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नीरज सिंह की कहानी 'क्यों'

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नीरज सिंह  भारत की समूची सामाजिक संरचना में जाति व्यवस्था की भूमिका अहम रही है। इसने राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक परिदृश्य को तो प्रभावित किया ही, साहित्य को भी गहरे तौर पर प्रभावित किया। लेकिन अर्थव्यवस्था की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। आर्थिक मजबूती समूचे परिदृश्य को बदल कर रख देती है। जातीय संरचना चाहें जितनी मजबूत हो, आर्थिक कारक उस व्यक्ति विशेष को खुद उसके सामाजिक परिवेश से अलग कर देता है। कहा जा सकता है कि पूंजी अपने अंदाज़ में वर्ग का निर्धारण करती है और जातिगत चरित्र को भी बदल देती है। नीरज सिंह की यह कहानी उत्तर भारत की जातीय संरचना को समझने के साथ साथ वर्गीय परिस्थिति का भी विश्लेषण करती है। नीरज सिंह एक समर्थ कहानीकार रहे हैं। सत्तर अस्सी के दशक में इनकी कहानियां खासी चर्चित रही हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं नीरज सिंह की कहानी 'क्यों'। 'क्यों' नीरज सिंह बात तो वैसे कुछ भी नहीं थीं। लेकिन लोगों को तो उसका बतंगड़ बनाना था, बना दिया। हुआ यह कि गंगा मोची का बेटा किरपा अपनी उमर के अन्य लड़कों के साथ गांव के बाहर वाले अखाड़े के पास कंचे खेल रहा था...