ध्यान सिंह की डोगरी कविताएं, अनुवाद : कमल जीत चौधरी
ध्यान सिंह कवि कर्म आम तौर पर आसान नहीं होता। कवि की नियति औरों से बिलकुल अलग होती है। सामाजिक दायित्वों के प्रति सन्नद्ध रहने की उसकी नैतिक जिम्मेदारी होती है। इसी क्रम में उसकी सत्ता के साथ टकराहट भी होती रहती है। कई बार कवि को अपने शब्दों का खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। लेकिन जो इन सबसे घबरा जाए, वह कवि कैसा? कवि की नियति ही संघर्ष की होती है। डोगरी कवि ध्यान सिंह कवि नियति की तरफ इंगित करते हुए उचित ही लिखते हैं यहाँ अनेक तरह के भूत रहते हैं - 'मेरा यह दिल/ एक भूत-बंगला है/ यहाँ अनेक तरह के भूत रहते हैं/ यह इसमें रचते-बसते/ भूती-पंगे लेते रहते हैं/भूत से वर्तमान तक/ इनका उतार नहीं हुआ/ और न ही होगा।' ध्यान सिंह की डोगरी कविताओं का हिन्दी अनुवाद किया है कवि कमल जीत चौधरी ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं ध्यान सिंह की डोगरी कविताएं। ध्यान सिंह की डोगरी कविताएं (हिन्दी अनुवाद कमल जीत चौधरी) साया पेड़; जलस्रोतों के किनारे खड़े हैं पेड़; इनके ऊपर छाया करते आग फाँकते; तपते रहते। तपी हुए छायाओं को पानी तारी^ नहीं लगाने देता सतह पर ही इन्हें नचाता विश्राम ज़...