हेरम्ब चतुर्वेदी का आलेख 'चिट्ठी-पाती की भूली-बिसरी दुनिया'
हेरम्ब चतुर्वेदी आज का युग संचार क्रान्ति का युग है। कोई भी घटना घटती नहीं कि समूची दुनिया में उसकी सूचना तुरन्त ही पहुंच जाती है। आज हम घर बैठे क्षण भर में ही अमरीका या अन्य देश में बैठे किसी व्यक्ति से वीडियो कॉलिंग कर बात कर सकते हैं। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि चिट्ठी पाती का भी एक जमाना हुआ करता था। इसके लिखने का एक सलीका होता था। चिट्ठी को पाने की तब एक उत्सुकता हुआ करती थी। हम लोग शायद उस पीढ़ी के अन्तिम लोग हैं जिन्होंने अपने हाथों से चिट्ठियां लिखी हैं और पाई हैं। हम लोग पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र और लिफाफे खरीद कर उसके मार्फत पत्र भेजा करते। चिट्ठी पाती की इस भूली बिसरी दुनिया को प्रोफेसर हेरम्ब चतुर्वेदी ने शिद्दत से याद किया है। आज उनका जन्मदिन है। पहली बार की तरफ से उन्हें जनमवार की बधाई एवम शुभकामनाएं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं हेरम्ब चतुर्वेदी का आलेख 'चिट्ठी-पाती की भूली-बिसरी दुनिया'। 'चिट्ठी-पाती की भूली-बिसरी दुनिया' हेरम्ब चतुर्वेदी आज की सूचना क्रांति के बाद के दौर में ई-मेल, व्हॉट्सएप आदि ने डाक-व्यवस्था को लगभग अप्रासंगिक कर दिया है। ...