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कुमार कृष्‍ण शर्मा की कविताएँ

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कुमार कृष्ण शर्मा  पहले यह परम्परा थी कि किसान अपने अनाज का एक हिस्सा अगली फसल के बीज के तौर पर सुरक्षित रख लेता था। लेकिन आज ऐसा नहीं है। पिछले मौसम में पैदा अन्न बीज बनने की क्षमता नहीं रखते। हमने उन्हें अब हाइब्रिड बना दिया है। कहा जा सकता है कि आज का जमाना ही हाइब्रिड का है। हाइब्रिड बीजों वाले खेत खूब लहलहाते हैं। अनाज भी खूब होता है। लेकिन यह एक कड़वा सच है कि उनमें बीज बनने की क्षमता नहीं होती। यह खेल भी पूंजीपतियों का है। वे चाहते हैं कि किसान हर वर्ष महंगे बीज खरीद कर ही खेत बोये और इसकी आमदनी उनकी जेब में जाए। किसान जिसकी नियति ही परेशान होना है, झक मार कर बीज खरीदता है। पूंजीपतियों की लालची नजर अब किसानों की जमीन पर है। किसी भी तरह अब वे उसे हड़पना चाहते हैं। रचनाकार की नजर इन सब पर है। कुमार कृष्ण शर्मा किसानों की संवेदनाओं से भलीभांति परिचित हैं। अपनी कविता में वे लिखते हैं 'किसान जेब टटोलता है/ उसमें खेतों की मिट्टी है/ सामने वहां बीज के चमकीले पैकेट हैं/ जिनको जेब से मतलब है/ मिट्टी से नहीं'। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं कुमार कृष्ण शर्मा की कविताएँ। कुमार  क...

कुमार कृष्‍ण शर्मा की कवितायें

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सन 2008 से ‌हिंदी में कविताएं लिखना शुरू किया। मौजूदा समय में हिंदी दैनिक अमर उजाला जम्मू के साथ वरिष्‍ठ पत्रकार के तौर पर काम कर रहे। भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान , पा‌किस्तानी गजल गायिका फरीदा खानम , संतूर वादक पंडित शिव कुमार शर्मा ,  नामवर सिंह , ज्ञानपीठ पुरस्कृत प्रो . रहमान राही आदि का ‌साक्षात्कार कर चुके। ' पहली बार ' और ' अनुनाद ब्लॉग ' के अलावा विभिन्न पत्रिकाओं में छपने के अलावा और रेडियो , दूरदर्शन और जम्‍मू कश्मीर कला , संस्कृति और भाषा अकादमी की ओर से आयोजित कवि सम्मेलनों में शिरकत। अन्य लोक मंच जम्मू और कश्मीर के संयोजक ; साहित्य , कला और संस्कृति के सरोकारों के साथ साथ उनसे जुड़े मुद्दों के विकास और प्रचार के लिए जम्मू कश्मीर के पहले हिंदी ब्लॉग ' खुलते किवाड़ ' ( छोटे भाई और मित्र कमल जीत चौधरी के साथ) ) शुरू करने का श्रेय. पहली बार पर आप कुमार कृष्ण शर्मा की कविताएँ पहले भी पढ़ चुके हैं. आज एक बार फिर पेश हैं कुमार कृष्ण की कुछ नयी कविताएँ. प्रस्तुत तीनों कविताएं कश्मीर से जुड़ी सच्ची घटनाओं से प्रेरित हैं। .अग्निशेखर...