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फरहाद आज़ाद की कहानी 'एक चुम्बन नदी के किनारे'

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  हरेक व्यक्ति की जिन्दगी में कुछ अहसास ऐसे होते हैं जो ताजिंदगी भुलाए नहीं भूलते। ये अहसास जीवन का अटूट हिस्सा बन जाते हैं। और अगर यह अहसास प्रेम का हो तो फिर क्या कहने। अफगान कहानीकार फरहान आज़ाद ने अपनी कहानी 'एक चुम्बन नदी के किनारे' इन मधुर और प्यारे अहसासातों को केन्द्रित करते हुए लिखी है। पहली ही पंक्ति से जैसे हम कहानी से बंध जाते हैं और फिर कहानी और पाठक साथ साथ अन्त तक बने रहते हैं। यही इस कहानी की खूबसूरती भी है। कवि कहानीकार श्रीविलास सिंह ने अनुवादों की श्रृंखला के महत्त्वपूर्ण क्रम में इस बार फरहान आज़ाद की कहानी का उम्दा अनुवाद किया है। आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं फरहाद आज़ाद की कहानी 'एक चुम्बन नदी के किनारे'। इसका हिन्दी अनुवाद किया है  श्रीविलास सिंह ने। (अफगान कहानी) 'एक चुम्बन नदी के किनारे' फरहाद आज़ाद  हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह  मैं कार से बाहर निकला। मैं नर्वस महसूस कर रहा था और मेरी हथेलियों में पसीना आ रहा था। मैं इसके पूर्व किसी संगीत कार्यक्रम में कभी नहीं गया था। मैं कभी किसी बड़े शहर में घर से बाहर नहीं गया था। मैं एक छोटे क़स्बे स...