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यादवेन्द्र का आलेख 'कविता में कहानी'

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यादवेन्द्र  जीवन कविता से हमेशा आप्लावित रहता है और इसका हर एक चरण खुद में एक रोचक कहानी होता है। सुख हो या दुःख, उल्लास हो या शोक, कवि हर जगह कविता की तलाश कर ही लेता है। संस्कृत साहित्य का पहला श्लोक वाल्मीकि ने रति क्रिया में लिप्त क्रौंच के जोड़े पर तीर चलाने वाले बहेलिए के प्रति शोक के परिणामस्वरूप ही लिखी थी। ' मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।/  यत्क्रौंचमिथुनादेकमवधी काममोहितम् ।।'  इस तरह कविता में कहानी या फिर कहानी में कविता की धारा बहती रहती है। बस इसे देखने वाले में उस काव्य नजर का होना जरूरी होता है। यादवेन्द्र ने अपने आलेख में उन कविताओं की पड़ताल की है जिनमें कथा तत्त्व शामिल होता है। जरूरी नहीं कि इस तरह की कविता लम्बी ही हो। वह छोटी होते हुए भी जीवन के अद्भुत दृश्यों से भरी हो सकती है। एक तरफ जहां कथा तत्त्व कविता को रोचक और दृश्यमय बनाता है वहीं दूसरी तरफ काव्य तत्व कहानी को सहज, सरस और गीतमय बनाता है। यही वजह है कि कवियों द्वारा लिखी गई कहानियां कुछ अलग अंदाज लिए होती हैं जबकि कहानीकारों  द्वारा लिखी गई का कविताएं कहानीपन की आभा लिए होती ...