संदेश

मोहम्मद मूसा की कविताएँ

चित्र
मोहम्मद मूसा युद्ध प्रायः इसीलिए किए जाते हैं ताकि समस्या का समाधान निकाला जा सके। यह अलग बात है कि युद्ध कोई अन्तिम समाधान नहीं निकाल पाता। अगर ऐसा होता तो दुनिया को आज युद्धों की जरूरत ही नहीं पड़ती। सच तो यह है कि हरेक युद्ध अपने होने के साथ ही अगले युद्ध का बीजारोपण कर देता है। इस तरह देखा जाए तो हमारा इतिहास युद्धों का ही इतिहास है। इस तरह कोई भी युद्ध अन्तिम नहीं होता। गाजा के कवि मोहम्मद मूसा अपनी कविता में उचित ही लिखते हैं : 'यह युद्ध न तो कोई दिशा-सूचक है,/ न ही डूबते हुओं की आवाज़।' आजकल यह दुनिया एक बार फिर युद्धमय है। हम इस युद्ध के खिलाफ दुनिया में उठती हुई आवाजों में अपनी एक फुसफुसाती हुई आवाज के साथ हैं। कल हमने हरीश चन्द्र पाण्डे की कविता प्रस्तुत किया था। आज एक और कवि मोहम्मद मूसा की कविताएँ। तो आइए युद्ध के विरुद्ध कविता के क्रम में आज हम पढ़ते हैं  मोहम्मद मूसा की कविताएँ। युद्ध के विरुद्ध कविता : 2 मोहम्मद मूसा की कविताएँ अंग्रेजी से अनुवाद : भास्कर चौधरी  यह युद्ध आख़िरी नहीं ​यह युद्ध आख़िरी नहीं ​यह युद्ध तुम्हारे जीवन का आख़िरी अध्याय नहीं, न ही ...

मनीष चौरसिया की रपट 'वीथिका का आयोजन : Generation - पीढियां'

चित्र
इलाहाबाद संग्रहालय प्रयागराज में बीते 15 मार्च 2026 को वीथिका के अन्तर्गत 'Generation-पीढ़ियां'  का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ रचनाकार डॉ. सूर्यबाला, नई पीढ़ी की सशक्त रचनाकार आकृति विज्ञा 'अर्पण' के साथ साथ प्रो. बसंत त्रिपाठी, डॉ. शिशिर सोमवंशी, डॉ. जनार्दन, ब्रिगेडियर रजनीश त्रिवेदी, और वरिष्ठ रंगकर्मी श्री प्रवीण शेखर जैसे चिंतनधर्मी वक्ता शामिल हुए। इस कार्यक्रम की एक रपट हमें लिख भेजी है इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शोध छात्र मनीष चौरसिया। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं मनीष चौरसिया की रपट  'वीथिका का आयोजन : Generation - पीढियां'। रपट 'वीथिका का आयोजन :  Generation - पीढियां'  मनीष चौरसिया  बात उन दिनों की है जब एम. ए. (2021-23) में प्रो. बसंत त्रिपाठी के कहने पर मनोज रूपड़ा की कहानी 'रद्दोबदल' पढ़ी थी। कहानी यह दिखाती है कि कैसे आधुनिकता की दौड़ में रिश्तों में रद्दोबदल (बदलाव) आ गया है। अब रिश्ते भावों की जगह उपयोगिता (utility) और भौतिक लाभ पर टिके हैं। एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना कम होती जा रही है। लोग स्वार...

हरीश चन्द्र पाण्डे की कविता 'युद्ध'

चित्र
हरीश चन्द्र पाण्डे  युद्ध हमेशा विनाशकारी साबित होता है। इससे वे लोग भी प्रभावित होते हैं जिनका युद्ध से प्रत्यक्ष रूप से कुछ भी लेना देना नहीं होता। यह दरअसल उन लोगों की महत्वाकांक्षाओं का दुष्परिणाम होता है जो खुद को सबसे श्रेष्ठ या सबसे ऊपर समझते हैं। वर्तमान में चल रहा ईरान अमरीका युद्ध ऐसा ही उदाहरण है। यह विडंबना ही है कि जिन यहूदियों ने इतिहास के सबसे निर्मम हत्याकांड के दंश को झेला, वही आज युद्ध के पक्ष में मनमाना व्यवहार कर रहे हैं। दुनिया के सभी बुद्धिजीवियों के द्वारा इस युद्ध का विरोध किया जा रहा है। पहली बार भी इस मुहिम में शामिल है। इसी क्रम में आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं हरीश चन्द्र पाण्डे की कविता 'युद्ध'। युद्ध के विरुद्ध कविता : 1 'युद्ध' हरीश चन्द्र पाण्डे एक बार फिर शांति-वार्ता विफल हुई  विराम, युद्ध के चरम पर नहीं शांति की पहल पर लगा युद्ध जारी हैं युद्ध होते रहें इसलिए युद्धाभ्यास भी जारी हैं  पनडुब्बियां जल की प्रशांतता में अभ्यासरत हैं  टैंक रेगिस्तानों को रौंद रहे हैं युद्ध का दमामा सबसे पहले दिमाग़ में बजता है  युद्ध इसीलिए ...

अनिला राखेचा के कविता संग्रह 'काजल की मेड़' की शैलेश गुप्त द्वारा समीक्षा "सपनों के संरक्षण की संघर्ष गाथा : 'काजल की मेड़'"

चित्र
  प्रेम जीवन का मूल है। प्रेम जीवन की खूबसूरती को कुछ और बढ़ा देता है। लेकिन प्रेम के सामने हजार तरह के खतरे भी होते हैं। प्रेम को हमारा समाज सहज रूप में स्वीकार नहीं कर पाता इसीलिए उसे जद्दोजहद भी करता है। अनिला राखेचा की कविताओं के मूल में यह प्रेम ही है जो मनुष्य को कहीं अधिक उदात्त बनाता है। हाल ही में वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से अनिला राखेचा का पहला कविता संग्रह  'काजल की मेड़' प्रकाशित हुआ है।  अनिला राखेचा के कविता संग्रह 'काजल की मेड़' की समीक्षा की है शैलेश गुप्त ने। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं अनिला के कविता संग्रह पर शैलेश गुप्त द्वारा लिखी गई समीक्षा "सपनों के संरक्षण की संघर्ष गाथा : 'काजल की मेड़'"।  "सपनों के संरक्षण की संघर्ष गाथा : 'काजल की मेड़'" शैलेश गुप्त  शब्दों की कूची से कोलकाता की प्रतिष्ठित कवयित्री अनिला राखेचा ने अपने हृदय के  विविध मनोभावों को सपनों के इंद्रधनुषी रंगों से रंग कर कल्पना के कैनवास पर जो एक मनोहारी भाव प्रवण पेंटिंग उकेरी है, उस कविता संग्रह का नाम "काजल की मेड़" है। ये काव्य पें...