योगेंद्र आहूजा की कहानी 'मनाना'
योगेन्द्र आहूजा योगेन्द्र आहूजा अपने ढंग के अनूठे कहानीकार हैं । यह अनूठापन उनका शिल्प और उनका कहन है । प्रस्तुत कहानी 'मनाना' में भी इसे देखा जा सकता है । पहल के सौंवे अंक में कथाकार योगेन्द्र आहूजा की यह कहानी प्रकाशित हुई है। आइए आज पढ़ते हैं योगेन्द्र आहूजा की यह कहानी। मनाना योगेंद्र आहूजा To - mrinmayi@mail.com Sub : coaxing sullen wife अब तक जितने मेल्स भेज चुका हूं उनकी गिनती भी याद नहीं। वे सब पता नहीं कहां गुम हो गये, किस अंतरिक्ष या आकाशगंगा में। तुमने एक का भी जवाब नहीं दिया, एक लाइन की सूचना भी नहीं। तुम्हारा फोन हमेशा की तरह खामोश है । तुमसे कुछ कहने की इच्छा हो तो ई-मेल भेजना, मेरे पास बस यही एक तरीका है, बिना जाने कि तुम उन्हें पढ़ती भी हो या नहीं, और यह जानते हुए कि पिछले मेल्स की तरह इसका भी कोई जवाब नहीं आयेगा। लेकिन अब थकान होने लगी है। इसके बाद कोई भेज सकूंगा या नहीं, मुझे नहीं पता, इसलिये इसमें सब कुछ लिख दूंगा, सारी बातें जो इतने बरसों से बूंद-बूंद जमा होती गयी हैं, मगर जिन्हें कहने का मौेका कभी नहीं आया। शा...