पंखुरी सिन्हा का आलेख 'लिस्बन की ईद'
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन विविध राष्ट्रों और धर्मों के अनुयाइयों का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ के लोग अपने तीज त्यौहारों को जोशो खरोश के साथ मनाते हैं। ईद-उल-फितर के दिन भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अन्य मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग मार्टिम मोनिज़ स्क्वायर जैसे स्थानों पर सामूहिक नमाज अदा करने के लिए एकत्रित हुए। यह उत्सव स्थानीय संस्कृति और इस्लामिक परंपराओं के मिलन का प्रतीक बन जाता है। आजकल पंखुरी सिन्हा पुर्तगाल के दौरे पर हैं। उन्होंने लिस्बन से ईद पर भेजी एक रपट में लिखा है : मुझे इस बात का अन्दाजा नहीं था कि इतनी बड़ी अफ्रीकी जमात मुसलमानों की होगी! मुझे लगता था कि उनमें से अधिकांशत ईसाई होंगे, इसकी एक अलग आश्चर्यजनक ऊर्जा महसूस कर रही थी! हालाकि मैंने कई अफ्रीकी लोगों को कुर्ते पाजामे में पहले भी देखा था, और पाया था कि अलग देशों के कुर्ते पाजामों की कट और समूचा अन्दाज़ कुछ कुछ अलग था, फिर भी उस भारतीय- पठान -एशियन परिधान की लोकप्रियता देख कर मैं दंग थी! ये लोग सेनेगल से लेकर अंगोला तक से आए लोग थे, कई तो वर्षों से पुर्तगाली नागरिक थे। पुर्तगाल के तमाम अफ्रीकी कोलोनीज़ के ढेरों ढेर लोग।' आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं पंखुरी सिन्हा की रपट 'लिस्बन की ईद'।
'लिस्बन की ईद'
पंखुरी सिन्हा
बड़े इत्मीनान से एक सुबह उसने कहा था कि 'आज ईद है और आज खाना हमारे साथ खाना!' - और एकदम से मैं उत्साह से भर गई कि न केवल आज ईद है बल्कि पूरे जोशो खरोश के साथ मनाई गई - यहाँ लिस्बन के बीचो-बीच आमादोरा-रेबोलेरा में! उसने बताया कि रेबोलेरा में स्टेडियम के पीछे पढ़ी गई नमाज़! हज़ारों की तादाद में लोग जुटे नमाज़ के लिए, पुरुष तो पुरुष, ढेरों स्त्रियाँ! वाह! मैं फौरन तैयार हो कर रेबोलेरा की ओर। एक ही स्टेशन दूर है आमादोरा से! बताने और बुलाने वाला मेरा नेपाली-बिहारी फ्लैटमेट था, जो बिल्कुल छोटे भाई सा था। रेबोलेरा तो मैं आनन फानन पहुँच गयी। लेकिन मुझे थोडी सी हताशा हुई कि स्टेडियम के आस-पास कुछ भी नहीं मिला उस वक़्त! कुछ तो स्थाई बना कर रखना था ईद का! कोई स्टॉल ही लगा देते! फिर लगा कि शायद इस तरह सड़क किनारे कियोस्क टाइप स्टौल लगाने में बहुत सी इजाज़त लेनी पड़ती हो! बहरहाल, मेरी निराशा ज़्यादा देर तक नहीं बनी रही, क्योंकि किसिम किसिम के चमचम रंगीन परिधानों में ढेरों अफ्रीकी महिलाएं नज़र आने लगीं--रेबोलेरा से ले कर आमादोरा तक! लिबास से मिलती टोपी, हैटनुमा कोई चीज़ जो टोपी और हैट, दोनों से अलग थी--बल्कि पगड़ी के सबसे करीब थी--लेकिन बहुत स्टाइलिश और फैंसी! उम्रदर स्त्रियों से ले कर नवयुवतियों तक, ऐसे गाउननुमा रंगीन लिबास में तितलियों सी उड़ती फिर रही थीं! पुरुष रंगीन कुर्ते पजामे और मैचिंग टोपी में थे!
मतलब उस दिन स्टेशन की छटा ही निराली थी! मुझे इस बात का अन्दाजा नहीं था कि इतनी बड़ी अफ्रीकी जमात मुसलमानों की होगी! मुझे लगता था कि उनमें से अधिकांशत ईसाई होंगे, इसकी एक अलग आश्चर्यजनक ऊर्जा महसूस कर रही थी! हालाकि मैंने कई अफ्रीकी लोगों को कुर्ते पाजामे में पहले भी देखा था, और पाया था कि अलग देशों के कुर्ते पाजामों की कट और समूचा अन्दाज़ कुछ कुछ अलग था, फिर भी उस भारतीय- पठान -एशियन परिधान की लोकप्रियता देख कर मैं दंग थी! ये लोग सेनेगल से लेकर अंगोला तक से आए लोग थे, कई तो वर्षों से पुर्तगाली नागरिक थे। पुर्तगाल के तमाम अफ्रीकी कोलोनीज़ के ढेरों ढेर लोग! यहाँ यों भी मिल जाते हैं, बहुत सारे माईग्रेन्ट्स! कुछ पुरुषों को एक लम्बे गाउन सरीखे ड्रेस में देखती थी, जो अरब परिधान से अलग दिखता था, तो मुझे आश्चर्य होता था! परेशानी ये कि ज़्यादातर इन लोगों को अंग्रेज़ी नहीं आती, इसलिए पूछना मुश्किल! आखिर एक दिन एक मैने एक तरीका निकाला--ऐसे एक व्यक्ति का अभिवादन कर कहा - अपनी ओर ऊँगली दिखाते--मी इण्डिया--फिर उसकी ओर ऊँगली दिखा कर पूछा--यू?"--पहली बार उसने जताया--समझा नहीं - तो मैंने दुहराया! 'बुर्कीना फासो'--अगली बार उसने कहा! ये था उन दिनों मेरा उनसे बातें करने का अन्दाज़ और यह सब मेरे लिए बहुत दिलचस्प था! मुझे इस सब से, उनके साथ और आस-पास पार्क में बैठने से लैंग्स्टन ह्यूज की पँक्तियाँ याद आती थी--सो लॉन्ग सो फार अवे इज़ ऐफ्रीकाज़ डार्क फेस!'
