राकेश कुमार गुप्त का आलेख 'आधी आबादी का नया आत्मविश्वास'
राकेश कुमार गुप्त वैदिक काल का 'गार्गी याज्ञवल्क्य संवाद' बहुत कुछ स्त्रियों की कहानी अपने आप कह डालता है। लगातार सवाल पूछने से ऋषि याज्ञवल्क्य गार्गी पर क्रोधित हो गए। इसके बाद भी गार्गी का प्रश्न पूछना जारी रहा। परम आत्मज्ञानी के तौर प्रतिष्ठित याज्ञवल्क्य ने झल्ला कर आखिर कह ही दिया- ’गार्गी, माति प्राक्षीर्मा ते मूर्धा व्यापप्त्त्’। यानी गार्गी, इतने सवाल मत करो, कहीं ऐसा न हो कि इससे तुम्हारा मस्तिष्क ही फट जाए। याज्ञवल्क्य की इस कटु और अपमानजनक बात शास्त्रार्थ के नियमों के सर्वथा प्रतिकूल थी। लेकिन गार्गी ने अपने प्रश्न खुद ही स्थगित कर दिए। गार्गी के प्रश्नों को समेटते हुए ‘बृहदारण्यक उपनिषद्’ की ऋचाओं का निर्माण किया गया। यह उपनिषद् वेदों का एक हिस्सा है। हजारों साल बीतने के बाद भी पुरुष मानसिकता में कोई खास बदलाव नहीं दिखाई पड़ता। आमतौर पर हमारे समाज में स्त्रियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह लोक लाज का ख़्याल रखे। उसके बारे में कहा जाता है कि वह मर्यादाओं का ध्यान रखे। लेकिन बदलते समय के साथ स्त्रियों ने खुद को न केवल बदला है बल्कि अपनी योग्यता से स्वयं को स...