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मोहम्मद मूसा की कविताएँ

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मोहम्मद मूसा युद्ध प्रायः इसीलिए किए जाते हैं ताकि समस्या का समाधान निकाला जा सके। यह अलग बात है कि युद्ध कोई अन्तिम समाधान नहीं निकाल पाता। अगर ऐसा होता तो दुनिया को आज युद्धों की जरूरत ही नहीं पड़ती। सच तो यह है कि हरेक युद्ध अपने होने के साथ ही अगले युद्ध का बीजारोपण कर देता है। इस तरह देखा जाए तो हमारा इतिहास युद्धों का ही इतिहास है। इस तरह कोई भी युद्ध अन्तिम नहीं होता। गाजा के कवि मोहम्मद मूसा अपनी कविता में उचित ही लिखते हैं : 'यह युद्ध न तो कोई दिशा-सूचक है,/ न ही डूबते हुओं की आवाज़।' आजकल यह दुनिया एक बार फिर युद्धमय है। हम इस युद्ध के खिलाफ दुनिया में उठती हुई आवाजों में अपनी एक फुसफुसाती हुई आवाज के साथ हैं। कल हमने हरीश चन्द्र पाण्डे की कविता प्रस्तुत किया था। आज एक और कवि मोहम्मद मूसा की कविताएँ। तो आइए युद्ध के विरुद्ध कविता के क्रम में आज हम पढ़ते हैं  मोहम्मद मूसा की कविताएँ। युद्ध के विरुद्ध कविता : 2 मोहम्मद मूसा की कविताएँ अंग्रेजी से अनुवाद : भास्कर चौधरी  यह युद्ध आख़िरी नहीं ​यह युद्ध आख़िरी नहीं ​यह युद्ध तुम्हारे जीवन का आख़िरी अध्याय नहीं, न ही ...