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फ्रांज़ काफ़्का की कहानी “पुरानी पाण्डुलिपि”

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फ्रांज़ काफ़्का फ्रैंज काफ्का बीसवीं सदी के एक सांस्कृतिक रूप से प्रभावशाली जर्मन लेखक और उपन्यासकर थे। उनकी लघु कहानियां आधुनिक समाज के व्यग्र अलगाव को चित्रित करतीं हैं। कुछ समकालीन आलोचकों का तो यहाँ तक मानना है कि काफ्का बीसवीं सदी के सर्वश्रेष्ठ लेखकों में से एक है। उनके ही नाम पर प्रचलित "Kafkaesque" (काफ्काएस्क) अंग्रेजी भाषा का हिस्सा बन गया है जिसका उपयोग 'बहकाने वाले' या फिर 'खतरनाक' 'जटिलता' आदि के संदर्भ में किया जाता है। आज काफ़्का का जन्मदिन है। हम उनकी स्मृतियों को नमन करते हैं।  आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  फ्रांज़ काफ़्का  की कहानी  “पुरानी पाण्डुलिपि”। मूल जर्मन से अंग्रेजी अनुवाद किया है विला और एडविन म्यूर ने। और इसका हिन्दी अनुवाद चिर परिचित कवि, कहानीकार और अनुवादक  श्रीविलास सिंह ने किया है। “पुरानी पाण्डुलिपि” फ्रांज़ काफ़्का हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह  ऐसा लगता है कि हमारे देश की सुरक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ बातों की अनदेखी की गयी है। अभी के पहले तक इस बात के प्रति हम स्वयं कभी चिंतित नहीं हुए थे और अपने दैनिक कार्यों में व्यस...

साइना लोफी की कविताएं

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  साइना लोफी साइना लोफी (Gcina Mhlophe)  साइना लोफी दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद  कार्यकर्ता, अभिनेत्री, कहानीकार, नाटककार और कवयित्री हैं। उनका जन्म 1958 में नाटाल में हुआ था और वे एक होसा माता और जुलू पिता की संतान हैं। उन्होंने अपना कार्यकारी जीवन एक घरेलू नौकर के रूप में प्रारम्भ किया फिर वे प्रेस ट्रस्ट और बी बी सी के लिए समाचार वाचक रहीं। फिर उन्होंने ‘लर्न एंड टीच’ पत्रिका में लेखन का कार्य किया। वर्तमान में वे The International Association for Theatre for Children and Young People के संरक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उनकी कहानियों, नाटकों और कविताओं की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने अनेक फिल्मों में काम किया है और अनेक फिल्मों का निर्देशन किया है। उन्हें मुक्त विश्वविद्यालय, इंग्लैंड, नाटाल विश्वविद्यालय और रोड्स विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया है।  अपने लेखन और अफ़्रीकी महिलाओं की आधुनिक विश्व में भूमिका के सम्बन्ध में  हार्वर्ड क्रिमसन को दिए गए एक साक्षात्कार में वे कहती हैं कि “इससे मुझे निश्चय ही अच्छी अनुभू...

नात टिएन की कहानी “खाकी कोट”, हिन्दी अनुवाद : श्रीविलास सिंह

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    नात टिएन नात तिएन का परिचय नात तिएन वियतनाम के बेहतरीन लेखकों में हैं। उनका जन्म 1936 में हनोई में हुआ था। उनका लालन पालन उत्तर में हुआ किंतु जब जेनेवा समझौते के अंतर्गत देश का बंटवारा 1954 में हुआ तो वे दक्षिण में चले आए। उन्होंने रसायन शास्त्र का अध्यापन  और साहित्य लेखन किया। उन्होंने 1975 में एक शरणार्थी के रूप में (जिन्हें बोट पीपुल कहा जाता है) वियतनाम छोड़ दिया और  अमेरिका चले आए। प्रस्तुत कहानी उनके 1983 में प्रकाशित संग्रह “तिएंगे केन” (तुरही की आवाज) से ली गई है। उनके 10 उपन्यास और 11 कहानी संग्रह प्रकाशित हैं। उनकी मृत्यु 2020 में हो गई।    युद्ध हमेशा अपने साथ तबाही लाता है। युद्ध के बाद की परिस्थितियां वहां के लोगों के लिए और दिक्कततलब होती हैं। वियतनाम भी उन राष्ट्रों में से एक है जिसने युद्ध के साथ साथ विभाजन की विभीषिका को भी एक समय में झेला। वियतनामी कहानीकार  नात टिएन की कहानी “खाकी कोट”  युद्ध के बाद उपजी जीवन जीने के अमानवीय परिस्थितियों का आइना है साथ ही राजनैतिक मान्यताओं पर सटीक व्यंग्य भी है। इस कहानी को हमने ' परि...

