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यतीश कुमार की किताब 'बोरसी भर आंच' का एक अंश

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  जीवन में स्मृतियों के लिए एक बड़ा स्पेस होता है। ये खट्टी मीठी स्मृतियां हमारे जीने का संबल बनती हैं। इनसे बहुत कुछ सीख मिलती है। रचनात्मकता तो बहुत हद तक स्मृतियों की ऋणी होती है जिसमें सार्वभौमिकता होती है। अक्सर ऐसा होता है कि किसी लेखक की स्मृतियां या अन्य कोई रचना अपने जीवन से मेल खाने लगती हैं। कवि यतीश कुमार की हाल ही में संस्मरणों की एक किताब आई है 'बोरसी भर आंच'। यतीश का शुरुआती जीवन सामान्य ही रहा है। और उस जीवन में सामान्य का वह संघर्ष भी है जो आमतौर पर हम सबका संघर्ष होता है। इन संस्मरणों में कविता जैसी ही रवानी और प्रवहमानता है। स्थानीय बोली भाषा के शब्द अचानक हमें ठिठकने के लिए मजबूर कर देते हैं। यह लेखक के अपने मिट्टी से जुड़े होने का प्रमाण है। हम पहली बार पर प्रस्तुत कर रहे हैं यतीश कुमार की किताब 'बोरसी भर आंच' का एक अंश। इन संस्मरणों में गोता लगाने के लिए आप यह किताब राजकमल प्रकाशन से खरीद कर पढ़ सकते हैं। कितने ही अफ़सानों की छाप गुम हैं यतीश कुमार वर्जनायें बेलौस होती हैं और स्मृतियाँ कभी जल जैसी तरल तो  कभी वाष्प की तरह सुसुम और कभी बर्फ की तरह ठं...

सुनील कुमार पाठक का आलेख 'दिल्ली के बड़का अस्पताल में नर्स से जे कहले एगो भोजपुरिया बूढ़ऊ'

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  अपनी बोली भाषा किसे प्रिय नहीं होती। अपनी भाषा में ही हमें जीवन की गहनतम अनुभूतियां प्राप्त होती हैं। केदार नाथ सिंह हिन्दी के महत्त्वपूर्ण कवि रहे हैं। लेकिन अपने एक साक्षात्कार में उन्होंने यह बात कही थी कि मैं चाहता हूं कि मेरा अन्तिम कविता संग्रह भोजपुरी में प्रकाशित हो। इसका आशय यह है कि वे भोजपुरी में कविताएं जरूर लिखते रहे होंगे। सदानंद साही उनके निकटस्थ लोगों में से रहे हैं। उन्होंने केदार जी की दो भोजपुरी कविताएं उनके मृत्यु के उपरान्त अपनी पत्रिका 'साखी' में प्रकाशित की। केदार जी की इन  भोजपुरी कविताओं के भी गहरे निहितार्थ हैं। इन भोजपुरी कविताओं को आधार बना कर एक आलेख लिखा है सुनील कुमार पाठक ने। बीते 19 मार्च को केदार जी की पुण्यतिथि थी। उनकी स्मृति को नमन करते हुए आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं केदार नाथ सिंह की भोजपुरी कविताओं पर  सुनील कुमार पाठक का आलेख 'दिल्ली के बड़का अस्पताल में नर्स से जे कहलें एगो भोजपुरिया बूढ़ऊ'। 'दिल्ली के बड़का अस्पताल में नर्स से  जे कहले एगो भोजपुरिया बूढ़ऊ' सुनील कुमार पाठक "ना, हमरा के दवाई मत...

यतीश कुमार की समीक्षा नदी पुत्र- उत्तर भारत में निषाद और नदी

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नदियों से मनुष्य की पुरातन नातेदारी है। विश्व की सभी प्राचीनतम सभ्यताएं नदियों के किनारे ही विकसित हुईं। सिन्धु नदी के तटीय क्षेत्रों में हड़प्पा की सभ्यता अस्तित्व में आई, जिसने नगरीय सभ्यता के वे प्रतिमान रचे, जिसे देख कर आज भी आश्चर्य होता है।वैदिक काल में गंगा यमुना का विशाल मैदान अस्तित्व में आया जहां भारतीय संस्कृति की बुनियाद रखी गई। आज चाहें हमने जितनी प्रगति कर ली हो, लेकिन नदियों की जरूरत से इंकार नहीं किया जा सकता। रमाशंकर सिंह युवा शोधकर्ता हैं। हाल ही में इनकी एक शोधपरक किताब आई है 'नदी पुत्र'। इसके जरिए रमाशंकर ने उन नदीपुत्रों की विडंबनापूर्ण स्थिति पर प्रकाश डाला है जिनके जीवन यापन से नदी सभ्यता के आरम्भ से ही नाभिनालबद्ध रही है। यतीश कुमार ने नदी पुत्र पर एक गम्भीर नजर डाली है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं रमाशंकर सिंह की किताब नदी पुत्र पर यतीश कुमार की समीक्षा। नदी पुत्र- उत्तर भारत में निषाद और नदी यतीश कुमार  संस्कृतियों का पहला पाठ है हमारी नदियाँ। इन नदियों के संग नालबद्ध निषाद प्रजाति का उदय विकास और पतन को क्रमबद्ध साधने की कोशिश है यह किताब। मनुष्य ...

स्वप्निल श्रीवास्तव का आलेख 'पुरबिहे कवि की कविताई'।

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  कथ्य और भाषा के स्तर पर प्रयोग करने वाले कवियों में केदारनाथ सिंह का अपना अलग स्थान है। वे लोक और लोक जीवन से जुड़े हुए कवि हैं। इसीलिए मिट्टी की गंध सहज ही उनके यहां मिल जाती है। वे खुद को पुरबिहे कहने में किसी भी किस्म के संकोच का अनुभव नहीं करते। अपनी मातृ भाषा भोजपुरी को वे जीते थे। उनकी कविताएं इसकी गवाह हैं। आज केदार जी की पुण्य तिथि पर उन्हें नमन करते हुए पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं स्वप्निल श्रीवास्तव का आलेख ' पुरबिहे कवि की कविताई'। (केदारनाथ सिंह हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि हैं, उनकी संवेदना व्यापक है इसलिए आलोचकों ने अपनी अपनी दृष्टि के अनुसार उनका मूल्यांकन किया है। मेरा विचार यह है कि वे मूल रूप से लोकसंवेदना के कवि हैं। इस आधार पर उनके मूल्यांकन की कोशिश की गयी है। 19 मार्च उनकी पुण्यतिथि है, उन्हें  याद करते हुए यह लेख  प्रस्तुत है। - लेखक) पुरबिहे कवि की कविताई                    स्वप्निल श्रीवास्तव         हिंदी में दो तरह की संवेदना के कवि हैं। पहले वे जो नगर-क्षेत्र में रहते हु...