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नित्यानंद गायेन से प्रमोद धिताल की बातचीत

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नित्यानंद गायेन साक्षात्कार ऐसी विधा है जिसके जरिए सवाल जवाब के क्रम में हम उन तमाम व्यक्तिगत, सार्वजनिक, साहित्यिक और रचनात्मक मुद्दों से रु ब रु हो सकते हैं जिससे आम तौर पर परिचित नहीं होते। साक्षात्कार के द्वारा जवाब देने वाले व्यक्ति के निजी संघर्षों, उसकी व्यक्तिगत अभिरुचियों और अवधारणाओं के बारे में जान सकते हैं। अगर सवाल जवाब पहले से प्रायोजित नहीं है तब साक्षात्कार की सहजता और भी निखर कर सामने आती है। सुपरिचित युवा कवि नित्यानंद गायेन से नेपाल के कवि प्रमोद धिताल ने एक बातचीत की है जिसे आज हम पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। तो आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं यह साक्षात्कार। प्रश्न : नित्यानन्द जी, सब से पहले यह बताइए कि आप इन दिनों क्या कर रहे हैं ? जवाब : प्रमोद जी, आपके इस सवाल का जवाब देते हुए मुझे कवि रमा शंकर यादव ‘विद्रोही’ याद आ रहे हैं. कवि विद्रोही ने कहा था – ‘ कविता एक कर्म है, जिसे मैं कर रहा हूँ फिर भी लोग पूछते हैं – विद्रोही तुम क्या करते हो? ’ कविता ही कवि का कर्म है. मैं इन दिनों भी कविता कर रहा हूँ. कवि कवि...