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शंकरानंद के कविता संग्रह 'दूसरे दिन के लिए’ पर अरुण अभिषेक की समीक्षा

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  युवा कवि शंकरानंद  का अभी हाल ही में पहला कविता संग्रह ' दूसरे दिन के लिए’ आया है। इस संग्रह पर युवा समीक्षक अरुण अभिषेक की समीक्षा पहली बार के पाठकों के लिए प्रकाशित की जा रही है।                                                 जीवन की असंगत लय की शिनाख्त करती कविताएँ     युवा कवि शंकरानंद का काव्य संग्रह ‘‘दूसरे दिन के लिए’’ एक नए तरह के प्रतीक और बिंब के जरिए, प्रभावित कर देने वाला काव्य-लोक है। इस संग्रह की अधिकांश कविताएँ छोटी-छोटी हैं। ये कविताएँ अपने विन्यास में भले ही छोटी जान पड़े, पर अपनी प्रकृति में अपनी रचनात्मक शक्ति के साथ, चेतना को स्पर्श करती हैं और बेचैन भी। इसकी वजह यह है कि कवि के भीतर भाव-बोध की प्रवीणता इतनी घनीभूत हैं कि वे घटित घटना को अंतस से महसूसते और देखते हैं। एक सूक्ष्म बिलबिलाहट या बेचैनी तेजी से इनके मानस पर तैरती है, जिसे व्...