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श्वेता मिश्रा की कविताएँ

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हर नया कवि अपने आसपास की घटनाओं, विडंबनाओं और अनुभूतियों को अपने कविता का विषय बनाता है। कवि के आसपास कुछ ऐसा घटित हो रहा होता है जो उसे लिखने के लिए प्रेरित करता है। कवि लिख कर मुक्त होने की कोशिश करता है लेकिन यह मुक्ति हर बार छलावा साबित होती है और वह फिर किसी वाकयात को शब्द दृश्य में ढालने की कोशिश करने में जुट जाता है। यह प्रक्रिया अनवरत चलती रहती है। श्रीकान्त वर्मा की पंक्ति उधार लेकर कहूँ तो 'जो सोचेगा, वह सिहरेगा'। यह सोचना किसी भी रचनाकार के लिए यातना से कम नहीं होता। श्वेता ने कविता की दुनिया में अपने प्रारम्भिक कदम रख दिए हैं। किसी भी बच्चे का पहला कदम बड़ा रोचक  होता है। इस कदम का परिजन उत्सुकता से इंतज़ार करते हैं। इस कदम में भावी जीवन के असंख्य कदमों की आहट छुपी होती है। श्वेता ने कविता को बरतना सीख लिया है। उनकी कविता 'चौके पर चाँद' इस बात की तस्दीक करती है। लेकिन आगे की उबड़-खाबड़, कह लें, कठिन राह उन्हें खुद अपने कदमों से ही तय करनी है। हाँ, इतना जरूर कहा जा सकता है कि श्वेता की रचनात्मकता में काफी संभावनाएं हैं। नए कवि के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करत…

शुभनीत कौशिक का आलेख : 'कला को समर्पित एक जीवन : कपिला वात्स्यायन' (1928-2020)

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बहुमुखी प्रतिभा की धनी कपिला वात्स्यायन को साहित्य एवम संस्कृति की परंपरा विरासत में मिली थी। उनका मूल्यांकन सटीक एवम प्रमाणिक तथ्यों पर आधारित होता था। आम भारतीय के चरित्र का मूल्यांकन करते हुए कपिला जी ने लिखा है -  'वह ‘पाखंडी और विखंडित, दोनों, और जीवन व्यवहार में न केवल दोहरे बल्कि अनेक मानदंडों से चलने वाला होता है। वल्गैरिटी और भद्दापन जिस का स्वभाविक परिणाम होना ही है। अनुभूति और बौद्धिक निष्ठा के बीच एक तीखा अंतर्विरोध उभरता है और अपने हर अर्थ में सुरुचि का अभाव ही वह अंतिम स्वाद है, जो बचा रह जाता है।' कपिला जी का व्यक्तित्व कुछ ऐसा जादुई था कि उनको देखते ही मन में श्रद्धा और आदर की भावना उपजती थी। विशुद्ध भारतीय हिंदू परिवेश की दिखने वाली कपिला जी की सोच और दृष्टि अत्यन्त विशद थी। उनके व्यक्तित्व का निर्माण साहित्य, संस्कृति, इतिहास, पुरातत्त्व, रंगमंच के बहुमुखी संगम से हुआ था। वे सचमुच में एक स्कॉलर थीं। विगत 16 सितम्बर 2020 को कपिला जी के निधन से जो खालीपन आया है उसकी भरपाई हो पाना सम्भव नहीं दिखता। उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए आज हम पहली बार पर प्रस्तु…