श्रीविलास सिंह का आलेख 'अफ्रीकी साहित्य के अपराजेय योद्धा न्यूगी वा तीर्योगो'

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  Ngũgĩ wa Thiong'o लेखन प्रतिरोध का एक बड़ा हथियार होता है। औपनिवेशिक देशों के लेखकों को यह लड़ाई दोहरे तौर पर लड़नी होती है। केन्या के साहित्यकार न्यूगी वा तीयोंगो ने भी अपने जीवन में यह दोहरी लड़ाई लड़ी। औपनिवेशिक देशों के लेखकों की दिक्कत यह है कि उन्हें आजादी के बाद भी जनता के हितों की लड़ाई लड़नी होती है। इस क्रम में उन्हें अपने ही देश के निरंकुश शासकों के कोपाभाजन का शिकार होना पड़ता है। न्यूगी वा तीयोंगो को उनके नाटक । Will Marry When I Want के कारण गिरफ्तार कर लिया गया। 1978 में जेल से छोड़े जाने के पश्चात 1982 में उन्हें देश से निष्कासित कर दिया गया। उनके उपन्यास माटीगारी को केन्या में प्रतिबंधित कर दिया गया। लेकिन तीयोंगो एक अपराजेय योद्धा की तरह आजीवन लड़ते रहे।  श्रीविलास सिंह अपने आलेख में लिखते हैं " 2004 में प्रकाशित उपन्यास 'मुरोगी वा कोगोगो (Wizard of the Crow) में उन्होंने फैंटेसी और व्यंग्य के दोहरे औजारों से यह दर्शाया कि औपनिवेशिक अतीत का दाय न केवल स्थानीय तानाशाही के रूप में मिला है बल्कि संस्कृति में भी रच बस गया है।" वे ऐसे...

ता दाय अन्ह की कहानी 'गाँव की सबसे सुंदर लड़की'

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  Ta  Duy Anh ता दाय अन्ह का जन्म 1959 में हुआ था उन्होंने गुयेन दू रचनात्मक लेखन स्कूल, हनोई में अध्ययन किया और फिर वहीं 1994 से 2000 तक अध्यापन किया। 2000 से उन्होंने वियतनाम लेखक संगठन में संपादक का काम किया। उनके कई उपन्यास और कहानियां प्रकाशित हुई और अक्सर राजनैतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों जैसे भ्रष्टाचार इत्यादि पर लिखा। परिणामस्वरूप उनकी कई पुस्तकें प्रतिबंधित की गई। “गांव की सबसे सुंदर लड़की” उनकी वियतनाम में बहुत प्रतिष्ठित और सर्वाधिक पढ़ी गई कहानी है। वियतनाम के उत्तरी इलाके के एक गांव की पृष्ठभूमि पर, जहां जीवन अपेक्षाकृत सरल और धीमा है, यह कहानी टुक नाम की युवा स्त्री के इर्दगिर्द रची गई है। टुक का चरित्र हावो के संदर्भ में सिंड्रेला जैसा हो सकता था किंतु विरोधाभास यह है कि टुक कहानी के अंत में एक दुखद चरित्र रह जाती है, मुख्यतः अपनी नैतिक परिशुद्धता के कारण।  कहानी का कालखंड अमेरिका– वियतनाम युद्ध (1955–1975) के दौरान और उसकी समाप्ति के समय का है। इस कहानी का उम्दा अनुवाद किया है कवि, अनुवादक श्रीविलास सिंह ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं वियतनामी कहा...