भरत प्रसाद का आलेख 'जिनकी आत्मा में अंचलगन्धी की रूह झरती है'।
फणीश्वरनाथ रेणु प्रेमचंद के बाद फणीश्वरनाथ रेणु एक ऐसा नाम है जो हिन्दी जगत के लोगों की जुबान पर है। रेणु की ख्याति आंचलिक कथाकार/ उपन्यासकार के तौर पर है। लेकिन जब हम उनकी रचनाओं से गुजरते हैं तो पाते हैं कि मानवीय संवेदना और भावों के मर्म के वे अनूठे चितेरे हैं। रेणु ने अपेक्षाकृत कम लिखा लेकिन जितना भी लिखा वह सार्थक लिखा। जो जरूरी था वही लिखा। मैला आँचल ' के अप्रतिम रचनाकार को पढ़ने पर पता चलता है कि वे जमीन से अपने लोक से किस गहराई के साथ जुड़े हुए थे। उनकी एक ख्यात कहानी ' तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम ' से भला कौन ऐसा होगा जो परिचित न होगा। इस कहानी पर इसी नाम से एक चर्चित फिल्म भी बनी। कवि-आलोचक भरत प्रसाद ने फणीश्वरनाथ रेणु की कहानियों पर केन्द्रित एक आलेख लिखा है , जो नया ज्ञानोदय के हालिया अंक में प्रकाशित हुआ है। आज पहली बार पर प्रस्तुत है भरत प्रसाद का आलेख ' जिनकी आत्मा में अंचलगन्धी की रूह झरती है ' । फणीश्वरनाथ रेणु : जिनकी आत्मा में अंचलगंधी धरती की रुह झरती है। भरत प्रसाद ...