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विजेन्द्र का आलेख 'लोकधर्मी कवि रेफाएल आल्बेर्ती'

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विगत जनवरी से हमने 'लोकधर्मी कवियों की परम्परा' नामक एक श्रृंखला आरम्भ किया था। इस श्रृंखला में आपने विश्व के ख्यात लोकधर्मी कवियों के बारे में हर महीने सिलसिलेवार पढ़ा। इस श्रृंखला को आप पाठकों का अपार प्यार प्यार प्राप्त हुआ। यह कड़ी समापन कड़ी है जो स्पेन के महान लोकधर्मी कवि रेफाएल अल्बेर्ती पर केंद्रित है।  हमारे लिए यह पोस्ट इस मामले में भी अहम् है कि यह 'पहली बार' ब्लॉग पर प्रस्तुत की जाने वाली तीन सौंवी पोस्ट है। आप रचनाकारों के अमूल्य सहयोग और पाठकों के स्नेह के चलते ही हम इस मुकाम तक पहुँच पाये हैं। आप सबके साथ खुशी के इस क्षण को जीते हुए हमें अपार खुशी हो रही है। इस विशिष्ट अवसर पर आइये पढ़ते हैं विजेंद्र जी का यह आलेख  'लोकधर्मी कवि रेफाएल आल्बेर्ती '।     लोकाधर्मी कवि रेफाएल अल्बेर्ती    विजेंद्र रेफाएल अल्बेर्ती  स्पेनी भाषा के एक महान कवि थे। वह पाब्लो नेरुदा और लोर्का के बहुत ही आत्मीय मित्र भी थे। आल्बेर्ती जन्मे 16 दिसम्बर 1902 में। मृत्यु हुई 1999 में। ‘1927 की कवि पीढ़ी’ के नाम से विख्यात स्पेनी कवियों में वह अग्रगण्य हैं। उन्...

क्रांतिकारी लोकधर्मी कवि तो हू

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               (चित्र : तो हू) विगत जनवरी महीने से हमने एक श्रृंखला 'लोकधर्मी कवियों की परम्परा' शुरू की थी। इसे हमारे आग्रह पर लिखा है वरिष्ठ कवि विजेन्द्र जी ने। श्रृंखला की ग्यारहवीं कड़ी में प्रस्तुत है एक आलेख प्रख्यात वियतनामी कवि तो हू पर। वियतनामी लोकधर्मी कवि तो हू      विजेंद्र तो हू को वियतनाम का क्रांतिकारी कवि माना गया है। वह अपने देश की क्रांतिकारी जनता को समर्पित कवि थे। उन्होंने अपनी एक कविता में कहा है - हृदय है विभाजित मेरा तीन तरह से उसका प्रमुख भाग अर्पित है मेरे दल को एक भाग में रमती है कविता तीजा भाग दिया है प्रेम को हृदय का यह विभाजन हमें थोड़ा असमंजस में डालेगा। कदाचित हृदय का विभाजन होता नहीं है। हम विभाजित करके भी उसे विभाजित नही कर पाते। मनुष्य हृदय की यही खूबी उसे बड़ा बनाती है। यहाँ विभाजन एक सांकेतिक रूपक है। यानि जीवन की प्राथमिकतायें हम तय करें या न करें? करें तो कैसे करें? बहुत से कवि हैं जिनकी कोई प्राथमिकता होती ही नहीं! कुछ की प्राथमिकतायें समयानुसार बाजा...