अमनदीप कौर की कविताएँ
अमनदीप कौर यह दुनिया जो आज इतनी खूबदूरत दिख रही है उनमें उन कामगारों का बड़ा हाथ है जो बहुत ही अमानवीय परिस्थियों में किसी तरह अपना गुजारा करते हैं। इनके हाथ दुनिया के वे खूबसूरत हाथ हैं जिन्होंने सब कुछ बेहतर बना रखा है और हमें किंचित भी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता। शासक की मंशा होती है कि ये मजदूर ' हाथ बाँधे/ इनके सामने फ़र्माबरदारी करें ' और ' बिना हक़ मांगे/ अपने स्वाभिमान की/ अपनी मेहनत की/ लूट का तमाशा देखें। ' लेकिन यह भी सच है कि ' सत्ता के गलियारे/ सिहर उठते हैं/ महज यह सोच कर कि/ ग़र/ नाले पार के इन/ इंसान से दिखने वालों को/ वास्तव में यकीं हो गया/ कि वो इंसान ही हैं/ तो क्या होगा ?…' ऐसी मर्म भरी बेहतरीन पंक्तियाँ लिखने वाली कवयित्री अमनदीप कौर की कविताएँ आज पहली बार के पाठकों के लिए पेश हैं। अमनदीप ने पंजाबी व हिंदी में कई बेहतरीन कविताएँ लिखी हैं। और छपने-छपाने के इस दौर में भी कहीं कविताएँ भेजने से आमतौर से बचती रही हैं। अमनदीप कौर की कविताएँ हाथ हाथ होना ही तो हाथ होना नहीं कुछ हाथ किसी चेहरे के मोहताज़...