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उमा चक्रवर्ती का आलेख 'सीता के मिथक का विकास : मिथक और साहित्य में महिलाएँ'

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उमा चक्रवर्ती  भारतीय परम्परा में उन पंच कन्याओं का जिक्र मिलता है जो प्रातः स्मरणीय मानी जाती हैं। : 'अहल्या द्रौपदी कुन्ती तारा मन्दोदरी तथा।/ पञ्चकन्याः स्मरेन्नित्यं महापातकनाशनम्॥' इन पंच कन्याओं में सीता का नाम नहीं आता। हालांकि भारतीय नारियों के आदर्श में सीता का नाम अग्रणी है। प्राचीन भारतीय शास्त्रों में राज्य की निजी भूमि को सीता कहा जाता था। यह भूमि उपजाऊ होती थी। सीता का जन्म भी धरती से ही हुआ और वे अन्ततः धरती में ही समाहित हो गईं। विवाह के बाद सीता ने पति राम के साथ वनवास जाने का निर्णय लिया। जंगल की दिक्कतें उन्हें बताई गईं लेकिन वे अपने इरादे पर दृढ़ बनी रहीं। आगे चल कर उनके जीवन में एक बड़ी त्रासदी तब आई जब लंकाधिपति रावण ने उनका अपहरण कर लिया। राम ने सीता की वापसी के लिए युद्ध किया। सीता राम को मिलीं। लेकिन उन्हें अग्निपरीक्षा देनी पड़ी। राम, सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। लेकिन मात्र एक लांछन के आधार पर सीता को फिर जंगल भेज दिया गया। इस तरह देखें तो सीता का समूचा जीवन ही त्रासदी से परिपूर्ण था। मिथकों का प्रयोग इतिहास लेखन में सतर्कता के साथ करना होता ह...