फ्रांज़ काफ़्का की कहानी “पुरानी पाण्डुलिपि”
फ्रांज़ काफ़्का फ्रैंज काफ्का बीसवीं सदी के एक सांस्कृतिक रूप से प्रभावशाली जर्मन लेखक और उपन्यासकर थे। उनकी लघु कहानियां आधुनिक समाज के व्यग्र अलगाव को चित्रित करतीं हैं। कुछ समकालीन आलोचकों का तो यहाँ तक मानना है कि काफ्का बीसवीं सदी के सर्वश्रेष्ठ लेखकों में से एक है। उनके ही नाम पर प्रचलित "Kafkaesque" (काफ्काएस्क) अंग्रेजी भाषा का हिस्सा बन गया है जिसका उपयोग 'बहकाने वाले' या फिर 'खतरनाक' 'जटिलता' आदि के संदर्भ में किया जाता है। आज काफ़्का का जन्मदिन है। हम उनकी स्मृतियों को नमन करते हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं फ्रांज़ काफ़्का की कहानी “पुरानी पाण्डुलिपि”। मूल जर्मन से अंग्रेजी अनुवाद किया है विला और एडविन म्यूर ने। और इसका हिन्दी अनुवाद चिर परिचित कवि, कहानीकार और अनुवादक श्रीविलास सिंह ने किया है। “पुरानी पाण्डुलिपि” फ्रांज़ काफ़्का हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह ऐसा लगता है कि हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ बातों की अनदेखी की गयी है। अभी के पहले तक इस बात के प्रति हम स्वयं कभी चिंतित नहीं हुए थे और अपने दैनिक कार्यों में व्यस...