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निशान्त पाठक की कविताएँ

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निशान्त पाठक  अनुभव के लिए जरूरी नहीं कि जीवन लम्बा हो। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कम उम्र में ही अनुभव समृद्ध हो जाते हैं। कवि भी अनुभवों के जरिए ही समृद्ध होता है। निशान्त पाठक ऐसे ही कवि हैं जिनके पास कम में ही जीवन के तल्ख़ अनुभव हैं। उनकी कविताओं से रु ब रु होते समय यह स्पष्ट दिखता है। जीवन की गझिन बुनावट को निशान्त ने उम्दा तरीके से कविताओं में उतारा है। कई जगह कविताओं में कुछ झोल भी है लेकिन यह सहज और स्वाभाविक है। यह संभावनाशील कवि पहली बार कहीं भी प्रकाशित हो रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि यह कवि भविष्य में और बेहतरीन कविताओं के साथ सामने आएगा। अत्यन्त संकोच के साथ निशान्त ने पहली बार के लिए ये कविताएँ दी हैं। कविता की दुनिया में इस नए कवि का स्वागत करते हुए हम आज पहली बार पर इनकी प्रस्तुत कर रहे हैं। निशान्त पाठक की कविताएँ अचार की संस्कृति अचार हमारे लिए पीढ़ियों की विरासत एक समूची संस्कृति है दादी की दादी लगाती थी अचार नानी की नानी लगाती थी अचार मां भी लगाती है अचार अब बहन भी बचपन से अचार हमारे जीवन का सबसे रंगीन हिस्सा किस्सा होता था हम किसी भी...

डी एम मिश्र की कोरोना काल की ग़ज़लें

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डी एम मिश्र कोरोना के रूप में विश्व ने पहली बार ऐसी महामारी का साक्षात्कार किया जिसमें हर दूसरा व्यक्ति संदेहास्पद लगता है। 'सोशल डिस्टेंसिंग' टर्म ही यह बताने के लिए काफी है कि सबसे एक दूरी बना कर रखनी है। कोरोना ने हमारे समाज और संस्कृति सबको बदल कर रख दिया है। समूचा विश्व एकबारगी जैसे लॉकडाउन हो गया यानी कि थम सा गया। लेकिन उन भावातिरेकों का क्या जो किसी भी डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करता। कविता कह लें या गज़ल अबाध इस समय में भी बहती रही। इसे कोरोना काल की रचनाओं का नाम दिया जा रहा है। डी एम मिश्र गज़ल के क्षेत्र में एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। उन्होंने कोरोना काल के मद्देनज़र कुछ उम्दा गज़लें कही हैं। हमारे यहाँ जिन परिस्थितियों में लॉक डाउन लगा और तमाम लोग तमाम जगहों पर फँसे पड़े रह गए, तमाम लोगों ने जैसा महसूस किया, उस त्रासदी को अपने अंदाज़ में गज़लकार ने इस तरह शब्दांकित किया है जैसे वे उसका एक शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत कर रहे हों। आज पहली बार पर प्रस्तुत है डी एम मिश्र की गज़लें। डी एम मिश्र की कोरोना काल की ग़ज़लें 1 दाना डाल रहा चिड़ियों को मगर शिकारी है आग ...

अरविन्द यादव की कविताएं

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  अरविन्द यादव परिचय अरविन्द यादव जन्मतिथि-   25/06/1981 शिक्षा-   एम. ए. (हिन्दी) , नेट , पीएच.-डी. प्रकाशन - समाधान खण्डकाव्य वागर्थ , पाखी , समहुत , कथाक्रम , अक्षरा , विभोम स्वर , सोचविचार , पुरवाई , सेतु , समकालीन अभिव्यक्ति , किस्सा कोताह , तीसरा पक्ष , ककसाड़ , प्राची , दलित साहित्य वार्षिकी , डिप्रेस्ड एक्सप्रेस , विचार वीथी , लोकतंत्र का दर्द , शब्द सरिता , निभा , मानस चेतना , अभिव्यक्ति , ग्रेस इंडिया टाइम्स , विजय दर्पण टाइम्स आदि   पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित सम्मान- कन्नौज की अभिव्यंजना साहित्यिक संस्था से सम्मानित अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा सम्मानित सम्प्रति- असिस्टेंट प्रोफेसर - हिन्दी साहित्य ऐसी गम्भीर विधा है जिसका काम अपने समय के परिदृश्य की बारीकी से पड़ताल करना है। इस क्रम में उसे अपने समय की हकीकतों से वह धुंध भी हटानी पडती है जो अक्सर ऐसे भ्रम को सिरजती है जो मुख्यतया आधारहीन होती है। इस तरह साहित्य उन कमजोर लोगों की आवाज बन कर गुंजित होता है जो प्रायः उपेक्षित होते हैं। कोरोना महामार...