्मिला जालान द्वारा की गई समीक्षा
बांग्लादेश दुनिया का एक ऐसा देश है जिसका निर्माण धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि भाषा और संस्कृति के आधार पर हुआ था। राष्ट्र बनने की उसकी प्रक्रिया त्रासद थी और उसे इस क्रम में उसे भयावह नरसंहार का दंश भी झेलना पड़ा। जिस पाकिस्तान से वह लड़ाई लड़ कर वह अलग हुआ था उसकी नींव में ही धर्म था लेकिन इसके संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान ने धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में भविष्य के बांग्लादेश की परिकल्पना की थी। इसके बावजूद, यह विडंबना ही कही जाएगी कि शीघ्र ही एक सैनिक जनरल ने तख्ता पलट कर इसे इस्लामिक राज्य घोषित कर दिया। आज का बांग्लादेश कट्टरवाद की अंधी राह पर चल पड़ा है। बहरहाल वरिष्ठ लेखिका मधु कांकरिया ने अपना कुछ समय बांग्लादेश में बिताया जिसे उन्होंने 'मेरी ढाका डायरी' के रूप में शब्दबद्ध किया है। बकौल शर्मिला जालान 'डायरी में उनके चिंतक और विचारक रूप की झलक मिलती है जो उन्हें आत्मालोचक और आत्मान्वेषी बनाता है। इसी के साथ इस्लाम, राजनीति, गरीबी और अभाव से जुड़े प्रश्नों को वे मजबूती से उठाती हैं और अपने विचार स्पष्टता से रखती हैं। ढाका को जानने की प्रक्रिया में वे अपनी दुविधाओं और ...