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विमल चन्द्र पाण्डेय की कहानी 'ऊब महासागर'

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विमल चन्द्र पाण्डेय  आज का जीवन आपाधापी से भरा हुआ है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि तकनीक ने रहन सहन को आसान बनाया है। लेकिन इसके बावजूद मनुष्य की दिक्कतें बढ़ी हैं। जीवन में तनाव यानी कि टेंशन बढ़ा है। थोड़ी ही देर में लोग ऊब जा रहे हैं। इस ऊब ने डिप्रेशन को बढ़ाया है जिससे लोग आत्महत्या की तरफ उन्मुख हो रहे हैं। बड़े बुजुर्ग की बात ही क्या बच्चे तक आत्महत्या करने लगे हैं। मोबाइल ने जीवन जीने का तरीका ही बदल कर रख दिया है। इसने झूठ बोलना आसान कर दिया है। लोग बातों में दिन रात मशगूल रहते हैं हालांकि उसका कोई अभिप्राय नहीं है। इस प्रवृत्ति के मद्देनजर विमल चन्द्र पाण्डेय ने एक महत्त्वपूर्ण कहानी लिखी है 'ऊब महासागर'। अपनी कहानी में विमल लिखते हैं : "पूरी दुनिया मोबाइल से परेशान है। ये कहती है कि ये मुझसे परेशान है लेकिन ये भी दरअसल मोबाइल से ही परेशान है। अभी मैं देख रहा होता तो मुझे घूरने लगती लेकिन तब से पता नहीं किसको मैसेज पे मैसेज दागे जा रही है। पूछूँगा तो प्राइवेसी का घंटा बजाने लगेगी, पैट्रिआर्कल बोलने लगेगी। नरक कर के रख दिया है। दुनिया में सब कुछ इतना फिक्स हो गय...

विमल चन्द्र पाण्डेय की कहानी 'नर्क से थोड़ा कम'

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  विमल चन्द्र पाण्डेय  मनुष्य के जीवन की एक निश्चित अवधि होती है। हालांकि जब वह यह जीवन जी रहा होता है तो लगता है जैसे यह असमाप्य हो। इसी जीवन में वह जैसे सारे जन्मों का इंतजाम कर लेना चाहता हैं। इस इंतजाम में बुरे और भले का सामान्य विवेक भी समाप्त हो जाता है। विमल चन्द्र पाण्डेय ऐसे कहानीकार हैं जो उन विषयों पर कहानियां लिखते हैं जो लीक से थोड़ा अलग हट कर होती हैं। आपराधिक कार्यों में जुटे दो दोस्तों के मनोभावों को ले कर विमल ने इस कहानी का जो ताना बाना बुना है वह अन्त में हमें विचलित करता है। एक कहानीकार के रूप में यही विमल की खासियत है। इन दिनों वे फिल्म निर्माण की राह पकड़े हुए हैं जिससे कहानियों की राह थोड़ी विरल हुई है। फिर भी विमल के कहानीकार के ऊपर भरोसा किया जा सकता है। यह कहानी पुस्तकनामा से साभार ली गई है। तो आइए आज पहली बार पर एक अरसे के बाद हम पढ़ते हैं  विमल चन्द्र पाण्डेय की कहानी 'नर्क से थोड़ा कम'। 'नर्क से थोड़ा कम' विमल चन्द्र पाण्डेय  सही समझ कर जितने निर्णय उसने जीवन में लिए थे, सारे के सारे एक सिरे से गलत साबित हुए थे। अब सही गलत का अधिक बोझ नहीं ...

विमल चन्द्र पाण्डेय की कहानी ‘मारण मन्त्र’

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विमल चन्द्र पाण्डेय आज के युवा कहानीकारों में विमल चन्द्र पाण्डेय अपने शिल्प और कहानी के कहन के अंदाज से अलग दिखाई पड़ते हैं। आकार में लम्बी होने के बावजूद उनकी कहानियाँ हमें कहीं भी एक पल के लिए नहीं उबातीं। विमल की कहानियों में एक प्रवाह निरन्तर कायम रहता है जो हमें लगातार बाँधे रहता है। ‘मारण मन्त्र’ विमल की नयी कहानी है जो ‘पल-प्रतिपल’   पत्रिका के हालिया अंक में प्रकाशित हुई है। विमल ने इस कहानी के माध्यम से बाबाओं के अन्धविश्वासी कर्मकांडों के पैकेज का रोचक खुलासा तो किया ही है साथ ही उस आम आदमी के जीवन की त्रासदी को सफलता के साथ रेखांकित भी किया है जो आज भी संवेदनशीलता के साथ जीते हुए सब कुछ भुगतने और जिन्दगी में असफल होने के लिए अभिशप्त है। विमल आज कल फिल्म लेखन और निर्माण के महत्वपूर्ण मिशन में एक जूनून के साथ लगे हुए हैं। यही वजह है कि वे चार वर्ष बाद कोई नयी कहानी लिख पाए हैं। हमें विश्वास है कि इस सिनेमाई दुनिया में भी वे अपने लेखन की तरह ही सफल होंगे। विमल को शुभकामनाएं देते हुए आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं उनकी बिल्कुल नयी कहानी ‘मारण मन्त्र’।    ...