उस ईद के दिन मुझे पता चला कि इस्लाम अफ्रीकी प्राय द्वीप में कितना लोकप्रिय है। ये सब 2024 की बातें हैं! ये उस कमरे की जो पुर्तगाल में मेरा पहला कमरा था। उसके बाद पुर्तगाल के कई इलाकों की मैने यात्रा की, बहुत सुन्दर जगहें, फिर भी लिस्बन और खास कर आमदोरा की कशिश ही अलग है--जहाँ बार बार लौटा जाये!
इस साल मुझे पता चला कि लिस्बन में ईद से पहले रमज़ान के महीने में कई विशेष आयोजन हो रहे हैं--कई रेस्तराँ में बफ़े इत्यादि! बफ़े की खूबसूरती ये है कि बहुत अच्छी वैराइटी मिलती है! और यहाँ इंडियन-पाकिस्तानी-नेपाली-बंग्लादेशी क्युज़ीन का बफ़े रेयर है! यह एक ईद से इतर लेख का विषय है। बहरहाल, पुर्तगाल में लगभग दो डेढ़ साल गुज़ार चुकने के बाद, पिछले नवम्बर में मुझे लिस्बन के मार्तिम मोनीज़ स्थित बंगाली बाज़ार का पता चला! अपने भू भाग के होटलों, दुकानो का अदभुत जमावड़ा, जैसे टोरंटो की जिराड स्ट्रीट!
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| लिस्बन में ईद |
मुझे कुछ ज़रूरी खरीद फरोख्त के लिए लिस्बन जाना था सो मैंने ईद के करीब का समय चुना! बताया गया था कि आमादोरा के उसी इलाके के एक रेस्तरां में बफे चल रहा है तो मैं सीधा वहां पहुँची और एक लम्बे अरसे के बाद बहुत सुस्वादु भोजन का आनन्द लिया! अगले दिन बंगाली गली का रुख करते बहुत उत्साहित थी। पहुँची तो नज़ारा ही अलग था! हर दुकान के आगे इफ्तार स्नैक्स और खाने के ढ़ेर लगे थे। बिरयानी से लेकर, तमाम कवाब , आलू बड़े, सब्ज़ियों के पकौड़े, समोसे, दही भल्ले तक!
खास बात यह है कि जो भी खाया खरीदा बहुत उम्दा निकला! आमादोरा स्थित रेस्तराँ में दूसरे दिन पहुँची तो पता चला सारे टेबल रिसर्व हैं! ऊपर तो केवल लड़के बैठेंगे, परिवार वाले और स्त्रियाँ नीचे! पहले नीचे को ले कर मैं सशंकित थी, लेकिन फिर एक माँ बेटी का जोड़ा सबसे पहले आया, और मैं उनके पीछे-पीछे नीचे हो ली!
उनसे पूछने पर पता चला कि वो ईरान के थे--बड़ा ही सुखद आश्चर्य मुझे हुआ! और फिर तो पूरा ही कमरा पाकिस्तानी परिवारों से भर गया। बड़ा ही दिलकश माहौल! हिन्दी में ही बातें करते, मतलब हिन्दुस्तानी में! ये बहुत संभ्रांत लोग थे, और सब पाकिस्तानी, बांग्लादेशी कोई नहीं! जबकि बंगाली मार्केट का क्राउड भी मिक्स है, और दुकानें भी! सबमें ईद की चहल-पहल देखने लायक थी।
दुकानों में लोग सेवईयों से ले कर तमाम चीजें खरीद रहे थे! खासी भीड़ थी। बड़ा ही शानदार एहसास हुआ जाते हुए रमज़ान के महीने और आती हुई ईद का! बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में बाकायदा बहुत खूबसूरत मस्जिद है, मैं भी जिसके भीतर गई हूँ, लेकिन पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में ईद की छटा निराली देखी! काफी कौसमोपौलिटन और फेस्टिव वातावरण हो रहा था, जो कि अपने आप में फक्र की बात है। जबकि ईरान पर हमले के बाद, पूरी दुनिया चिंतित थी और ईद के जोश के कुछ ठंडे हो जाने की आशंका थी, लेकिन बहादुरों ने ऐसा होने न दिया! रमज़ान की उस शाम के इफ्तार में पाकिस्तानियों के साथ खाते हुए, मुझे खासी आत्मीयता का एहसास हुआ! कहें कि ज़िन्दगी की पहली प्रॉपर ईद रही!
लिस्बन की ईद मुबारक।
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| पंखुरी सिन्हा |
सम्पर्क
मोबाइल : 9508936173



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