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कैलाश बनवासी की कहानी 'बड़ी ख़बर'

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हमारे देश में आज चारो तरफ एक अजीब सा मंजर है। मीडिया, कभी जिसकी जिम्मेदारी एक सजग-सतर्क प्रहरी की हुआ करती थी, वह अब पूरी तरह चापलूसी की भाषा में हमेशा नत दिखाई पड़ रहा है। टी. वी. चैनलों के एंकर सत्ता वर्ग की मंशा के अनुरूप ही बड़ी निर्लज्जता और समूची विद्रूपता के साथ अपनी एकतरफा खबरें, अपने अनर्गल राय के साथ परोसते हैं। ऐसे में दो छोटे-छोटे बच्चों के खेल और उनके खिलंदडेपन की तरफ कथाकार का ध्यान अनायास ही जाता है जो अपने पिता के साथ घूमने के अंदाज में बैंक में आ गए हैं और खेलकूद में मशगूल हैं। इस समूची कहानी की पृष्ठभूमि में ये दोनों बच्चे ही हैं। उनका खेलना कहानीकार को सबसे बड़ी नेमत लगता है कैलाश बनवासी ने बड़ी साफगोई से अपनी बात कहानी में रख दी है। तथाकथित 'बड़ी खबरें' दिन-रात अपने समूचे बौनेपन के साथ चलती रहती हैं जबकि वास्तविक और जरुरी खबरें प्रायः ही अनदेखी और उपेक्षित रह जाती हैं। आज पहली बार पर प्रस्तुत है कैलाश बनवासी की नयी कहानी - 'बड़ी खबर'।
बड़ी ख़बर

कैलाश बनवासी



मैं एक चेक भुनाने बैंक आया हूँ।

यह मेरे स्कूल-जहाँ मैं शिक्षक हूँ- का चेक है। स्कूल के विभिन्न फंडों के…

अमीर चन्द वैश्य का आलेख 'शमशेर का ललित गद्य'

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हिन्दी कविता के अनूठे कवि शमशेर बहादुर सिंह ने गद्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण काम किया है। दुर्भाग्यवश शमशेर जी का यह काम प्रायः अलक्षित सा ही रहा है।आलोचक अमीर चन्द वैश्य ने इधर शमशेर के ललित गद्य पर कुछ उल्लेखनीय काम किये हैं। अमीर चन्द वैश्य के ही शब्दों में कहें तो 'शमशेर की गद्य रचनाएं दो संकलनों में उपलब्ध हैं। मलयज द्वारा संपादित पहले संकलन ‘शमशेर बहादुर सिंह की गद्य रचनाएं’। इसमें दोआब के सत्रह आलोचनात्मक निबन्ध हैं। 'प्लाट का मोर्चा' की चौदह कहानियां हैं। नौ स्केच तथा डायरियां संकलित हैं। डॉ. रंजना अरगड़े द्वारा संपादित दूसरे संकलन ‘कुछ और गद्य रचनाएँ’ में 26 निबन्ध हैं,जो विषय की दृष्टि से वैविध्यपूर्ण हैं।' इसके अतिरिक्त शमशेर जी का गद्य पर कुछ महत्वपूर्ण काम है जो दुर्भाग्यवश अभी तक असंकलित हैं। आज पहली बार पर प्रस्तुत है अमीर चन्द वैश्य का आलेख 'शमशेर का ललित गद्य'।


शमशेर का ललित गद्य

अमीर चन्द वैश्य

‘कवियों के कवि’ समझे जाने वाले शमशेर के गद्यकार रूप की चर्चा उतनी नहीं हुई है,जितनी उनके कवि रूप की। अपने समकालीन कवियों अज्ञेय और मुक्तिबोध के गद्य-ल…